लखनऊ : बेसिक स्कूलों में मध्याह्न भोजन (MDM) बनाने वाले रसोइयों की रिटायरमेंट की उम्र 62 साल हो सकती है। हाल ही में कई स्तर पर हुई बैठकों के बाद मध्याह्न भोजन प्राधिकारण इनकी सेवा नियमावली बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। नियमावली बनने के बाद अन्य संविदाकर्मियों की तरह छुट्टियों और नियुक्ति प्रक्रिया सहित कई सेवा शर्तें इन पर भी भी लागू होंगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2004 में कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों में बच्चों को पका हुआ भोजन दिए जाने की योजना लागू की गई थी। उसके बाद 2007 में पिछड़े ब्लॉक के अपर प्राइमरी स्कूलों में और 2008 में सभी अपर प्राइमरी स्कूलों में मध्याह्न भोजन की योजना लागू कर दी गई। वर्तमान में 1.41 लाख स्कूलों के 1.52 करोड़ बच्चों को पका हुआ भोजन दिया जा रहा है। इसके लिए 3.63 लाख रसोइये स्कूलों में कार्यरत हैं।
ऐसे बनी सहमति
रसोइयों को 2000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाता है, लेकिन इनकी अब तक सेवा शर्तें नहीं बनीं। ग्राम समिति इनका चयन करती हैं। कुछ रसोइये 70-75 साल की उम्र में भी कार्यरत हैं। वहीं, ग्राम समिति चाहती है तो किसी को कभी भी हटा देती है। इनकी सेवानिवृत्ति की कोई आयु सरकार ने तय नहीं की है। वहीं, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को 11 महीने का मानदेय मिलता है, लेकिन रसोइयों को 10 माह का ही मानदेय मिलता है। अब इनकी सेवा शर्ते बनाने की तैयारी की जा रही है।
रसोइयों के प्रदर्शन के बाद अफसरों संग हुई बैठक
हाल ही में रसाइयों के प्रदर्शन के बाद अधिकारियों के साथ उनकी बैठकें हुईं। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, शिक्षा विभाग और शासन स्तर के अधिकारियों ने भी मंथन किया। उसके बाद प्राधिकरण को इस बाबत प्रस्ताव करने के लिए कहा गया है। इनकी रिटायरमेंट उम्र 62 साल की जा सकती है।
सेवा शर्तों से क्या अंतर आएगा?
सेवा शर्तें बन जाने से इनकी रिटायरमेंट उम्र तय हो जाएगी। इससे ग्राम समितियों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। अभी इनको किसी तरह की कोई छुट्टी का प्रावधान नहीं है। यहां तक कि मातृत्व अवकाश और चाइल्ड केयर लीव का भी प्रावधान नहीं है। सेवा शर्तें बन जाने से रसोइयों को ये लाभ भी मिल सकेंगे। अन्य संविदा कर्मियों की तरह इनके 11 माह के मानदेय पर भी विचार किया जा रहा है।








