बंगलों में रहकर बेमानी है बदलाव की बात करना! जरूरत है जमीनी संघर्ष की 

चरण सिंह राजपूत 
पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की 4-1  से जीत से विपक्ष को सबक लेना होगा। विपक्ष को समझना होगा कि भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए जमीनी संघर्ष और संवाद की जरूरत है। जब तक वातानुकूलित कमरों से बाहर आकर सड़कों पर संघर्ष नहीं होगा तब तक विपक्ष को बदलाव भूल जाना चाहिए। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के गली मोहल्लों में जाकर प्रचार करने को भले ही हास्यास्पद समझा जाता हो पर यह भी जमीनी हकीकत है कि बड़े नेताओं का आम लोगों से उनके घरों में संवाद करना भी जनता को प्रभावित करता है। देखने की बात यह भी है कि जहां भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा स्टार प्रचारक के रूप में चुनावी समर में थे, वहीं सपा से अखिलेश यादव और रालोद से एक-एक नेता अखिलेश यादव और जयंत चौधरी ने ही मोर्चा संभाल रखा था। ३ चरणों के बाद अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव, चाचा शिवपाल यादव, रामगोपाल यादव, पत्नी डिंपल यादव के अलावा कई नेताओं को प्रचारकों में शामिल कर एक सूची बनाई पर वह सूची कागजों तक ही सिमट कर रह गई। उधर कांग्रेस से प्रियंका गांधी संघर्ष कर रही थी। उन्होंने लड़की हूं लड़ सकती हूं का नारा देकर बड़े स्तर पर महिला प्रत्याशी भी बनाए पर उसका कोई फायदा नहीं। ऊपर से प्रधानमंत्री का परिवारवाद और वंशवाद का लेकर हमला। ये सब बातें रही जो लोगों को प्रभावित कर रही थी। सरकार की तमाम खामियों के बावजूद विपक्ष की कमजोर रणनीति के चलते भाजपा फिर से बाजी मार ले गई।
यह भी जमीनी हकीकत है कि वैसे तो विधानसभा चुनाव पांच राज्यों में हुए हैं पर देश की निगाहें उत्तर प्रदेश के चुनाव पर टिकी थीं। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के लिए ही उत्तर प्रदेश का चुनाव जीने मरने का था। यह चुनाव लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा था। यह माना जा रहा था कि जो पार्टी उत्तर प्रदेश को फतह कर लेगी उसको 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में माहौल बनाने में बड़ी मदद मिलेगी। 277  सीटें जीतकर योगी आदित्यनाथ फिर से मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। 350 सीटें मिलने का दावा करने वाले अखिलेश यादव की पार्टी सपा को १११ रालोद को 8  और राजभर की पार्टी को ६ सीटें मिली हैं। ऐसे में 2024  में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के मामले में विपक्ष के लिए और बड़ी मुश्किलें पैदा हो गई हैं।
ऐसे में प्रश्न उठता है कि जब देश में एक साल तक चले किसान आंदोलन के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों में नाराजगी देखी जा रही थी। किसानों की पार्टी मानी जाने वाली रालोद से सपा का गठबंधन हो गया था। किसान आंदोलन के चेहरा माने जाने वाले राकेश टिकैत खुद पश्चिमी उत्तर प्रदेश से थे। प्रदेश में महंगाई और बेरोजगारी बड़ा मुद्दा था। राकेश टिकैत किसान आंदोलन से बार-बार गन्ने के बकाया भुगतान का मुद्दा उठा रहे थे। लखीमपुर खीरी कांड से भाजपा की छवि काफी प्रभावित हुई थी। तमाम विरोध के बावजूद मोदी सरकार ने किसानों को सुधार देने की धमकी देने वाले और किसानों को अपनी गाड़ी से कुचलने के आरोपी आशीष के पिता अजय मिश्रा को न पार्टी से निकाला और न ही पद से हटाया। इस कांड का लोगों पर काफी असर पड़ा था। मोदी सरकार ने सब नियम कानून ताक पर रखकर श्रम कानून में कंपनियों के हित में संशोधन कर दिया। कोरोना काल में आक्सीजन की कमी के चलते कितने लोग काल के मुंह में समा गये। रोजी-रोटी का प्रदेश में बड़ा संकट पैदा हो गया। ऐसे में योगी सरकार की वापसी सरकार की उपलब्धियों पर कम और विपक्ष की कमजोरी पर ज्यादा आई है। मतलब उत्तर प्रदेश की जनता योगी सरकार की खामियों से ज्यादा विपक्ष के नाकारापन से ज्यादा नाराज थी।
दरअसल सपा वैसे तो उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी पार्टी थी पर विपक्ष की भूमिका में वह पांच साल तक कहीं नहीं दिखाई दी। जहां तक चुनाव की तैयारी की बात है तो चुनाव के मात्र तीन महीने पहले अखिलेश यादव चुनाव में सक्रिय हुए, जबकि सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा ने एक साल पहले से चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी। सपा को आंदोलनों के नाम से जाना जाता रहा है पर अखिलेश यादव के हाथों में पार्टी की कमान आते ही पार्टी में आंदोलन नाममात्र के ही हुए हैं। हां डीएम को समस्याओं से संबंधित ज्ञापन देकर सपा कार्यकर्ता अपनी विपक्ष की जिम्मेदारी निभाती रही है। दरअसल उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने तो भाजपा के सामने आत्मसमर्पण कर रखा था। सपा और रालोद किसान आंदोलन के बल पर अपनी सरकार बनाने का सपना देख रहे थे। उसका फायदा उन्हें मिला भी। 2017  के विधानसभा चुनाव में एक सीट जीतने वाली रालोद ने 8  सीटें जीती तो 47 सीटें जीतने वाली सपा 111  सीटें जीत ले गई। इसमें दो राय नहीं कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने काफी संघर्ष किया पर भाजपा ने परिवारवाद और वंशवाद के नाम पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की छवि को काफी हद तक प्रभावित कर दिया है। अखिलेश यादव और जयंत चौधरी भी वंशवाद से निकले नेता हैं। यही सब वजह है कि भाजपा परिवारवाद और वंशवाद को लेकर इन नेताओं को टारगेट करती रहती है। इन नेताओं को आप संयोजक अरविंद केजरीवाल से सबक लेना होगा। केजरीवाल ने संघर्ष के बल पर ही न केवल दिल्ली को कब्जाया है बल्कि पंजाब में भी दिग्गजों को धराशायी करते हुए जीत का परचम लहरा दिया। मौजूदा राजनीति में भापजा को सत्ता से बेदखल करने के लिए जमीनी नेतृत्व की बहुत जरूरत है। नेतृत्व भी ऐसा हो जो वंशवाद पर स्थापित न हुआ हो। दलों में जो कार्यकर्ताओं की जगह पेड कर्मचारियों और चाटुकार लोगों ने ले ली है उसमें सुधार की जरूरत है।

