चुनाव आयोग ने बैठक कर कई फैसले लेने का जारी किया बयान
2023 वाली गलती कर गया विपक्ष, विपक्षी नेताओं के बिखराव का फायदा उठा ले गई सरकार
इंडियन एक्सप्रेस में खबर प्रकाशित होते ही सड़कों पर उतरना चाहिए था पूरे विपक्ष को
चरण सिंह
विपक्ष के बिखराव का फायदा उठाते हुए सरकार ने ज्ञानेश कुमार मामला काफी हद तक मैनेज कर लिया है। विपक्ष 30 सितंबर बैठक करने जा रहा है और सरकार ने बड़ा खेल कर दिया। 10 महीने में 14 आपत्ति दर्ज कराने वाले दोनों आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ बैठक में शामिल होने और महत्वपूर्ण फैसले लेने का बयान चुनाव आयोग की ओर से जारी करा दिया गया। कैबिनेट सचिव् को भेजी गई चिट्ठी को चुनाव आयोग की पॉलिसी के तहत न भेजने की बात करा दी गई। मतलब विपक्ष ने सरकार को खेल करने के लिए तीन दिन का मौका दे दिया।
मामला तो अभी भी गंभीर है क्योंकि अभी भी तीनों चुनाव आयुक्तों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है। मतलब अभी भी मामले में घालमेल है। सरकार और ज्ञानेश कुमार को डर है कि प्रेस कांफ्रेंस में सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी बड़ा खुलासा न कर दें। सोचने वाली बात है कि जिस सरकार में विपक्ष के नेता खुलकर नहीं बोल पा रहे हैं उस सरकार में चुनाव आयुक्त भला कैसे खुलकर सामने आ सकते हैं। इतना सब होने के बावजूद कांग्रेस के अलावा दूसरा कोई विपक्ष दल अभी सड़कों पर नहीं उतरा है। क्योंकि संधू उत्तराखंड तो जोशी हरियाणा के मुख्य सचिव रह चुके हैं। मतलब सरकार के पास दबाव बनाने के काफी तंत्र हैं।
दरअसल ऐसे मामले में परिवार की खामियां निकाली जाती है। परिजनों किसी मामले में फंसाने की धमकी दी जाती है। और भी बहुत से खतरे होते हैं। ऐसे में परिजनों का दबाव अच्छे-अच्छों को पीछे हटने को मजबूर कर देता है। विपक्ष की एकजुटता का अभाव सरकार को मनमानी करने का मौका दे रहा है। दरअसल यह सारा मामला दोनों चुनाव आयुक्तों पर टिका था। ऐसे में प्रश्न उठता है कि विपक्ष इन चुनाव आयुक्तों को विश्वास में लेने के लिए क्या कर रहा था ? राहुल गांधी के अलावा किसी क्षेत्रीय नेता की ओर से कारगर प्रयास नहीं हुए। जो गलती विपक्ष ने 2023 में चुनाव आयोग पर कोई एफआईआर दर्ज न होने का कानून बनाने के समय की थी वही गलती विपक्ष अब कर रहा है। 30 सितंबर तक तो सरकार पूरा खेल कर देगी। करते रहिये बैठक। वैसे भी लग नहीं रहा कि विपक्ष अभी भी एकजुट होकर सड़कों पर उतरेगा।
चुनाव आयोग की ओर से जारी बयान के अनुसार बैठक में तय किया गया कि फॉर्म 6 को लेकर जो विवाद है, असल में वह कोई मुख्य मुद्दा है हीं नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने भी फॉर्म-6 के डिक्लेरेशन को सही माना है। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों ने आम सहमति के साथ कई फैसले लिए गए हैं। SIR में नोटिस पाए लोगों के घर BLO दस्तावेज लेने जाएंगे, सुनवाई आम तौर पर जरूरी नहीं होगी। DEO जरूरत के अनुसार रैन बसेरों, मजदूरों, गरीबों और बेघरों के लिए हेल्प डेस्क लगाएंगे। SIR में फॉर्म-6 के साथ घोषणा-पत्र की व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट से बरकरार रही। ECINET की समीक्षा वरिष्ठ DEC और स्वतंत्र IIT/IIM विशेषज्ञ की समिति करेगी। आयोग की सभी बैठकों में एजेंडा पहले भेजा जाएगा और बैठक की कार्यवाही जारी होगी।






