‘वोट किसी का ताज किसी को…’

 नीतीश के उत्तराधिकारी बनने की राह पर रिटायर्ड IAS मनीष वर्मा

दीपक कुमार तिवारी

पटना। जनता दल युनाइटेड (जेडीयू) में पूर्व आईएएस अधिकारी मनीष वर्मा के प्रवेश को पार्टी में राजनीत के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। जाहिर है जिस विश्वसनीयता के साथ नीतीश कुमार के निर्देश पर पूर्व आईएएस आरसीपी ने जदयू की संगठनात्मक नींव रखी थी उस विश्वास की धुरी को कहीं न कहीं नीतीश कुमार मिस कर रहे थे। राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह या फिर अशोक चौधरी या फिर विजय चौधरी इसकी भरपाई नहीं कर सकते थे। मनीष वर्मा उस विश्वसनीयता के फिल इन द ब्लैंक हो सकते हैं।

मनीष कुमार नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा के रहने वाले हैं। इनका जन्म 1974 में नालंदा में हुआ। नीतीश कुमार के करीबी रिश्तेदार भी बताए जा रहे हैं। 2014 में पटना के जिलाधिकारी के पद पर रह चुके हैं। पूर्णिया के भी डीएम बनाया गया था। 2012 के बाद ओडिशा को छोड़कर इंटर स्टेट डेपुटेशन में पांच साल के लिए बिहार आ गए। बाद में मनीष कुमार वर्मा ने नौकरी छोड़ दी। 2018 में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का सदस्य मनोनित किया गया। सीएम नीतीश कुमार ने 2022 के फरवरी महीने में मनीष कुमार वर्मा मुख्यमंत्री के लिए अतिरिक्त परामर्शी पद पर रहे।
राजनीतक गलियारों में यह चर्चा भी है कि जिनका जनाधार जमीन पर है वह नीतीश कुमार के दल में मंत्री हो सकते हैं, पर विश्वसनीय नहीं।

राजीव रंजन, विजय चौधरी या फिर अशोक चौधरी एक हद तक राजनीतिक जमीन वाले लोग हैं। आरसीपी सिंह जिस विश्वसनीयता के शिखर पर पहुंचे उसकी वजह थी कि वह पॉलिटिकल व्यक्ति नहीं थे। ब्यूरोक्रेट थे। यह खूबी मनीष वर्मा में भी है। मनीष वर्मा पटना में डीएम के साथ ये नीतीश कुमार के पीएस भी रहे हैं।

मतलब एक अच्छा अंतराल नीतीश कुमार और मनीष वर्मा क्रमशः राजनेता और ब्यूरोक्रेट के रूप में काम भी कर चुके हैं।मनीष वर्मा को लाने के पीछे जो दूसरी कथा है वह जातीय जकड़न से भरा पड़ा है। सूत्रों के अनुसार ललन सिंह को मंत्री बनाने और संजय झा को कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी के भीतर यह संग्राम छिड़ा हुआ है कि वोट किसी का ताज किसी को। पार्टी के भीतर उठते स्वर की भरपाई भी हैं मनीष वर्मा।

जनता दल यू के विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरसीपी की जगह नीतीश कुमार अब मनीष वर्मा को स्थापित करना चाह रहे हैं। इसलिए राजनीतिज्ञों की नजर में नीतीश कुमार का अगला कदम मनीष वर्मा को आरसीपी की ही तरह ही राज्य सभा भेजा जाएगा। जाहिर है एनडीए की ओर से दो राज्यसभा का उम्मीदवार देना है। भाजपा ने अपनी तरफ से उपेंद्र कुशवाहा का नाम घोषित कर दिया है। जदयू को राज्य सभाके लिए नाम की घोषणा अभी करनी है।

सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार ने मनीष वर्मा को राज्यसभा भेजने की तैयारी कर ली है। संभव यह भी है कि उन्हें संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया जाए।

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