तो गालियों का भी हिसाब रखने लगे पीएम

अरुण श्रीवास्तव

जिस किसी ने भी कहा हो कि, भाजपा बनियों की पार्टी है’ उसने सही कहा। बनिया लेन-देन दोनों का हिसाब रखता है। रखे भी क्यों न? हिसाब रखने से ही तो पता चलेगा कि, नफ़े में रहे या नुकसान में। खाता बही का चलन कब से शुरू हुआ यह तो पता नहीं, किस देश से शुरू हुआ यह भी पता नहीं पर जब से भी शुरू हुआ तब से निम्न श्रेणी से लेकर बड़े-बड़े धंधे वाले भी पाई-पाई का हिसाब रखते हैं या यूं कहें कि हिसाब सदियों से चली आ रही लाल किताब (खाता-बही) में रखते हैं। अब ये बात अलग है कि, रखने को तो सूदखोर भी रखता है पाई पाई का हिसाब। रखे भी क्यों न! चुनाव के समय अपने मोदी जी ने भी तो कहा था कि, भाइयों बहनों वो साठ साल का हिसाब नहीं देते, मैं पाई-पाई का हिसाब दूंगा। एक साक्षात्कार में भी उन्होंने कहा था कि बनिया हूं, धंधा करने आता है। तो अपने संसदीय क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि काशीवासियों को यह अधिकार है कि वो एक-एक पल की का हिसाब लें। एक चुनावी रैली में तो पाई-पाई का हिसाब देने की बात खुद कही थी। वैसे इस तरह की बातें मोदी जी कई बार कह चुके हैं।
कर्नाटक में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि कांग्रेस नेताओं की गलियां एक दिन मिट्टी में मिल जाएगी। बताते चलें कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी जी की तुलना जहरीले सांप से कर दी थी। पीएम मोदी ने उनको दी गई गलियां गिनाते हुए कहा कि अब तक 91 बार कांग्रेस के नेताओं ने मुझे गालियां दीं। अब किसी की तुलना हिटलर से करना गाली है क्या? चुनावों में नारे लगते हैं कि, जो हिटलर की चाल चलेगा वो हिटलर की मौत मरेगा’ तो यह क्या गली है?
हर समय का विरोधी दल शासक की तुलना हिटलर मुसलमानी या स्टालिन से करता है। जबकि हिटलर और मुसलमानी स्टालिन से कहीं ज्यादा क्रूर थे। वैसे राजनीति में यह सब आम बात होती है। अब कोई सतयुग तो है नहीं! फिर सतयुग में भी कृष्ण को काफी गालियां पड़ी थीं। कृष्ण ने शिशुपाल की 99 गालियों को माफ कर दिया था। बताते हैं कि उन्होंने ऐसा वादा किया था। बहरहाल इससे यह साबित होता है कि उस समय भी गालियां दी जाती थीं और उसका हिसाब भी रखा जाता था। यानी कि गणित उसे समय भी थी।
आमतौर पर लोग गालियों को संख्या में गिनते हैं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा की रोजाना उन्हें कई कई किलो गालियां मिलती हैं।
अब गाली को कैसे तौलते हैं इसकी विधि क्या है। पता नहीं पता चल भी नहीं सकता। हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी तो नहीं करते हैं कि जुगाड़ कर पत्रकार बन जाऊं और एक अदद सवाल करने का दुस्साहस करूं। सुना है कि निजी जानकारियां आरटीआई के तहत नहीं पूछी जा सकतीं। पर यह नितांत निजी भी नहीं क्योंकि वो देश के पीएम हैं। हो सकता है कि ये सवाल सवाल ही न रह जाए कि गालियों की परिभाषा क्या होती है? 