सूरीनाम की राजदूत हानिशा जयराम ने किया उद्घाटन, भारतीय प्रवासियों के इतिहास, संस्कृति और विरासत पर शोध को मिलेगा नया मंच

दिल्ली विश्वविद्यालय के लक्ष्मीबाई कालेज में ‘गिरमिटिया अध्ययन एवं भारतीय प्रवासी अनुसंधान चेयर’ का शुभारंभ

 

नई दिल्ली । दिल्ली विश्वविद्यालय के लक्ष्मीबाई कॉलेज में मंगलवार को ‘गिरमिटिया अध्ययन एवं भारतीय प्रवासी अनुसंधान चेयर’ (Girmitiya Studies and Indian Diaspora Research Chair) का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल का उद्घाटन भारत में सूरीनाम की राजदूत माननीय हानिशा जयराम ने किया।

 

कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली विश्वविद्यालय, ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल तथा लक्ष्मीबाई कॉलेज के संयुक्त सहयोग से किया गया। इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो. बलराम पाणि, ट्रेजरर प्रो. मिथुन कुमार, लक्ष्मीबाई कॉलेज की प्राचार्य प्रो. लता शर्मा सहित शिक्षा, शोध एवं भारतीय प्रवासी अध्ययन से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल के प्रबंध निदेशक श्री अरविंद पांडेय तथा गिरमिटिया अध्ययन एवं भारतीय प्रवासी अनुसंधान चेयर के चेयर एवं कोऑर्डिनेटर डॉ. सुनील कुमार मिश्रा की विशेष भूमिका रही।

इस चेयर की स्थापना का उद्देश्य गिरमिटिया भारतीयों के इतिहास, संघर्ष, प्रवास, सामाजिक-सांस्कृतिक विकास, भाषा, साहित्य, परंपराओं और भारतीय विरासत पर व्यवस्थित अकादमिक अध्ययन एवं शोध को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से दुनिया के विभिन्न देशों में बसे भारतीय मूल के लोगों और भारत के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को समझने तथा नई पीढ़ी तक इस विरासत को पहुंचाने के लिए शोध एवं शैक्षणिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान डॉ० सीमा शर्मा, श्री राकेश पाण्डेय, भावना सक्सेना, डॉ० दीप्ति अग्रवाल, प्रो० ओंकार नाथ उपाध्याय ने संबोधित करते हुए कहा कि गिरमिटिया भारतीयों का इतिहास केवल प्रवास का इतिहास नहीं, बल्कि संघर्ष, श्रम, संस्कृति, पहचान और भारतीय विरासत को विदेशों में जीवित रखने की एक महत्वपूर्ण गाथा है। इस क्षेत्र में विश्वविद्यालय स्तर पर शोध के लिए एक समर्पित चेयर की स्थापना से विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों को नए अवसर प्राप्त होंगे।

सूरीनाम की राजदूत हानिशा जयराम ने इस पहल को भारत और भारतीय प्रवासी समुदाय के बीच ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने भारतीय मूल के लोगों की सांस्कृतिक जड़ों और उनकी विरासत के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षाविदों ने उम्मीद जताई कि यह चेयर भारतीय डायस्पोरा अध्ययन, गिरमिटिया इतिहास और वैश्विक स्तर पर भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े शोध को नई दिशा प्रदान करेगी तथा देश-विदेश के शोधार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अकादमिक केंद्र के रूप में विकसित होगी। कार्यक्रम का संचालन अरविन्द पाण्डेय एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो० सुनीता अरोड़ा ने किया।

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