युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए

कश्मीर व आतंकवाद का हल है भारत व पाकिस्तान के बीच मैत्री व शांति

संदीप पाण्डेय

पहलगाम के आतंकवादी हमले के बाद भारत की ओर पाकिस्तान के अंदर आंतकवादी संगठनों के नौ ठिकानों पर की गई कार्यवाही से दोनों देशों के बीच एक युद्ध शुरू हो गया। जब तक युद्ध चल रहा था तब तक तो दोनों देशों में युद्धोन्माद का माहौल रहा लेकिन अचानक अमरीका, जिसने पहले तो कहा कि उसका इस युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है, ने दोनों देशों के बीच युद्ध-विराम की घोषणा कर दी। फिर अचानक माहौल बदल गया और लोगों को बड़ी राहत महसूस हुई। ऐसा लग रहा है कि युद्ध कोई चाहता नहीं था। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कश्मीर समस्या हल करने के लिए मध्यस्थता की भी पेशकश की है। यह वही डोनाल्ड ट्रम्प हैं जो कुछ दिन पहले फिलीस्तीनियों को मिस्र, जार्डन, आदि देशों में बसा कर, गजा को खाली करा अमरीका को सौंपने की बात कर रहे थे। इसलिए अमरीका की कोई भी भूमिका संदिग्ध है। पहलगाम पर हमला इसलिए हुआ क्योंकि पाकिस्तान कश्मीर को विवादित मानता है। भारत पाकिस्तान के बीच जो युद्ध शुरू हुआ था उसमें तो विराम हो गया। सभी लोग राहत महसूस कर रहे हैं। लेकिन कश्मीर के लोग अभी भी असुरक्षित हैं। कल वहां कोई छोटा या बड़ा आतंकवादी हमला नहीं होगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। दो देशों के बीच लड़ाई में कश्मीर के लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। इसका हल हमें निकालना ही होगा।

भारत पाकिस्तान से बात किए बिना इस समस्या का कोई हल निकाल ही नहीं सकता। फिर कश्मीर का जो भी हल निकले वह वहां के लोगों की सहमति के बिना नहीं हो सकता। जब तक कश्मीर के लोगों की राय के मुताबिक वहां कोई हल नहीं निकाला जाता आतंकवाद की समस्या बनी रहेगी। हम उम्मीद करते हैं कि इस युद्ध से इतना तो सबक हमारे नेताओं ने सीखा होगा। बजाए पाकिस्तान को सबक सिखाने के यदि वे कश्मीर की समस्या का हल निकालें तो ज्यादा सार्थक होगा। अमरीका, जिसकी वजह से शांति आई है, पाकिस्तान को आतंकवाद के संरक्षक के रूप में उस तरह से नहीं देखता जैसे हम देखते हैं।

अमरीका ने भी पाकिस्तान में ही जाकर उसामा बिन लादेन को मारा लेकिन उसने पाकिस्तान की सरकार को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया। उसने पाकिस्तान के साथ अपने सामान्य सम्बंध कायम रखे। हकीकत तो यह है कि पाकिस्तान में अब तक 22,000 लोग आतंकवादी घटनाओं में मारे जा चुके हैं। वहां के लोग भी आतंकवाद से त्रस्त हैं। इसलिए दोनों देशों की सरकारों को मैत्री व शांति की पहल लेकर मिलकर आतंकवाद नामक समस्या को खत्म करने का बीड़ा उठाना चाहिए। हम पहलगंाम में मारे गए 26 और उसके बाद भारत-पाकिस्तान युद्ध में मारे गए दोनों तरफ के सभी निर्दोष लागों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

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