जिस चीनी जहाज ने होर्मुज स्ट्रेट पर तोड़ी अमेरिका की नाकाबंदी, उस पर क्या लदा था?

होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं और अमेरिकी नौसेना ने इस रणनीतिक मार्ग को पूरी तरह सील करने का दावा किया था, लेकिन इस भारी नाकेबंदी के बीच एक चीनी टैंकर ने जिस तरह अपनी राह बनाई, उसने वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक खलबली मचा दी है। यह केवल एक जहाज का गुजरना नहीं है, बल्कि अमेरिका की सैन्य धौंस को चीन की सीधी चुनौती है. आखिर उस जहाज पर ऐसा क्या लदा था और वह प्रतिबंधित होने के बावजूद कैसे निकल गया, यह जानना बेहद दिलचस्प है।

 

अमेरिकी नाकेबंदी के बीच चीन की चुनौती

 

सोमवार शाम करीब 7:30 बजे (भारतीय समयानुसार) जैसे ही अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज में ‘मैरीटाइम ब्लॉकेड’ लागू किया, पूरी दुनिया की नजरें इस संकरे जलमार्ग पर टिक गईं। ट्रंप प्रशासन का उद्देश्य ईरान को पूरी तरह अलग-थलग करना था, लेकिन मंगलवार को एक चीनी टैंकर ने इस नाकेबंदी को तोड़कर सनसनी फैला दी। अमेरिकी युद्धपोतों की मौजूदगी के बावजूद इस जहाज का निकलना यह दर्शाता है कि चीन अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है। इस घटना ने साबित कर दिया है कि खाड़ी के पानी में अब अमेरिका का एकछत्र राज नहीं रहा।

 

ब्लैकलिस्टेड जहाज ‘रिच स्टार्री’ की कहानी

 

स जहाज ने इस नाकेबंदी को चुनौती दी है, उसका नाम ‘रिच स्टार्री’ है। यह एक मध्यम दूरी का टैंकर है, जिसे पहले ‘फुल स्टार’ के नाम से जाना जाता था। इस जहाज का इतिहास काफी विवादास्पद रहा है। साल 2023 में ही अमेरिका ने इसे ब्लैकलिस्ट कर दिया था, क्योंकि यह ईरान के साथ तेल और गैस व्यापार पर लगे प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद कर रहा था. चीनी स्वामित्व वाले इस जहाज पर अमेरिका की पैनी नजर थी, फिर भी यह टैंकर अमेरिकी घेरेबंदी को पार करने में सफल रहा।

इस जहाज पर क्या लदा था?

 

रॉयटर्स और एलएसईजी (LSEG) के शिपिंग डेटा के अनुसार, ‘रिच स्टार्री’ पर करीब 2.5 लाख बैरल मेथनॉल लदा हुआ था। मेथनॉल एक ज्वलनशील रसायन है जिसका उपयोग ईंधन और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि यह कार्गो ईरान से नहीं, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के हमरिया पोर्ट से लोड किया गया था. विशेषज्ञों का मानना है कि मेथनॉल जैसे रसायनों की खेप का इस्तेमाल अक्सर प्रतिबंधों के बीच एक कवर के तौर पर भी किया जाता है, ताकि मुख्य व्यापारिक गतिविधियों को छुपाया जा सके।

 

चीनी क्रू और रणनीतिक मजबूती

 

इस जहाज के सुरक्षित निकलने के पीछे एक बड़ा कारण इस पर मौजूद ‘चाइनीज क्रू’ (चीनी चालक दल) भी माना जा रहा है। चीन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह अपने नागरिकों और जहाजों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. अमेरिकी नौसेना के लिए एक चीनी नागरिक वाले जहाज को बलपूर्वक रोकना एक बड़े कूटनीतिक संकट को जन्म दे सकता था. यही वजह रही कि नाकेबंदी के बावजूद रिच स्टार्री को रास्ता मिल गया. इस घटना ने चीन के उस दावे को मजबूती दी है कि वह अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं करेगा।

 

अमेरिका की खामोश प्रतिक्रिया के मायने

 

हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी अमेरिका या संबंधित जहाज कंपनी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वाशिंगटन की यह खामोशी उसकी रणनीति की विफलता की ओर इशारा करती है, यदि अमेरिका इस जहाज को रोकता, तो बीजिंग के साथ सीधा सैन्य टकराव तय था, वहीं, इसे जाने देने से ट्रंप की नाकेबंदी की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं. फिलहाल, यह टैंकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इसने होर्मुज में तैनात अमेरिकी नौसैनिकों के लिए एक असहज स्थिति पैदा कर दी है।

 

वैश्विक तेल और गैस बाजार पर असर

 

होर्मुज से इस टैंकर के गुजरने की खबर के बाद वैश्विक तेल बाजार में भी हलचल देखी जा रही है। अगर चीन इसी तरह अमेरिकी प्रतिबंधों को नजरअंदाज करता रहा, तो ट्रंप की ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ का असर कम हो सकता है। यह घटना दर्शाती है कि आने वाले दिनों में होर्मुज केवल एक जलमार्ग नहीं, बल्कि महाशक्तियों के बीच शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा बना रहेगा. 2.5 लाख बैरल मेथनॉल की यह खेप अब एक प्रतीक बन गई है, जिसने दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत के आदेश को धता बता दिया है।

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