Related Posts

भारत में जाति और डिजिटल अर्थव्यवस्था : असमानता, सत्ता और आंबेडकरवादी चुनौती
  • TN15TN15
  • March 16, 2026

एस आर दारापुरी    पिछले दशक में भारत…

Continue reading
“सब सामान्य है” : सत्ता का नया शास्त्र
  • TN15TN15
  • March 14, 2026

भारतीय राजनीति में एक नया शास्त्र लिखा जा…

Continue reading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

अब अमेरिका से उठी आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग, पीएम मोदी और मोहन भागवत की चुप्पी से उठे बड़े सवाल ?

  • By TN15
  • March 16, 2026
अब अमेरिका से उठी आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग, पीएम मोदी और मोहन भागवत की चुप्पी से उठे बड़े सवाल ?

अज्ञानी रिश्तों में झुकता नहीं-अहंकार, रिश्ते और जीवन की सच्चाई

  • By TN15
  • March 16, 2026
अज्ञानी रिश्तों में झुकता नहीं-अहंकार, रिश्ते और जीवन की सच्चाई

भारत में जाति और डिजिटल अर्थव्यवस्था : असमानता, सत्ता और आंबेडकरवादी चुनौती

  • By TN15
  • March 16, 2026
भारत में जाति और डिजिटल अर्थव्यवस्था : असमानता, सत्ता और आंबेडकरवादी चुनौती

सोनम वांगचुक की रिहाई पर सपा चीफ अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया, कहा- ‘न सिर्फ जनता को धोखा…’

  • By TN15
  • March 14, 2026
सोनम वांगचुक की रिहाई पर सपा चीफ अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया, कहा- ‘न सिर्फ जनता को धोखा…’

तिब्बत की आजादी और भारत की सुरक्षा के संकल्प के साथ दो दिवसीय तिब्बत समर्थन समूह सम्मेलन सम्पन्न

  • By TN15
  • March 14, 2026
तिब्बत की आजादी और भारत की सुरक्षा के संकल्प के साथ दो दिवसीय तिब्बत समर्थन समूह सम्मेलन सम्पन्न

थलपति विजय के बेटे जेसन संजय ने मां को किया खुलकर सपोर्ट

  • By TN15
  • March 14, 2026
थलपति विजय के बेटे जेसन संजय ने मां को किया खुलकर सपोर्ट