12 फरवरी देशव्यापी हड़ताल को गौतम बुध नगर में सफल बनाने के लिए ट्रेड यूनियनों का धुआंधार प्रचार अभियान जारी

मजदूरों को गुलाम और असुरक्षित बनाने का हथकंडा है लेबर कोड- गंगेश्वर दत्त शर्मा “सीटू” नेता

गौतमबुद्धनगर देशव्यापी हड़ताल को लेकर सीटू व अन्य ट्रेड यूनियनों का गौतम बुद्ध नगर में जनसंपर्क अभियान आज भी धुआंधार जारी रहा। सीटू जिला अध्यक्ष मुकेश कुमार राघव के नेतृत्व में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक क्षेत्रों में टेंपो से माइक प्रचार कर मजदूरों से हड़ताल को सफल बनाने की अपील की गई। इसी तरह फेस- 3, नोएडा में ई-रिक्शा से माइक प्रचार जनवादी महिला समिति की नेता रेखा चौहान गुड़िया देवी, माकपा नेता हरकिशन सिंह के नेतृत्व में एवं फेस टू नोएडा में सीटू जिला महासचिव रामस्वारथ, दादरी में सीटू सह सचिव पारस रजक और नोएडा फेस-1, में सीटू नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा, रामसागर आदि के नेतृत्व में अभियान चलाया गया तथा इसी तरह अन्य ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने भी जगह-जगह नुक्कड़ मीटिंग, पर्चा वितरण कर हड़ताल को सफल बनाने की अपील किया। हड़ताल को मजदूरों को व्यापक समर्थन देखने को मिल रहा है।
नुक्कड़ सभाओं को सम्बोधित करते हुए मजदूर-कर्मचारी नेताओं ने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार की नीतियां लगातार मेहनतकश जनता के अधिकारों का हनन कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने पिछले 11 वर्षों में श्रम कानूनों को कमजोर कर पूंजीपतियों को लाभ पहुँचाया है। नवंबर में पारित चार लेबर कोड्स को रद्द करवाने, न्यूनतम वेतन 26000/ हजार रुपये लागू करने, पक्की नौकरी की गारंटी और निर्माण मजदूरों के पंजीकरण की बहाली के लिए 12 फरवरी को ऐतिहासिक चक्का जाम किया जाएगा।
मजदूर नेताओं ने मनरेगा की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ‘विकसित भारत- जी राम जी’ के नाम पर मनरेगा के मूल ढांचे को खत्म किया जा रहा है। सरकार ने काम मांगने के 15 दिन के भीतर काम देने की गारंटी और बेरोजगारी भत्ते जैसे कानूनी अधिकारों को समाप्त कर दिया है। नेताओं का मानना है कि यह बदलाव ग्रामीण क्षेत्रों में ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा देने की एक बड़ी साजिश है, जिसे मजदूर वर्ग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा। वक्ताओं ने कहा कि बिजली बिल-2025 की नीतियोंऔर लोकतांत्रिक आंदोलनों को दबाने के लिए ‘शांति बिल’ जैसे कानून लाना सरकार की जन-विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। मजदूर किसान संगठनों की मांग है कि सभी काले कानूनों को वापस लिया जाए।
ट्रेड यूनियन नेताओं ने आह्वान किया कि 12 फरवरी को देश का हर मजदूर, किसान और छोटा व्यापारी सड़कों पर उतरकर सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराएगा। उन्होंने कहा कि देश की तरक्की में खून-पसीना बहाने वाला मजदूर अब शोषण और अपमान को और अधिक सहन नहीं करेगा।

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