बड़ा मुश्किल है मायावती का खोया हुआ जनाधार वापस लाना!

चरण सिंह
बसपा मुखिया मायावती अपना खोया हुआ जनाधार वापस लाने के लिए युद्ध स्तर पर लग गई हैं। एक ओर जहां उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं की अपील पर अपने भतीजे आकाश आनंद को फिर से राष्ट्रीय कोर्डिनेटर बना दिया है वहीं राष्ट्रीय स्तर पर सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान की विशेषता यह है कि मायावती ने सदस्यता शुल्क 200 रुपये से घटाकर 50 रुपये कर दिया है। मायावती ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में विरोधी पार्टियों के बरगलाने में नहीं आना है। मायावती का कहना था कि विरोधी पार्टियों ने लोकसभा चुनाव में संविधान बचाने का नारा देकर उनके कैडर को बरगला दिया। अब इन लोगों की बातों में नहीं आना है। उन्होंने कांग्रेस को निशाना बनाते हुए कहा कि जो पार्टी बाबा भीम राव अंबेडकर को संविधान सभा में शामिल होने से रोकने के लिए तमाम हथकंडे अपना रही थी वह पार्टी अब संविधान बचाने की बात कर रही है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि सत्ता में तो भाजपा है तो मायावती कांग्रेस और सपा पर निशाना क्यों साध रही हैं। भाजपा के खिलाफ क्यों नहीं बोल रही हैं। क्या अभी भी मायावती सरकार से डरी हुई हैं ?
ऐसे में प्रश्न उठता है कि जब आकाश आनंद के लोकसभा में सीतापुर में अपने प्रत्याशी महेंद्र यादव के पक्ष में चुनाव सभा को संबोधित करते हुए बीजेपी पर हमलावर होने पर मायावती ने आकाश आनंद को घर बैठा दिया था तो क्या गारंटी है कि फिर से आकाश आनंद को घर नहीं बैठाया जाएगा। या फिर यदि मायावती अपनी तरह पढ़कर भाषण आकाश आनंद से दिलवाएंगी तो आकाश आनंद अपने भाषण में वह धार नहीं ला पाएंगे जो धार उनके भाषण में होती है। या फिर यह भी कहा जा सकता है कि बसपा से उनका युवा वर्ग नहीं जुड़ पाएगा। उधर नगीना से सांसद बनने के बाद चंद्रशेखर आजाद पूरी तरह से फॉर्म में हैं। मायावती को चंद्रशेखर आजाद से यह खतरा महसूस होने लगा है कि कहीं आने वाले समय में चंद्रशेखर आजाद उनके वोट बैंक को नहीं कब्जा लें। मायावती के सामने इस समय एक नहीं बल्कि अनेक चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती तो उनके सामने अपने वोट बैंक को वापस लाना है। दूसरी चंद्रशेखर आजाद आकाश आनंद का रास्ता रोक सकते हैं। तीसरे आकाश आनंद का राजनीतिक कैरियर बनी बनाना है।
मायावती के सामने चंद्रशेखर आजाद कितनी बड़ी ताकत के रूप में उभरकर सामने आये हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नगीना जहां से चंद्रशेखर आजाद सांसद बने हैं, वहां पर मायावती की प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह पाल की जमानत भी नहीं बच पाई। यदि चंद्रशेखर आजाद अन्य सीटों पर भी चुनाव लड़े तो उन सीटों पर भी उनकी पार्टी का प्रदर्शन ठीक ठाक ही रहता। 2007 में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने वाली मायावती को २००९ के लोकसभा चुनाव में वोट प्रतिशत चरम पर था। 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा को 27.8   प्रतिशत वोट मिला था। 2024 के लोकसभा चुनाव में मायावती की पार्टी को 9.8  प्रतिशत वोट मिला है। मतलब मायावती के चुनाव लड़ने से अब तक उनका यह सबसे कम वोट प्रतिशत है। अब देखना यह होगा कि मायावती अपना खोया हुआ जनाधार वापस कैसे ला पाती हैं।

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