उज्बेकिस्तान की दो दिवसीय सफल यात्रा के दौरान ताशकंद में पीएम मोदी की लिखी कविताओं को उज्बेक के स्टूडेंट्स ने हिंदी और उज्बेक भाषा में सुनाया और गायन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने भी वहां मौजूद लोगों से बात की, साथ ही तमिल साहित्य पर भी अपनी राय रखी. इस दौरान उन्होंने एक प्राचीन मुक्तक काव्य रचना तिरुक्कुरल को लेकर भी चर्चा की। इसका एक वीडियो भई सामने आया है। कविता सुनने के बाद पीएम मोदी खुद भावुक हो गए. उन्होंने उज्बेक बच्चों से हिंदी अच्छे से बोलने की तारीफ भी की।
पीएमओ से वीडियो जारी किया गया है, उसमें बच्चे पीएम मोदी की लिखी कविता का पाठ कर रहे हैं. बच्चे कहते हैं, ‘ताकि मानवता कहीं लग न जाए कोई दाग, हिमालयी की कोख में जंगली आग लगी है. इस जंगली आग को मिटाने दो. और ईश्वर की कृपा में आओ. उठो वीर और धीर, कायरता शरीर में समा जाए, उससे पहले उठो वीर अब तो जागो।
इसके अलावा एक अन्य छात्र ने पीएम मोदी की अन्य कविता पढ़ी. ये कविता- ‘भारत ने सदियों के संघर्षों को झेला है। शून्य से संभावनाओं का सृजन किया है। 21वीं सदी का भारत अब आत्मनिर्भर भारत के रास्ते पर कदम बढ़ा चुका है. अब संकल्प भी हमारे होंगे, संसाधन भी हमारे होंगे। सामर्थ्य हाथ में रखने वाले, भाग्य स्वयं गढ़ते हैं।
कविता सुनकर पीएम मोदी ने भी बजाई तालियां, हुए भावुक
इस दौरान बच्चों के द्वारा कविता पढ़ने के बाद पीएम मोदी ताली भी बजाते हुए नजर आए. इस दौरान पीएम मोदी ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा, मेरे लिए कुछ वक्त भावुक वाले रहे. कुछ साल पहले लिखी गई मेरी कविताएं, जो आज मुझे इन नवयुवानों के मुंह से सुनने का अवसर मिला. मैं देख रहा था जो हिंदी में कह रहे थे, हिंदी उनकी भाषा नहीं है, लेकिन भाव वैसे ही प्रकट हुए. यह तब होता है, जब उस भाषा को जीते हैं. भाषा में डूब जाते हैं। तब संभव होता है। इसके अलावा एक अन्य वक्ता ने तामिल साहित्य को लेकर अपनी बात कही. इसके बाद पीएम मोदी ने तिरुक्कुरल को लेकर कहा कि सैकड़ों साल पहले एक तमिल भाषा में तिरुक्कुरल लिखा गया है, आज भी जीवन के सभी क्षेत्रों में वो प्रेरणा देने वाला है।







