बीजेपी ने यूजीसी नियमों में बदलाव कर बीजेपी ने समाज को लड़ाने का काम किया तो कांग्रेस भर रही पिछड़ा एक्ट बनाने का दम्भ
मार्शल कौम को टारगेट कर बटोरी जा रही सहानुभूति, कहीं सीरिया लीबिया न बन जाए हमारा देश
चरण सिंह
वोटबैंक की राजनीति के चलते समाज का ताना बाना सब बिगड़ता जा रहा है। समाज को लड़ाकर वोट हासिल करने की राजनीति देश को गृह युद्ध की ओर धकेला जा रहा है। हिन्दू मुस्लिम मुद्दा प्रभावहीन होता देख बीजेपी ने दलितों और पिछड़ों के वोट हासिल करने के लिए यूजीसी नियमों में बदलाव किया है। अब पिछड़ों के वोट हासिल करने के लिए कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में ओबीसी एक्ट के नाम पर पिछड़ा कार्ड खेला है। लोकसभा चुनाव में सफलता के बाद अखिलेश यादव पीडीए का राग अलाप रहे हैं। सहारनपुर में मस्जिद गिराने की कवायद भी वोटबैंक की रणनीति का ही एक हिस्सा है।
ऐसे ही प्रधानमंत्री सवर्णों के खिलाफ आग उगल कर दलितों को नहीं रिझा रहे हैं। यूजीसी एक्ट के नाम पर सवर्ण और दलितों को भिड़ा दिया गया है। यूपी में सम्राट मिहिरभोज की प्रतिमा को लेकर गुर्जरों और राजपूतों में टकराव भी एक बड़ी राजनीति थी। एक ओर दलित के तौर ओबीसी एक्ट के नाम पर समाज में नफरत पैदा की जा रही है तो दूसरी ओर मार्शल कौम के खिलाफ दूसरी जातियों को लामबंद किया जा रहा है।
ओबीसी एक्ट के नाम पर भले ही गुर्जरों, जाटों और यादवों को रिझाया जा रहा हो पर जमीनी हकीकत यह है कि राजनीतिक दलों ने निशाने पर मार्शल कौम हैं। हरियाणा में बीजेपी ने गैर जाटों के आधार पर चुनाव लड़ा। मनोहर लाल खट्टर के बाद अब साहब सिंह सैनी मुख्यमंत्री हैं। चाहे अभय चौटाला हों, दुष्यंत चौटाला हो अभिमन्यु हों वीरेंद्र सिंह हों जाटों की राजनीति हाशिये पर धकेल दी है। यूपी में भले ही मुख्यमंत्री राजपूत समाज से योगी आदित्यनाथ हों पर उनकी पहचान एक योगी की ज्यादा है। चुनाव हारने के बावजूद केशव प्रसाद मौर्य को उप मुख्यमंत्री बनाया गया।
भले ही अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री हैं पर यूपी में राजपूत, गुर्जर और यादव टारगेट पर हैं। किसी समय में अमर सिंह, मोहन सिंह, जगदीश राणा, राकेश राणा, अरविन्द सिंह गोप, कीर्तिवर्धन सिंह समाजवादी पार्टी में कद्दावर नेता माने जाते थे। आज तारीख में अखिलेश यादव अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद को अग्रिम पंक्ति में बैठाते हैं।
बिहार में यादव और राजपूत सत्ता से बेदखल हैं। एक समय था लालू प्रसाद के साथ ही बिहार में प्रभुनाथ सिंह, नरेंद्र सिंह, आनंद मोहन सिंह सूरजभान सिंह की तूती बोलती थी। आज की तारीख में यादव और राजपूत समाज की अनदेखी की जा रही है। दिल्ली में प्रवेश वर्मा को साइड लाइन कर रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाया है।
देश की राजनीति में एक बड़ा खेल यह भी चल रहा है। मर्शल कौम की राजनीतिक उपेक्षा तो की ही जा रही है। साथ ही लड़ाया भी इन जातियों को जा रहा है। उत्तर प्रदेश में कभी गुर्जर राजपूत विवाद खड़ा कर दिया जाता है तो कभी यादव राजपूत। वोटबैंक के लिए जातियों को आपस में लड़ाने का यह खेल जातीय संघर्ष की ओर धकेल रहा है। यदि देश में प्रेम मोहब्बत का माहौल न बनाया गया तो फिर हमारे की स्थिति लीबिया, सीरिया और पाकिस्तान जैसी हो सकती है। कोई किसी कोई कहीं भी मार देता है। बहु बेटियों की इज्जत संकट में है। जमुई में एक भगवा धारी एक नाबालिग लड़की के साथ दरिंदगी बरतता है।






