तो रायबरेली से कांग्रेस से प्रियंका गांधी तो बीजेपी से लड़ेंगी अर्पणा यादव

चरण सिंह

बीजेपी के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह को मैनपुरी से अपना प्रत्याशी घोषित करने पर अर्पना यादव के मैनपुरी से चुनाव लड़ने की चर्चा अपने आप शांत हो गई है। वैसे भी अर्पणा यादव ने रिश्तों की कीमत पर सियासत न करने की बात कही थी। अर्पणा यादव ने तो रायबरेली से प्रियंका गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की है। हालांकि रायबरेली से कांग्रेस ने अभी तक कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। तो क्या रायबरेली में डिंपल यादव और प्रियंका गांधी के बीच चुनावी जंग देखने को मिलेगी। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यदि अर्पणा यादव बीजेपी और इंडिया गठबंधन की ओर से प्रियंका गांधी एक दूसरे के खिलाफ चुनावी समर में होंगी।
यदि प्रियंका गांधी और अर्पना यादव की राजनीतिक तुलना की जाए तो डिंपल यादव अर्पणा यादव पर भारी बैठती हैं। प्रियंका गांधी आज की तारीख में एक परिपक्व नेता हैं। प्रियंका गांधी का जुझारूपन समय समय पर दिखाई भी देता रहता है। गत दिनों किसान आंदोलन में लखीमपुरी खीरी में उनका आक्रामक रूप देखने को मिला था। प्रियंका गांधी की निर्णय भी बड़े जबर्दस्त होते हैं। इन लोकसभा चुनाव में चंद्रशेखर आजाद को इंडिया गठबंधन की ओर से नगीना से टिकट देना और बिहार में पप्पू यादव की पार्टी जन अधिकारी पार्टी का विलय कांग्रेस में कराना प्रियंका गांधी का ही निर्णय था।
कांग्रेस ने क्या किया ? यह कांग्रेस का ढुलमुल रवैया ही है कि उत्तर प्रदेश नगीना सीट पर सपा के चंद्रशेखर आजाद को टिकट न देकर पूर्व जज मनोज कुमार को अपना प्रत्याशी बनाने पर कांग्रेस ने कोई स्टैंड न लिया। ऐसे ही बिहार में पूर्णिया सीट पर आरजेडी के बीमा भारती को उम्मीदवार बनाने का विरोध किया। मतलब दो सीटें इंडिया गठबंधन की खो दी गई। यह माना जा रहा है कि सोनिया गांधी अपने बेटे राहुल गांधी को आगे बढ़ाने के चक्कर में प्रियंका गांधी को लगातार इग्नोर कर रही हैं। ऐसे में तो प्रियंका गांधी के पति राबर्ट वाड्रा ने जो अमेठी से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है वह भी पुरी होनी मुश्किल ही लग रही है। जहां तक अर्पणा यादव की बात है तो अर्पणा यादव राजनीतिक दल से जुड़ने के साथ ही समाजसेविका भी हैंै। वह जनहित के मुद्दों को लगातार उठाती रहती हैं।

अर्पणा यादव में संस्कार कूट-कूटकर भरे हैं। यही वजह रही कि २०२२ में मैनपुरी से लोकसभा उप चुनाव में भी उन्होंने डिंपल यादव के खिलाफ चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। इन चुनाव में भी उनके नाम की चर्चा डिंपल यादव के खिलाफ चुनाव लड़ने को लेकर चली पर उन्होंने डिंपल यादव को अपनी जेठानी बताते हुए कहा कि रिश्तों की कीमत पर सियासत न करने की बात कही। भले ही यादव परिवार में मुलायम सिंह यादव के अलावा यादव परिवार का कोई नेता उन्हें अपनी बहू न मानता हो पर वह हमेशा यादव परिवार का सम्मान करती हैं। शिवपाल यादव से अर्पणा यादव की ठीकठाक बनती है। गत दिनों मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद शिवपाल यादव तो समाजवादी पार्टी में चले गये पर अर्पणा यादव नहीं गईं। बताया जाता है कि मुलायम सिंह यादव ने ही अर्पणा यादव को बीजेपी में भेजा था।

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