दिसंबर 2025 के अंत से ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए हैं, जो आर्थिक संकट से ट्रिगर हुए लेकिन जल्दी ही राजनीतिक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के खिलाफ “डेथ टू डिक्टेटर” (तानाशाह मुर्दाबाद) जैसे नारे लगाए हैं।
मुख्य बिंदु:
प्रदर्शनों की शुरुआत: तेहरान के बाजारों में व्यापारियों ने ईरानी रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने और महंगाई बढ़ने के खिलाफ हड़ताल की। रियाल की वैल्यू 2025 में आधी हो गई, महंगाई दिसंबर में 42-50% तक पहुंची।
फैलाव: प्रदर्शन तेहरान से इस्फहान, हमदान, ज़ंजान, याज़्द, शिराज, अहवाज़ आदि शहरों और कई प्रांतों तक फैले। कुछ रिपोर्ट्स (मुख्य रूप से भारतीय मीडिया जैसे आज तक, टीवी9) में इसे 21 प्रांतों तक फैलने की बात कही गई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्रोत (NYT, BBC, Al Jazeera) कहते हैं कि यह कई प्रांतों (9 से अधिक) में फैला और 31 में से 21 प्रांतों में सरकारी छुट्टी/शटडाउन घोषित किया गया।
नारे और मांगें: “डेथ टू डिक्टेटर”, “डेथ टू खामेनेई”, “न तो गाज़ा न लेबनान, मेरी जान ईरान के लिए”, कुछ जगहों पर निर्वासित शाहज़ादे रज़ा पहलवी के समर्थन में नारे। छात्रों ने यूनिवर्सिटी में हिस्सा लिया।
सरकारी प्रतिक्रिया: राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की पेशकश की, सेंट्रल बैंक गवर्नर को बदला। कुछ जगहों पर सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया, एक बसीज सदस्य की मौत की खबर।








