लखनऊ। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का हाल देखने के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भले ही ‘आई-पैक’से कन्नी काट ली हो, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनावों को उन्होंने काफी प्रोफेशनल तरीके से लड़ने की तैयारी की है। इसके लिए सपा ने सभी 403 सीटों पर संभावित उम्मीदवारों की तलाश के लिए बहुत ही व्यापक अभियान शुरू किया है, जिसमें पेशेवर लोगों का भरपूर सहयोग लिया जा रहा है। पूरी प्रक्रिया पर अखिलेश यादव खुद ही नजर रख रहे हैं।
‘पहले पद छोड़ें, फिर टिकट की उम्मीद करें’
यूपी विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के संभावित उम्मीदवारों की पहचान के लिए सबसे पहले अखिलेश ने पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों से कहा है कि जो भी टिकट चाहते हैं, वे पहले अपने संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दें। कई नेताओं ने इस निर्देश का पालन कर भी दिया है और कुछ बहुत जल्द करते दिख सकते हैं। मनी कंट्रोल डॉट कॉम ने यह रिपोर्ट दी है। अखिलेश यादव ने यह निर्देश हाल ही में सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों के साथ हुई मीटिंग में दिए हैं।
अगर कोई जिलाध्यक्ष चुनाव लड़ना चाहते हैं, सबसे पहले वो इस्तीफा दें। पार्टी तभी उनकी उम्मीदवारी पर विचार करेगी। किसी भी जिला अध्यक्ष को खुद से उम्मीदवार घोषित नहीं करना चाहिए।
पार्टी के अंदर के लोगों का कहना है कि ऐसा करके अखिलेश यादव पार्टी में गुटबाजी को कम करना चाहते हैं, ताकि जिलाध्यक्षों या अन्य पदाधिकारियों की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा की वजह से टिकट वितरण प्रभावित न हो।
दो चैनलों से संभावित उम्मीदवारों की हो रही तलाश
समाजवादी पार्टी इस बार दो तरह से उम्मीदवारों का चुनाव कर रही है।
पहले में एक प्राइवेट एजेंसी के माध्यम से टिकट दावेदारों का सर्वे करवाया जा रहा है।
दूसरे में स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से टिकट दावेदारों से संबंधित फीडबैक मांगा जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि सर्वे के नतीजों और कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक के आधार पर ही टिकट दिया जाएगा। इस बार सिफारिशों और लॉबिंग करने वालों का पत्ता कट सकता है।
किस आधार पर यूपी में चुने जा रहे सपा उम्मीदवार?
रिपोर्ट के अनुसार सपा में टिकट देने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी रिटायर्ड आईएएस अधिकारी आलोक रंजन के हाथों में है।
सूत्रों का कहना है कि इसके लिए लखनऊ के गोमती नगर में एक खास दफ्तर बनाया गया है।
इस दफ्तर में लखनऊ की एक यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र विभाग के एक प्रोफेसर, रिसर्च स्कॉलरों और सपोर्ट स्टाफ को विधानसभा वार मूल्यांकन के काम में लगाया गया है।
इस टीम ने एक रिपोर्ट तैयार भी की है, जिसमें कई तरह से संभावित उम्मीदवारों के नामों का मूल्यांकन किया गया है।
मसलन, जीत की संभावना, स्थानीय जातिगत समीकरण में फिट बैठना, जनता के बीच लोकप्रियता, उनकी छवि, क्रिमिनल रिकॉर्ड और पड़ोस के विधानसभा क्षेत्रों तक उनका प्रभाव को शामिल किया गया है। इस रिपोर्ट को पार्टी की कोर कमेटी को सौंपा जाएगा, जो उम्मीदवारों के नाम पर फाइनल मुहर लगाएगी।
अखिलेश यादव को कांग्रेस से गठबंधन पर भी मिले सुझाव
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सपा की इस सर्वे टीम ने कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन को लेकर भी अपने सुझाव दिए हैं।
इसके अनुसार 2022 के विधानसभा चुनावों में करीब 71 सीट ऐसे रहे, जहां सपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा।
जबकि, कांग्रेस गठबंधन की स्थिति में 100 से ज्यादा सीटों के लिए दबाव बना सकती है।
ऐसे में अखिलेश यादव को उनकी टीम ने सलाह दी है कि वह सहयोगियों को 70 से 75 सीटों से ज्यादा न दें।
प्रोफेशनल सर्वे पर सपा को ज्यादा भरोसा
पार्टी सूत्रों का कहना है कि समाजवादी पार्टी को प्रोफेशनल सर्वे पर ज्यादा भरोसा है, क्योंकि इसका मूल्यांकन निष्पक्ष होगा।
जबकि, जिलास्तरीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से जो फीडबैक मिल रहा है, उसमें कई बार दावेदारों के प्रति स्थानीय वफादारी या दुश्मनी का असर हो सकता है।







