टिकट बंटवारे में नहीं होगा कोई हस्तक्षेप
आरएसएस की यूपी चुनाव जीतकर फिर योगी को पीएम बनाने की है रणनीति
मोदी बन सकते हैं राष्ट्रपति और योगी के चेहरे पर लड़ा जाएगा 2029 लोकसभा चुनाव
विदेश नीति के ढुलमुल रवैये के चलते गिरा है मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ
चरण सिंह
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर ही लड़ा जाएगा। चेहरा ही नहीं चुनाव का हर निर्णय अपने हिसाब से लेने का अधिकार भी योगी को दे दिया गया है। योगी जिसको टिकट देना चाहेंगे उसको मिलेगा। बीजेपी और आरएसएस की रणनीति यह है कि योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जीता जाए। यूपी चुनाव जीतकर योगी का चेहरा पीएम पद को लेकर आगे बढ़ाया जाए। मतलब 2029 का लोकसभा चुनाव भी योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर लड़ा जा सकता है।
जानकारी तो यहां तक मिल रही है कि यदि उत्तर प्रदेश चुनाव बीजेपी जीत जाती है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति बन जाएं और योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री बना दिया जाए। स्वभाविक है कि फिर 2029 का चुनाव योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर लड़ा जाएगा। हां मोदी दूसरे राष्ट्रपतियों की तरह नहीं होंगे। मोदी संविधान में संशोधन कर विदेश नीति के साथ ही बहुत से अधिकार अपने पास रख सकते हैं।
दरअसल पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से युद्ध और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सीज फायर की घोषणा करने, 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने, रूस से तेल न खरीदने के लिए भारत पर दबाव बनाने, रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका से अनुमति मांगने। ईरान इजरायल युद्ध में विदेश नीति विफल होने समेत कितने कारण हैं जिनमें पीएम मोदी की बड़ी फजीहत हुई है। ऐसे में पीएम मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ बहुत गिरा है। ऊपर से यूजीसी एक्ट के चलते सवर्ण बीजेपी नेतृत्व से बहुत नाराज है।
ऐसे में बीजेपी न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि लोकसभा चुनाव के लिए भी योगी आदित्यनाथ का चेहरा तैयार कर रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जीतकर केशव प्रसाद को मुख्यमंत्री और योगी आदित्यनाथ को पीएम बनाया जा सकता है। ऐसे में योगी के समर्थक नाराज होने के बजाय खुश हो जाएंगे। ऐसे में प्रश्न उठता है कि गृह मंत्री अमित शाह की प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा का क्या होगा ? ऐसे में इस चर्चा पर दम लग रहा है कि अमित शाह योगी आदित्यनाथ को हरवाने का प्रयास कर सकते हैं। वैसे भी समाजवादी पार्टी ने भी यह बात कहनी शुरू कर दी है। सपा की सरकार बनने का एक कारण उसके नेता अमित शाह की यह रणनीति भी मानकर चल रहे हैं।
दरअसल लोकसभा चुनाव में 34 सीटों पर योगी आदित्यनाथ की सहमति के बिना टिकट दिया गया था। बीजेपी हारी भी अधिकतर वे ही सीटें थी। जब अमित शाह की लॉबी के नेता केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, ओमप्रकाश राजभर ने हार का ठीकरा योगी के सर पर फोड़ने का प्रयास किया तो योगी आदित्यनाथ पर 34 सीटों पर उनकी सहमित के बिना टिकट न देने की बात कह दी थी। उसके बाद 10 सीटों पर हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा उप चुनाव की पूरी जिम्मेदारी योगी आदित्यनाथ को सौंप दी थी। योगी आदित्यनाथ ने 10 में से 9 सीटें जीतकर अपने को साबित कर दिया था। अब योगी को पूरे उत्तर प्रदेश चुनाव की जिम्मेदारी सौंप दी है। चुनाव प्रचार में भी वह जिसे चाहेंगे उसे बुलाएंगे।
वैसे भी अधिकतर चुनाव अमित शाह की नेतृत्व में ही लड़े लड़ा जा रहा हैं। प्रधानमंत्री स्टार प्रचारक होते हैं। उत्तर प्रदेश चुनाव योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। मतलब साफ़ है कि उत्तर प्रदेश में योगी को कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा। हां अमित शाह योगी को पीएम चेहरा बनने से रोकने के लिए उत्तर प्रदेश चुनाव हरवाने का प्रयास कर सकते हैं। वैसे भी योगी को साइड लाइन करने के लिए उनके पास इससे बड़ा मौका नहीं होगा। निश्चित रूप से योगी के सामने हैट्रिक बनाने के लिए बड़ी चुनौती है। उन्हें जहां एक ओर अखिलेश यादव की पीडीए से लड़ना है वहीं अमित शाह की लॉबी भी अंदरखाने उनका विरोध करेगी। अब देखना यह होगा कि योगी आदित्यनाथ अपने को कैसे साबित करेंगे।
दरअसल बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन नितिन ने 2027 के विधानसभा चुनाव योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर लड़ने की घोषणा कर दी है। नितिन नवीन से एक साक्षात्कार में पूछा गया कि आने वाले समय में यूपी में चेहरा सीएम योगी होंगे? इसके जवाब में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि देखिए, हमारे मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ही सरकार चलती है। इसलिए स्वाभाविक रूप से वही हमारा प्रमुख चेहरा होंगे।
नवीन ने कहा कि उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य को एक बेहतर और विकसित प्रदेश बनाने की दिशा में लगातार काम हुआ है। कभी अपराध, वसूली और जातिगत राजनीति के लिए पहचाने जाने वाला उत्तर प्रदेश आज विकास, एक्सप्रेसवे और मजबूत कानून-व्यवस्था के लिए जाना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था को लेकर जो सख्ती दिखाई गई है, वह भी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिनी जा रही है। इन सभी पहलुओं-विकास, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर लॉ एंड ऑर्डर-के आधार पर यह माना जा रहा है कि राज्य में तीसरी बार सरकार बनाने की स्थिति मजबूत है।