आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिए तीन आदेश 

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए तीन महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। यह मामला जुलाई में स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) लेने के बाद चल रहा है, जिसमें कुत्तों के काटने की घटनाओं में वृद्धि, खासकर बच्चों पर हमलों के कारण चिंता व्यक्त की गई थी। कोर्ट ने एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) नियम 2023 का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया है, जो कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी, टीकाकरण और रिलीज (सीएनवीआर मॉडल) पर आधारित है। हालांकि, संस्थागत क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों द्वारा कुत्तों को खिलाने और राज्यों की लापरवाही पर नाराजगी जताई गई। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजरिया की बेंच ने सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ये आदेश दिए, जिसमें संवेदनशील स्थानों पर कुत्तों को सड़कों या परिसरों से हटाने और शेल्टर होम में रखने पर जोर दिया गया।

समय सीमा और अन्य निर्देश : 1 शैक्षणिक संस्थानों (स्कूल, कॉलेज), अस्पतालों, खेल परिसरों, बस डिपो और रेलवे स्टेशनों जैसे संवेदनशील स्थानों से सभी आवारा कुत्तों को तुरंत हटाने का आदेश। इन कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि शेल्टर होम में रखा जाएगा।”वे वापस उसी क्षेत्र में रिलीज नहीं किए जाएंगे, क्योंकि ऐसा करना कोर्ट के निर्देश के उद्देश्य को विफल कर देगा।” (जस्टिस संदीप मेहता)सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश तुरंत कार्रवाई करें।2 सभी सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थानों, चिकित्सा सुविधाओं, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों और खेल सुविधाओं की पहचान करने और उन्हें सुरक्षित करने का आदेश। प्राथमिकता से बाउंड्री वॉल बनाकर प्रवेश रोकें। प्रत्येक परिसर के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें।-पहचान के लिए 2 सप्ताह; सुरक्षित करने के लिए 8 सप्ताह। स्थानीय नगर निगम और पंचायतें कम से कम 3 महीने तक निरीक्षण करें और रिपोर्ट कोर्ट को दें।3राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएचएआई) और राज्य राजमार्गों से आवारा पशुओं (कुत्तों सहित मवेशी) को हटाने और शेल्टर में रखने का आदेश।-तत्काल कार्रवाई; सड़कों पर न दिखें, शेल्टर होम में रखें।यह आदेश सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से हैं, लेकिन पशु कल्याण को भी ध्यान में रखते हुए नसबंदी और टीकाकरण अनिवार्य किया गया है। कोर्ट ने राज्यों को अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है और मामला आगे की सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया। पशु प्रेमियों और प्रभावित पक्षों की चिंताओं को संतुलित करने के लिए आगे सुनवाई होगी।

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