भारत-पाक दोनों ही देशों के लिए 1965-1971 से घातक होगा यह युद्ध! 

पाकिस्तान हो जाएगा पूरी तरह से बर्बाद तो भारत जाएगा पिछड़ 
युद्ध लंबा खिंचने पर बलूच लिबरेशन आर्मी, अफगानिस्तान और POK की अस्थिरता से बिगड़ जाएगा हालात 

द न्यूज 15 ब्यूरो 
नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान में युद्ध लगभग तय माना जा रहा है। दोनों ओर से पूरी तैयारी कर ली गई है। समझने की बात यह है कि इस बार युद्ध हुआ तो 1965 और 1971 वाला नहीं होगा। यह युद्ध बहुत विनाशकारी होगा। दोनों ही देशों पर इसका बुरा असर पड़ेगा यदि पाकिस्तान पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा तो भारत भी बहुत पीछे चला जाएगा। युद्ध की स्थिति में दोनों देशों पर गंभीर प्रभाव पड़ेंगे, जो सैन्य, आर्थिक, सामाजिक और कूटनीतिक स्तर पर होंगे।
इसमें दो राय नहीं कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही संकटग्रस्त है। विदेशी मुद्रा भंडार केवल 8 अरब डॉलर के आसपास है और IMF ने 2025 के लिए GDP वृद्धि अनुमान को 3% से घटाकर 2.6% कर दिया है। युद्ध होने की स्थिति से अर्थव्यवस्था और चरमरा सकती है। भारत के साथ व्यापार बंद होने और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा कम होने से आर्थिक मंदी 2-3% तक गहरा सकती है। युद्ध के लिए अतिरिक्त सैन्य खर्च पाकिस्तान के सीमित संसाधनों पर बोझ डालेगा, जिससे जनकल्याण योजनाएं प्रभावित होंगी।
जगजाहिर है कि पाकिस्तान की सेना भारत की तुलना में कमजोर है। भारत के पास 180 परमाणु हथियार और आधुनिक रक्षा प्रणालियां (जैसे राफेल, S-400) हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान लंबे समय तक भारत के सामने टिक नहीं पाएगा। युद्ध लंबा खिंचने पर बलूच लिबरेशन आर्मी, अफगानिस्तान, और POK की अस्थिरता से स्थिति और बिगड़ सकती है। युद्ध के दौरान पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों (जैसे लश्कर-ए-तैयबा) की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी स्थिति को और कमजोर करेगा।

सिंधु नदी के पानी पर 40% आबादी निर्भर है। पानी की कमी से कराची और लाहौर जैसे शहरों में पेयजल संकट गहरा सकता है। परमाणु युद्ध की स्थिति में लाखों लोगों की जान जा सकती है, और सामान्य युद्ध में भी नागरिक हताहत होंगे। भुखमरी, गरीबी, और क्षेत्रीय विद्रोह (बलूचिस्तान, POK) से सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ सकता है। विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, 2025 तक 74% आबादी भुखमरी के कगार पर हो सकती है।

पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थन की नीति पहले से ही उसकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा चुकी है। भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र और विश्व नेताओं को सबूत देने से यह अलगाव और बढ़ेगा। चीन का रुख: चीन ने पाकिस्तान में भारी निवेश किया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन युद्ध की स्थिति में सीमित समर्थन देगा, क्योंकि वह क्षेत्रीय अस्थिरता नहीं चाहेगा। भारत का रक्षा बजट 6.75 लाख करोड़ रुपये है। एक छोटी अवधि के युद्ध में 1.5 लाख करोड़ रुपये (20% रक्षा बजट) और लंबे युद्ध में 3-4 लाख करोड़ रुपये का खर्च हो सकता है।

अर्थव्यवस्था पर असर: युद्ध से उत्पादन में कमी, व्यापार में व्यवधान, और निवेशकों का भरोसा कम होने से महंगाई बढ़ सकती है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का मूल्य गिरकर 100 रुपये प्रति डॉलर हो सकता है, जिससे आयात (विशेषकर कच्चा तेल) महंगा होगा। लंबी अवधि का प्रभाव: नीति आयोग के अनुसार, युद्ध न होने पर GDP में 8% वृद्धि संभव है, लेकिन युद्ध से यह प्रभावित हो सकता है, और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य टल सकता है।

रत की सेना तकनीकी और संख्यात्मक रूप से मजबूत है। राफेल, अग्नि-5 मिसाइल, और S-400 जैसी प्रणालियां उसे बढ़त देती हैं। युद्ध में सैनिकों और नागरिकों की हानि होगी। परमाणु युद्ध की स्थिति में भारत को भी भारी नुकसान होगा, जिसमें लाखों लोग प्रभावित हो सकते हैं। रणनीति: भारत की रणनीति आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई (जैसे 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक) पर केंद्रित है, लेकिन पूर्ण युद्ध में हवाई और समुद्री क्षेत्रों में भी कार्रवाई की आवश्यकता होगी।

जनहानि और विस्थापन: युद्ध सीमित क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिक हताहत होंगे और विस्थापन बढ़ेगा। युद्ध के समय भारत में राष्ट्रीय एकता बढ़ सकती है, लेकिन आंतरिक सामाजिक तनाव (जैसे धार्मिक या क्षेत्रीय) भी उभर सकते हैं। युद्ध से अस्पतालों और बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ेगा, विशेषकर परमाणु युद्ध की स्थिति में। भारत ने पहलगाम हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र और 13 विश्व नेताओं को सबूत देकर अपनी स्थिति मजबूत की है। रूस और अन्य मित्र देशों का समर्थन मिलने की संभावना है। जोखिम: सिंधु जल समझौते को निलंबित करने जैसे कदमों से भारत की छवि को नुकसान पहुंच सकता है, क्योंकि विश्व समुदाय इसे आक्रामक कदम मान सकता है। क्षेत्रीय स्थिरता: युद्ध से दक्षिण एशिया में अस्थिरता बढ़ेगी, जिससे बांग्लादेश, नेपाल, और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं।

यदि दोनों देश परमाणु हथियारों का उपयोग करते हैं, तो वैश्विक पर्यावरण और कृषि उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। 2013 की IPPNW रिपोर्ट के अनुसार, इससे 2 अरब लोगों की मौत हो सकती है, और भारत, पाकिस्तान, और चीन की मानव सभ्यता खत्म हो सकती है। संभावना: रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच सीमित युद्ध की संभावना अधिक है, क्योंकि परमाणु युद्ध दोनों के लिए आत्मघाती होगा।
युद्ध से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, सैन्य स्थिति, और सामाजिक स्थिरता पर गहरा संकट आएगा। पानी और खाद्य संकट, अंतरराष्ट्रीय अलगाव, और आंतरिक विद्रोह उसे और कमजोर करेंगे। भारत: भारत को आर्थिक और मानवीय नुकसान होगा, लेकिन उसकी मजबूत सैन्य और कूटनीतिक स्थिति उसे बढ़त देगी। हालांकि, लंबे युद्ध से भारत के विकास लक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। दोनों देशों के लिए कूटनीतिक समाधान और तनाव कम करना सर्वोत्तम है, क्योंकि युद्ध का परिणाम दोनों के लिए विनाशकारी होगा, विशेषकर परमाणु युद्ध की स्थिति में।

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