तरुण विजय ने उठाया  कुतुब परिसर में गणेश की मूर्ति का मुद्दा, अपमानजनक बता लिखी चिट्ठी

 द न्यूज 15 
नई दिल्ली। ऐसा लग रहा है कि देश में बस धर्म के नाम पर माहौेल बनाने के अलावा कुछ रह नहीं गया है। कहीं पर हमला तो कहीं पर नारेबाजी और कहीं पर हिन्दू देवी देवताओं का अपमान तो कहीं पर विशेष धर्म में आस्था का प्रतीक तस्वीरों को लेकर विवाद। अब दिल्ली की कुतुबमीनार में गणेश की तस्वीर रखने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
दरअसल दिल्ली के महरौली में स्थित कुतुब मीनार मीनार आज की तारीख में भगवान गणेश की दो मूर्तियों को लेकर चर्चा में है। एनएमए ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को कुतुब मीनार परिसर से दो गणेश मूर्तियों को हटाने के लिए कहा है। जानकारी के अनुसार एनएमए के अध्यक्ष तरुण विजय ने कहा है कि एएसआई को एक पत्र भेजा गया है। उनका कहना है कि कुतुब परिसर में इस तरह से ‘मूर्तियों का रखना अपमानजनक’ है। उन्होंने इन्हें राष्ट्रीय संग्रहालय में रखने की सलाह दी है। पत्र में एनएमए द्वारा कहा गया है कि इन मूर्तियों को राष्ट्रीय संग्रहालय में “सम्मानजनक” स्थान दिया जाना चाहिए।
एनएमए का कहना है कि ऐसी पुरावशेषों को संग्रहालयों में रखने का प्रावधान है। ज्ञात हो कि एनएमए और एएसआई दोनों केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के तहत काम करते हैं।

दरअसल एनएमए प्रमुख तरुण विजय भाजपा नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद हैं। उन्होंने पत्र भेजे जाने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार साइट का दौरा किया और महसूस किया कि मूर्तियों को कुतुब परिसर में रखना अपमानजनक है। परिसर में स्थित मस्जिद में आने वाले लोगों के पैरों से उनका अपमान होता है।
विजय तरुण ने कहा है कि इन मूर्तियों को जैन तीर्थंकरों और यमुना, दशावतार, नवग्रहों के अलावा, राजा अनंगपाल तोमर द्वारा निर्मित 27 जैन और हिंदू मंदिरों को ध्वस्त करने के बाद लिया गया था।” उनका कहना है कि जिस तरह से इन मूर्तियों को रखा गया है वह देश के लिए अपमानजनक है। इसमें सुधार की आवश्यकता है।
दरअसल कुतुब मीनार के परिसर में कुव्वत-उल-इस्लाम नामक मस्जिद है, जिसको लेकर अक्सर हिंदूवादी संगठन दावा करते रहे हैं कि यह हिंदू-जैन मंदिरों को तोड़कर बनाया गया है। इस मामले को लेकर 2020 में कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें दावा किया गया कि 1192 में मोहम्मद गोरी के गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक ने इस मस्जिद को बनवाया था।

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