यह जानकारी सौर-ऊर्जा से चलने वाले नौ SIM-युक्त डिवाइस के ज़रिए भेजी जा रही थी। ये डिवाइस ‘EseeCloud’ से जुड़े थे, जो CCTV और निगरानी उपकरणों के लिए चीन में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाला एक सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म है। जांच अधिकारियों ने पाकिस्तान सीमा के नज़दीक स्थित राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में मौजूद संवेदनशील सुरक्षा और रक्षा प्रतिष्ठानों के पास लगाए गए ‘EseeCloud’ के नौ CCTV कैमरे बरामद किए हैं।
चीन की कंपनी ‘गुआंगझू जुआन इंटेलिजेंट टेक जॉइंट स्टॉक कंपनी लिमिटेड’ द्वारा विकसित ‘EseeCloud’ पर आरोप है कि वह लाइव फुटेज को चीन में मौजूद डेटा सेंटरों तक भेज रहा था और वहाँ से यह जानकारी आगे पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर्स तक पहुँचाई जा रही थी।
ये खुलासे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा की जा रही मौजूदा जांच से सामने आए हैं। स्पेशल सेल ने शुक्रवार को ISI और ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ के एक जासूसी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई के तहत पंजाब और दिल्ली से छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
उधर HCL को-फाउंडर अजय चौधरी पहले ही कह चुके हैं कि ‘केंद्र सरकार के ऑफिस में अटेंडेंस मशीनें लगी थीं, खुफिया एजेंसियों ने जांच की तो पता चला कि सभी में चाइनीज़ चिप्स लगे हुए हैं और सारा डेटा चीन चला गया है।’ अजय चौधरी ने एक पॉडकास्ट के दौरान भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और डेटा सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि ‘केंद्र सरकार के कर्मचारियों का डाटा चीन चला गया। फोन भारत में बनते हैं, लेकिन किट चीन से आती हैं, हम सिर्फ़ पेंच कसते हैं। हमारी सरकार भारतीय टेक कंपनियों को उस तरह सपोर्ट नहीं करती, जिस तरह चीन अपनी कंपनियों को करता है।’
मई 2014 के बाद भारतीय समाज में जो बात दृढ़ता से फैला दी गई कि देश सुरक्षित हो न हो लेकिन उसे चलाने वाले नेता को मजबूत और उसकी कुर्सी सुरक्षित होना जरूरी है। तभी तो वह अपने मूल राजनीतिक-सामाजिक संगठन, अपनी पार्टी, देश और संविधान को किनारे रखकर अपनी छाती ठोकते हुए अपने नाम की गारंटी देता है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में सरैंडर एकतरफा दबाव के कारण किया गया था या वह दो तरफा था, यह जासूसी के इस नये रहस्योद्घाटन से कुछ-कुछ समझा जा सकता है।
(आभार : सोशल मीडिया )








