यूनिसेफ़ और बिहार सरकार ने मनाया पोषण सप्ताह

बताया कैसे बनेगा ‘मेरी थाली सेहत वाली

पटना। सितम्बर को ‘पोषण माह’ के रूप में मनाए जाने के अवसर पर, आईसीडीएस, मिड-डे मील (एमडीएम) के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी तथा यूनिसेफ़ के विशेषज्ञ एक साथ आए और पोषण विषय पर मीडिया संवेदनशीलता कार्यक्रम के साथ ‘मेरी थाली सेहत वाली’ अभियान का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा विभाग, बिहार सरकार के मिड-डे मील निदेशक श्री विनायक मिश्रा ने कहा कि इस अभियान की शुरुआत यह संदेश देने के लिए हुई है कि पोषण- परिवार, समुदाय, मीडिया और सरकार—सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि मिड-डे मील योजना समय के साथ सूखे अनाज से पके हुए भोजन तक पहुँची है और अब इसमें गुणवक्तापूर्ण पोषण पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

वरिष्ठ मीडिया विशेषज्ञ श्री प्रवीण बागी ने कहा कि मीडिया की भूमिका सरकारी योजनाओं की जानकारी आमजन, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाने में अहम रही है। उन्होंने बताया कि मीडिया ने स्वास्थ्य, पोषण सुधार और बाल मृत्यु दर में कमी लाने जैसे सामाजिक बदलावों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। श्री बागी ने ज़ोर देकर कहा कि एक बेहतर समाज की नींव बच्चों पर टिकी है और उन्हें केंद्र में रखकर काम करना आवश्यक है।

यूनिसेफ़ की संचार विशेषज्ञ डॉ. पूजा ने मीडिया को समाज के मुद्दों, विशेषकर बच्चों और किशोरों से जुड़ी चुनौतियों को सामने लाने का “मुख्य सहयोगी” बताया। वहीं, यूनिसेफ़ की पोषण अधिकारी डॉ. शिवानी दार ने कहा, “पोषण कोई दान नहीं, यह अधिकार है। मीडिया इस अधिकार को हर बच्चे, किशोर और महिला तक पहुँचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।”

नालंदा मेडिकल कॉलेज के सहायक प्राध्यापक एवं राज्य संसाधन केंद्र (आईवाईसीएफ) के नोडल अधिकारी डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि बच्चों की भोजन की आदतों को सबसे अधिक माता-पिता प्रभावित करते हैं। आईसीडीएस प्रशिक्षण पदाधिकारी सुश्री जया मिश्रा ने महिलाओं और बच्चों के आहार सुधार में आईसीडीएस की भूमिका को रेखांकित किया। यूनिसेफ़ के पोषण अधिकारी डॉ. संदीप घोष ने एनीमिया और मोटापे की रोकथाम के लिए बनाए गए स्वास्थ्यवर्धक आहार पैकेज प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के दौरान ‘मेरी थाली सेहत वाली’ अभियान की प्रचार सामग्री का भी विमोचन किया गया। इसमें आईसीडीएस, एमडीएम विभाग और यूनिसेफ़ के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

इस अवसर पर राज्य के वरिष्ठ पत्रकारों, संपादकों, टीवी और रेडियो पेशेवरों तथा डिजिटल मीडिया क्रिएटर्स ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य मीडिया को पोषण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गहराई, सहानुभूति और तत्परता से रिपोर्टिंग करने के लिए तैयार करना था।

  • Related Posts

    BJP विधायक विनय बिहारी धरना पर बैठे, बोले- ‘जब तक सम्राट चौधरी…’  

    लौरिया विधानसभा से बीजेपी के विधायक विनय बिहारी…

    Continue reading
    छठ पर बिहार जाने वालों को मिलेगी राहत, दिल्ली सरकार चलाएगी बसें

    छठ पूजा पर अपने घर बिहार जाने की…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    सामाजिक भेदभाव को खत्म करना बड़ी चुनौती

    सामाजिक भेदभाव को खत्म करना बड़ी चुनौती

    मेरठ नीला ड्रम केस: आया कोर्ट का फैसला, मुस्कान और साहिल दोषी करार

    मेरठ नीला ड्रम केस: आया कोर्ट का फैसला, मुस्कान और साहिल दोषी करार

    यूपी राज्यसभा चुनाव में तीसरा कैंडिडेट कौन और कब होगा ऐलान? अखिलेश ने बताया

    यूपी राज्यसभा चुनाव में तीसरा कैंडिडेट कौन और कब होगा ऐलान? अखिलेश ने बताया

    गेंहूं-चना समेत इन छह फसलों की बढ़ी MSP, मोदी कैबिनेट के बड़े फैसले

    गेंहूं-चना समेत इन छह फसलों की बढ़ी MSP, मोदी कैबिनेट के बड़े फैसले

    SIR को लेकर तेजस्वी यादव का बड़ा हमला, ‘बिहार का चुनाव पूरा फर्जीवाड़ा…’

    SIR को लेकर तेजस्वी यादव का बड़ा हमला, ‘बिहार का चुनाव पूरा फर्जीवाड़ा…’

    कौन होता है प्राइवेट यूनिवर्सिटी का मुखिया? कितनी होती है उसकी सैलरी

    कौन होता है प्राइवेट यूनिवर्सिटी का मुखिया? कितनी होती है उसकी सैलरी