केंद्र सरकार को भारी पड़ सकता मीडिया को समेटना, बीजेपी के खिलाफ यूट्यूब चैनलों की लगेगी भरमार!

चरण सिंह 
आजकल लोग उन एंकरों के आक्रामक रुख से अचम्भे में हैं जिन पर गोदी एंकरों की मुहर लग चुकी थी। विशेष कर रिपब्लिक भारत के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी, आज तक की एंकर अंजना ओम कश्यप और श्वेता सिंह के बदले रुख से। ऐसा नहीं है कि सरकारों की दमनकारी नीतियों को देखकर इन लोगों का जमीर जाग गया है। इन चैनलों की समझ में आ गया है कि  सरकार अब सभी मीडिया हाउस को मैनेज के बजाय अडानी और अंबानी ग्रुप को खुश रखने की रणनीति पर काम चल रहा है। लोकसभा चुनाव को देखते हुए सरकार मीडिया को पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखने की रणनीति पर काम कर  रही है। मतलब सरकार की पूरी मेहरबानी एनडीटीवी और न्यूज़ 18 पर रहने की उम्मीद बताई जा रही है।
भड़ास 4 मीडिया के संपादक यशवंत सिंह ने तो यहां तक दावा कर दिया है कि 2029 तक सिर्फ तीन बड़े न्यूज़ चैनल/ग्रुप आज तक, News18 नेटवर्क और NDTV ही बच पाएंगे। तो क्या बाकी चैनलों Republic, Zee News, ABP, India TV आदि पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। आर्थिक संकट और विज्ञापन के खेल के चलते कई चैनलों के बंद होने की नौबत आ गई है। ऐसे में कुछ चैनल घुटने टेक देंगे तो कुछ बगावत का रास्ता अखित्यार कर लेंगे।
यह बात सोचने की है कि जो चैनल बंद होंगे उनमें से अधिकतर अपने यूट्यूब चैनल भी खोलेंगे। जाहिर हैं ये सभी चैनल सरकार और बीजेपी के खिलाफ ही खड़े होंगे। वैसे भी जिनते पत्रकारों की नौकरी बीजेपी की वजह से गई है वे सभी सरकार के खिलाफ ही ख़बरें चला रहे हैं। चाहे एनडीटीवी अडानी ग्रुप का होने के बाद रवीश कुमार का अपना चैनल खोलना हो, या पुण्य प्रसून वाजपेयी और अभिसार शर्मा का या फिर प्रज्ञा मिश्रा का हो, अजीत अंजुम का हो, नवीन कुमार का हो या फिर शुभांकर मिश्रा का ये सभी सरकार की गलत नीतियों को जनता तक पहुंचाने का काम कर आ रहे हैं। वैसे भी अब लोगों को सरकार के प्रति दहशत नहीं रही है।
चाहे अरावली पहाड़ियों का मामला हो, चाहे उन्नाव रेप कांड के दोषी कुलदीप सेंगर का मामला हो या फिर अंकिता भंडारी कांड का सभी मममलों में जनता सैकड़ों पर है। भले ही देश का विपक्ष जमीनी मुद्दों पर मुखर न हो पर अब जनता सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ खड़ी हो रही है। यह भी जमीनी हकीकत है कि मीडिया को कब्जाने के लिए केंद्र सरकार के पास अडानी और अंबानी ग्रुप हैं। ऐसे में एनडीटीवी और न्यूज़ 18 की बल्ले बल्ले हो सकती है।
दरअसल दर्शकों के डिजिटल और OTT प्लेटफॉर्म की ओर शिफ्ट होने के चलते तीन साल में लगभग 50 टीवी चैनलों ने अपने ब्रॉडकास्टिंग लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं। बाकायदा इकोनॉमिक टाइम्स ने इस पर एक रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक जीओ स्टार, Zee Entertainment Enterprises, Eenadu Television, TV Today Network और ABP Network जैसे बड़े मीडिया हाउस भी अपने लाइसेंस वापस करने वाले ब्रॉडकास्टर्स में शामिल हैं। इस रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि Sony Pictures Networks India की पैरेंट कंपनी Culver Max Entertainment ने 26 डाउनलिंकिंग परमिशन सरेंडर की है।
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