
पारुल अग्रवाल मित्तल
जैसे जैसे त्योहारो का समय आता है रीमा चिड़चिड़ी होने लगती है। उसके घर मे काम का प्रेशर बढ़ जाता है। किसी से मदद को वह कह नहीं पाती। पूरा दिन लगे रहने के बाद थकान और अगले दिन के काम के बारे मे सोच उसको इर्रिटेशन होने लगती है….. क्या ये एक अकेली रीमा की समस्या है या रीमा जैसी सभी महिलाओ की समस्या है…. किस प्रकार त्योहारो मे खुद की देखभाल कर सकते है जानते है इस लेख मे…..
सबकी खुशियों का ख्याल रखते-रखते खुद को न भूलें
त्योहार आते ही घर में रौनक बढ़ जाती है। सफाई, सजावट, खरीदारी, पकवान, मेहमानों की आवभगत और परिवार के लिए तैयारियां..और सबसे जरुरी बजट निर्धारण।त्योहार की खुशी कई जिम्मेदारियों में बंट जाती है। खासकर महिलाओं के लिए त्योहार अक्सर आराम से ज्यादा काम लेकर आते हैं। सुबह से देर रात तक घर और परिवार को संभालते हुए वे यह भूल जाती हैं कि त्योहार की खुशी में उनका अपना हिस्सा भी उतना ही जरूरी है जितना बाकी सबका।त्योहार सिर्फ घर को सजाने का नहीं, खुद को भी संवारने और भीतर से खुश रखने का अवसर है।यदि आप पूरा दिन काम मे व्यस्त रहकर खुद अस्त व्यस्त रहेगी तो आपको खीझ होने लगेगी। त्योहार की प्रसन्नता चेहरे से गायब हो जायगी इसलिए इस बार तैयारियों की सूची में अपने लिए भी थोड़ा समय जरूर जोड़ें।
काम की सूची में ‘अपना नाम भी शामिल करें…….
त्योहारों से पहले कामों की लंबी सूची बना लेनी चाहिए लेकिन खुद के लिए समय निकालना ना भूले । लगातार काम करते रहने से शरीर और दिमाग दोनों थक जाते हैं। कोशिश करें कि आपको काम के बीच मे छोटे छोटे ब्रेक मिल जाए, इस दौरान चाय-कॉफी के साथ शांत बैठना, थोड़ी देर टहलना, संगीत सुनना या बस आंखें बंद करके आराम करना भी पर्याप्त है, इससे आपके शरीर मे ऊर्जा और चेहरे पर ताजगी बनी रहेगी।
स्वाद के साथ सेहत का भी रखें ख्याल……
त्योहारों पर मिठाइयां और तले-भुने पकवान देखकर खुद को रोक पाना मुश्किल होता है। लेकिन अधिक मीठा और तला हुआ खाना शरीर पर भारी पड़ सकता है। इसके लिए डाइट को बैलेंस करें। एक टाइम हैवी खाना है तो दूसरे टाइम हल्का कुछ ले। बार बार चाय कॉफ़ी और कोल्ड्रिंक्स से बचे। पानी पर्याप्त मात्रा में पीते रहें। भोजन में फल, सलाद और हल्का खाना भी शामिल करें। त्योहार की खुशी अगले दिन भारीपन, एसिडिटी या थकान में न बदल जाए, इसका ध्यान रखना भी अपनी देखभाल का हिस्सा है।और हाँ कम बनाये ताकि भोजन बचने की संभावना ही कम हो और बचा हुआ आपको ना खाना पड़े।
त्योहारो मे भी पर्याप्त नींद ले……
त्योहारों की तैयारियों में अक्सर रात देर तक जागना और सुबह जल्दी उठना सामान्य हो जाता है। कुछ जिम्मेदारियां परिवार के दूसरे सदस्यों को भी दें और अपनी नींद को प्राथमिकता दें। सजना-संवरना सिर्फ दूसरों के लिए नहीं त्योहार पर तैयार होना केवल मेहमानों या परिवार के लिए अच्छा दिखने तक सीमित नहीं होना चाहिए। पसंद की साड़ी पहनना, बाल संवारना, हल्का मेकअप करना या अपनी पसंद की कोई एक्सेसरी पहनना खुद के लिए भी खुशी का कारण बन सकता है। आईने में खुद को देखकर मुस्कुराना भी आत्मविश्वास बढ़ाने वाली छोटी-सी शुरुआत हो सकती है। त्योहार तभी खूबसूरत बनता है जब उसकी खुशियां सब मिलकर बांटें। बच्चों को छोटे काम दें, पति को बाहर के काम दे और अन्य सदस्यों से भी मदद लें। खरीदारी, सजावट, मेहमानों की तैयारी या रसोई के कुछ काम बांटे जा सकते हैं। मदद मांगना कमजोरी नहीं, समझदारी है। मदद मांगने मे अहम्सो बीच मे नहीं लाना चाहिए।
सोशल मीडिया की चमक से खुद की तुलना न करें….. हर परिवार का बजट, परिस्थिति और तरीका अलग होता है। त्योहार की खूबसूरती सजावट की कीमत से नहीं, घर में मौजूद अपनापन और खुशी से तय होती है। एक सुघड़ गृहणी कम बजट मे भी घर को अच्छी तरह मेन्टन कर सकती है।
मन को भी दें थोड़ा……
आराम त्योहारों में शारीरिक थकान के साथ मानसिक दबाव भी बढ़ सकता है। अगर किसी समय बहुत ज्यादा तनाव महसूस हो तो कुछ देर रुकें। गहरी सांस लें, किसी अपने से बात करें और खुद को याद दिलाएं कि हर चीज बिल्कुल परफेक्ट होना जरूरी नहीं है। अपनी पसंद की एक चीज जरूर करें त्योहारों में परिवार के लिए बहुत कुछ करते हैं। इस बार अपने लिए भी एक छोटा-सा उपहार तय करें। कोई किताब खरीदें, अपनी पसंद की फिल्म देखें, किसी दोस्त से मिलें या अकेले कुछ समय बिताएं। क्योंकि खुद को खुश रखने के लिए हमेशा किसी बड़े अवसर की जरूरत नहीं होती। त्योहार की असली रोशनी त्योहारों की रोशनी घर के दीयों से ही नहीं, घर के लोगों के चेहरों से भी आती है। और उस रोशनी में आपका मुस्कुराता चेहरा भी उतना ही जरूरी है जितना परिवार के बाकी सदस्यों का। इसलिए इस त्योहार घर की सफाई करते हुए अपने मन की थकान भी साफ करें, दूसरों के लिए पकवान बनाते हुए अपनी पसंद का स्वाद भी याद रखें और सबकी खुशियों का ध्यान रखते हुए अपनी खुशी को सबसे आखिरी पायदान पर न रखें। क्योंकि जो व्यक्ति खुद खुश और स्वस्थ रहता है, वही दूसरों की खुशियों को भी पूरी तरह महसूस कर पाता है। त्योहारों की छोटी-सी सेल्फ-केयर मंत्र कम काम नहीं, काम का बेहतर बंटवारा। कम खुशी नहीं, खुशी में खुद की भी हिस्सेदारी। कम जिम्मेदारी नहीं, जिम्मेदारियों के बीच थोड़ा आराम। और सबसे जरूरी—सबका ख्याल रखते हुए अपना ख्याल भी।तभी मना पायंगी आप बेहतरीन तरीके से त्योहार।








