संसद में भी सिर चढ़कर बोल रहा राहुल और अखिलेश जोड़ी का जादू

चरण सिंह
राहुल गांधी और अखिलेश यादव की जोड़ी लोकसभा चुनाव में तो हिट रही ही अब संसद में इस जोड़ी की चर्चा हो रही है। ओम बिरला के दूसरी बार लोकसभा अध्यक्ष बनने पर उन्हें बधाई देते हुए जिस तरह से राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने अपने तेवर दिखाए, जिस तरह से ओम बिरला के आपातकाल पर निंदा प्रस्ताव लाने पर विपक्ष ने हंगामा किया उसके आधार पर कहा जा सकता है कि इस बार विपक्ष सत्तापक्ष पर हावी रहने वाला है। वैसे भी सांसद पद की शपथ लेते हुए विपक्ष के सांसदों ने संकेत दे दिये हैं कि इस बार पिछली लोकसभा की तरह विपक्ष दबाव में नहीं आने वाला है। न ही प्रधानमंत्री इस तरह की भाषण देने वाले हैं कि मैं अकेला इन सभी पर भारी हूं।
दरअसल 2017 में जब अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने मिलकर उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव लड़ा तो प्रधानमंत्री नरंेद्र मोदी ने यूपी के दो लड़के कहकर संबोधित किया था। 2017 में तो यह जोड़ी कोई कमाल न दिखा पाई पर २०२४ के लोकसभा चुनाव में यह जोड़ी हिट हो गई। वह उत्तर प्रदेश ही रहा जहां से भाजपा को ऐसा झटका लगा कि भाजपा अपने दम पर सरकार न बना सकी। मतलब यह सरकार एनडीए की है। प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी नहीं कह पाठंगे। उत्तर प्रदेश में भाजपा 80 में से 80 सीटें जीतने का दावा कर रही थी कि 33 सीटों पर ही सिमट कर रह गई। समाजवादी पार्टी अकेले 37 सीटें जीतने में सफल रही। मतलब यूपी के लड़के कमाल कर गये। सांसदों की संख्या के मामले में कांग्रेस देश में दूसरी पार्टी बनी तो समाजवादी पार्टी देश में तीसरी पार्टी तो विपक्ष में दूसरी पार्टी बन गई है।
विपक्ष राहुल गांधी और अखिलेश यादव से उम्मीद लगाये हुए कि इस बार लोकसभा में भाजपा की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी। विपक्ष पर जो सीबीआई, ईडी और इनकम टैक्स के छापे मारे जाते हैं उनकी रफ्तार बहुत कम हो जाएगी। इस बार विपक्ष किसी भी हालत में दबाव में नहीं आने वाला है। इस लोकसभा में बिहार पूर्णिया से पप्पू यादव तो उत्तर प्रदेश नगीना से चंद्रशेखर आजाद ऐसे सांसद हैं, जिन्होंने विषम परिस्थितियों में अपने को साबित किया और लोकसभा पहुंचे। कल यानी गुरुवार को राष्ट्रपति द्रोपर्दी मुर्मू का भाषण और 28 से बहस है। इस सत्र में नीट का मुददा जबर्दस्त रूप से उठने वाला है। साथ ही लेबर कोड का मुद्दा पर जोर शोर से उठने वाला है। इस बार सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं में इतनी खटास है कि सत्र हंगामेदार नहीं बल्कि आरोप प्रत्यारोप का दौर भी आक्रामक होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का वह रूतबा इस सत्र में नहीं रहने वाला जितना पिछले सत्र में रहा था।

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