राजगीर। जैन धर्म के 20 वें तीर्थंकर मुनि सुब्रत स्वामी के तीन दिवसीय केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव का भव्य आयोजन आध्यात्मिक शहर राजगीर में मंगलवार को आरंभ हुआ है। महोत्सव के पहले दिन कार्यक्रमों का शुभारंभ अनुकंपा दान से हुआ. इस अवसर पर 375 लोगों के बीच राशन कीट के पैकेट का वितरण किया गया। नौलाख मंदिर में मध्यान्ह में 18 पाप स्थानक पूजा का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश- प्रदेश के विभिन्न राज्यों से आए जैन श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए। तीर्थंकर मुनि सुब्रत स्वामी की बहुत ही सुन्दर ऑगी की गई है। शाम में मुनि सुब्रत स्वामी मंदिर में भक्ति भावना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शानदार आयोजन किया गया।
भक्ति के इस कार्यक्रम में श्रद्धालु अपने आप को झुमने से नहीं रोक पाये। इस अवसर पर नौलाख मन्दिर तथा मंदिर परिसर को फुलों और रंगबिरंगे बिजली बल्बों से सजाया गया है। मुनिदादा कल्याणक मंडल मुम्बई के कोमल मेहता ने इस अवसर पर कहा कि राजगीर अनादि काल से ऐतिहासिक और अध्यात्मिक शहर है। यह जैन धर्म के 20 वें तीर्थंकर मुनि सुब्रत स्वामी की जन्म भूमि, चार कल्याणक और 24 वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की कर्मभूमि के रूप में विख्यात है। यहाँ के कण – कण में प्रभु ने विचरण किया है। आज भी शांति चित से सुनने पर उनकी पग ध्वनि सुनाई पड़ती है। ऐसी पवित्र भूमि की यात्रा भाग्यशालियों को ही मिलती है। हम अपने को धन्य समझते हैं कि हमें प्रभु सुब्रत स्वामी की कल्याणक भूमि में उपस्थित होकर प्रभु की आराधना करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
संस्था के ट्रस्टी रणवीर कुमार जैन ने कहा कि तीर्थकर परमात्मा के चरण जहाँ पड़े ऐसी पवित्र नगरी राजगीर तीर्थ में आये हुये तीर्थयात्रियों का स्वागत कर हम काफी आनन्दित महसुत कर रहे हैं। यह हमारे लिये सौभाग्य की बात है। भगवान मुनि सुब्रत स्वामी के चार कल्याणक च्यवन, जन्म, दीक्षा एवं केवलज्ञान इसी पवित्र भूमि पर हुये हैं। जैन श्वेताम्बर भंडार तीर्थ के सहायक प्रबंधक ज्ञानेन्द्र पाण्डेय ने कहा कि कल्याणक पूजा के मौके पर महोत्सव का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है। इससे हम सबों में भक्ति भावना की नई उर्जा का संचालन होता है। कल्याणक पूजा के आयोजन से समाज में एक अच्छा संदेश जाता है। भगवान की आराधना करने से काफी सुकुन मिलता है। महोत्सव के मौके पर आयोजित इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु और स्थानीय लोग शामिल हुये हैं। कार्यक्रम में समीर मेहता, जिमी मेहता, प्रभुलाल संघवी, परेश संघवी, हनीष संघवी, दीपेश भाई, राजु भाई, विजय भाई, नीलेश भाई, पारस शाह, ललीत शाह, कोमल मेहता, निपुन मेहता, रमेशचन्द भूरा, सुशील कुमार जैन, गुणवंती बेन, मधु बेन, नमीता जैन, गीता बेन, प्रिया बेन, वैशाली बेन, प्रेमलता बेन, पुनम बेन, सुखराज जैन, पूर्णीमा जैन, संस्था के कैशियर संजीव कुमार जैन, सत्येन्द्र कुमार सहित अनेकों प्रमुख लोग शामिल हुये।
नगर शोभायात्रा आज और बरघोड़ा शोभायात्रा कल
बुधवार को सबसे पहले पर्यटक शहर राजगीर में आकर्षक नगर शोभायात्रा गाजेबाजे के साथ निकाली जाएगी। इस शोभायात्रा में गाजे बाजे के साथ दर्जनों रथ और हजारों लोग नगर शोभायात्रा में शामिल होंगे। शोभायात्रा के दौरान वस्त्र और नगद लुटाये जाने की पुरानी परंपरा है। उसी दिन दोपहर तीर्थंकर मुनि सुब्रत स्वामी का शकस्तव अभिषेक पंच गव्य से किया जायेगा। पहले दिन की तरह महोत्सव की दूसरी शाम भी मुंबई के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत भव्य किया जाएगा।
महोत्सव के आखिरी दिन मंदिर परिसर से बरघोड़ा की निकासी होगी। इस बरघोड़ा शोभायात्रा की भव्य तैयारी की गई है। यह शोभायात्रा मंदिर परिसर से निकालकर शहर के विभिन्न मार्गो से होते हुए पुनः मंदिर परिसर वापस आएगी। इस शोभायात्रा में देश के विभिन्न प्रदेशों और कोने से आए हुए जैन श्रद्धालु और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में भाग लेंगे। कार्यक्रम का समापन नौलखा मंदिर में भक्ति भावना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न होगा। श्री जैन श्वेतांबर भंडार तीर्थ के सहायक प्रबंधक ज्ञानेंद्र पांडेय और कैशियर संजीव कुमार जैन ने बताया कि जैन धर्म के तीर्थंकर मुनि सुब्रत स्वामी का जन्म मगध साम्राज्य के ऐतिहासिक राजधानी, राजगीर में हुआ था। उनके चार कल्याण भी पंच पहाड़ियों से युक्त इसी आध्यात्मिक शहर में हुआ था।