जब पासपोर्ट सिर्फ यात्रा दस्तावेज है!

कोलकाता के प्रतिष्ठित अख़बार The Telegraph के पूर्व संपादक आर. राजगोपाल का मामला विपक्ष की हर आशंका को लगभग शब्दशः सही साबित करता दिखाई देता है। मार्च 2026 में राजगोपाल का नाम बालीगंज विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से हटा दिया गया। कारण यह बताया गया कि SIR के दौरान न तो उनका और न ही उनके दिवंगत पिता का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में मिल सका। राजगोपाल कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे। वे देश के एक प्रमुख अख़बार के संपादक रह चुके थे। उनके पिता जाने-माने गांधीवादी, प्रोफेसर और केरल गांधी स्मारक निधि के पूर्व राज्य सचिव थे। लेकिन यहाँ पहचान, प्रतिष्ठा और योगदान, किसी की कोई कीमत नहीं थी। पश्चिम बंगाल में लगभग 27 लाख लोगों के नाम तथाकथित “तार्किक विसंगतियों” (logical discrepancies) के आधार पर मतदाता सूची से हटा दिए गए।

किसी को यह भी नहीं बताया गया कि आखिर गलती क्या थी। राजगोपाल वोट नहीं डाल सके। लेकिन असली मुश्किलें तो उसके बाद शुरू हुईं। उनके पास दस वर्ष का वैध अमेरिकी वीज़ा था, फिर भी वे अमेरिका नहीं जा सके। वे अपनी बेटी की शादी में भी शामिल नहीं हो पाए, क्योंकि सरकार ने उनका पासपोर्ट नवीनीकृत (Renew) नहीं किया। उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं था। वे एक प्रतिष्ठित पत्रकार थे, देश-विदेश की यात्राएँ कर चुके थे और पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज़ जमा कर चुके थे। फिर भी कोलकाता पुलिस ने प्रतिकूल सत्यापन (adverse verification) रिपोर्ट भेज दी। कारण सिर्फ एक था: SIR के बाद उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है। और इसी वजह से उनका पासपोर्ट आज तक नवीनीकरण की प्रतीक्षा में अटका हुआ है। यह कानूनी धोखा है! पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और पासपोर्ट नियम, 1980 में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में होना अनिवार्य है।

मतदाता पहचान पत्र तो केवल पहचान और पते के कई वैकल्पिक दस्तावेज़ों में से एक है। पुलिस वेरिफिकेशन का उद्देश्य केवल यह देखना होता है कि व्यक्ति वास्तव में दिए गए पते पर रहता है या नहीं और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड तो नहीं है। उसका काम यह तय करना नहीं है कि कोई मतदाता सूची में है या नहीं। लेकिन कोलकाता पुलिस ने मतदाता सूची से नाम न होने को ही पासपोर्ट नवीनीकरण से इनकार करने का आधार बना दिया। सवाल उठता है: कोलकाता पुलिस को यह नया निर्देश किसने दिजब पासपोर्ट सिर्फ यात्रा दस्तावेज है!

कोलकाता के प्रतिष्ठित अख़बार The Telegraph के पूर्व संपादक आर. राजगोपाल का मामला विपक्ष की हर आशंका को लगभग शब्दशः सही साबित करता दिखाई देता है। मार्च 2026 में राजगोपाल का नाम बालीगंज विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से हटा दिया गया। कारण यह बताया गया कि SIR के दौरान न तो उनका और न ही उनके दिवंगत पिता का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में मिल सका। राजगोपाल कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे। वे देश के एक प्रमुख अख़बार के संपादक रह चुके थे। उनके पिता जाने-माने गांधीवादी, प्रोफेसर और केरल गांधी स्मारक निधि के पूर्व राज्य सचिव थे। लेकिन यहाँ पहचान, प्रतिष्ठा और योगदान, किसी की कोई कीमत नहीं थी। पश्चिम बंगाल में लगभग 27 लाख लोगों के नाम तथाकथित “तार्किक विसंगतियों” (logical discrepancies) के आधार पर मतदाता सूची से हटा दिए गए।

किसी को यह भी नहीं बताया गया कि आखिर गलती क्या थी। राजगोपाल वोट नहीं डाल सके। लेकिन असली मुश्किलें तो उसके बाद शुरू हुईं। उनके पास दस वर्ष का वैध अमेरिकी वीज़ा था, फिर भी वे अमेरिका नहीं जा सके। वे अपनी बेटी की शादी में भी शामिल नहीं हो पाए, क्योंकि सरकार ने उनका पासपोर्ट नवीनीकृत (Renew) नहीं किया। उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं था। वे एक प्रतिष्ठित पत्रकार थे, देश-विदेश की यात्राएँ कर चुके थे और पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज़ जमा कर चुके थे। फिर भी कोलकाता पुलिस ने प्रतिकूल सत्यापन (adverse verification) रिपोर्ट भेज दी। कारण सिर्फ एक था: SIR के बाद उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है। और इसी वजह से उनका पासपोर्ट आज तक नवीनीकरण की प्रतीक्षा में अटका हुआ है। यह कानूनी धोखा है! पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और पासपोर्ट नियम, 1980 में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में होना अनिवार्य है।

मतदाता पहचान पत्र तो केवल पहचान और पते के कई वैकल्पिक दस्तावेज़ों में से एक है। पुलिस वेरिफिकेशन का उद्देश्य केवल यह देखना होता है कि व्यक्ति वास्तव में दिए गए पते पर रहता है या नहीं और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड तो नहीं है। उसका काम यह तय करना नहीं है कि कोई मतदाता सूची में है या नहीं। लेकिन कोलकाता पुलिस ने मतदाता सूची से नाम न होने को ही पासपोर्ट नवीनीकरण से इनकार करने का आधार बना दिया। सवाल उठता है: कोलकाता पुलिस को यह नया निर्देश किसने दिया?

यह लेख गुरुदीप सिंह सप्पल की लंबी पोस्ट का हिस्सा।

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