13 नवंबर 1922 को प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना में भाषण देते हुए कहा कि वो रोजाना दो-तीन किलो गाली खाते हैं, जो पोषक तत्वों में बदल जाती है। वो यहीं पर नहीं रुकते, कहते हैं कि वह लोग (विपक्ष/कांग्रेस) मेरे खिलाफ बोलने के लिए गलियों की डिक्शनरी प्रकाशित करते हैं, मैं भाजपा कार्यकर्ता से अनुरोध करता हूं कि ऐसे बयानों से दुखी या नाराज न हों बस उनका मजा उठाएं, अच्छी चाय पिएं और इस उम्मीद के साथ सोएं कि अगले दिन अंधेरा छंठ जाएगा और कमल खिल जाएगा’। वैसे अगर डिक्शनरी प्रकाशित होती है तो यह तो अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा क्योंकि गलियों की डिक्शनरी किसी भी देश में या किसी भी भाषा में शायद ही हो। ऐसा होता है तो यह विश्व रिकॉर्ड ही नहीं विश्व के लिए एक तरह का धरोहर होगा।
वैसे ये तो शोध का विषय है कि गालियां पोषक तत्वों में कैसे बदल जाती हैं? अगर गालियां पोषक तत्व में बदल जाती हैं तो ये अच्छी बात है। तब पीएम मोदी को इस बात का गिला-शिकवा नहीं करना चाहिए कि विपक्ष में गाली देता है। अरे विपक्ष गाली देकर पीएम मोदी का पैसा बचाता है और एक तरह से यह टैक्स पेयर का पैसा है। फिर पीएम मोदी जी के पोषक तत्वों पर जो पैसा खर्च होता है कम से कम वो तो बचेगा यह तो अच्छी बात है। हो सकता है कि इसी बचत से किसी को 15 लाख रुपए यूं ही मिल जाएं।
हां एक बात और पीएम मोदी ने जो गालियों की बात की और जो लेटेस्ट संख्या 110 बताई वह संख्या उनके द्वारा विभक्त को दी गई गली-गलियों को घटा करके है या तीसरा टर्म पूरा करने के बाद घटाएंगे। वैसे सोनिया गांधी को भी कांग्रेस की विधवा कहा गया था, और ये भी कहा गया था कि वो विधवाओं का पेंशन हजम कर जाती हैं। राहुल गांधी को हाइब्रिड बछड़ा कहा गया था तो उनकी मां सोनिया गांधी को जर्सी गाय कहा था। राजनीति में न होने के बाद भी सुनंदा पुष्कर को 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड कहा गया, तो रेणुका चौधरी की तुलना संसद के भीतर ही राक्षसी तड़का से की गई। अपने तीसरे कल में प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के भीतर नेता प्रतिपक्ष की ओर इशारा करते हुए उन्हें बालक बुद्धि कहा था। अब यह सब गालियां है या सद् वचन यह तो कोई अंधभक्त ही बता सकता है। आज भी राहुल गांधी को केंद्रीय मंत्री अमित शाह शहजाद या राहुल बाबा कहते हैं। प्रसंगवश यहां बताना ज़रूरी है कि कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने मोदी जी को नीच कह दिया था तो बीच चुनाव उन्हें पार्टी से निकाल दिया था इसी तरह सैम पित्रोदा भी गलत बयानी के निकाले जा चुके हैं। हाल ही में चुनाव करने के बाद जब स्मृति ईरानी रोल की जाने लगी तो राहुल गांधी ने बकाया दे ट्वीट कर कार्यकर्ताओं को हिदायत दी कि वह श्रीमती स्मृति ईरानी को ट्रोल ना करें हमें तो याद आता नहीं की सत्ता पक्ष के किसी मंत्री ने हिदायत देकर यह बात कही हो कि कार्यकर्ता इस तरह की अनारकल बातें ना किया करें जब जिसे देखो वह कांग्रेस विपक्ष या राहुल गांधी को कुछ भी बोल देता है अभी किसी नेता ने राहुल गांधी को नंबर वन आतंकवादी कहा तो एक अन्य नेता ने राहुल गांधी की जवान काटने वाले को 11 लख रुपए नाम देने की घोषणा की तो दूसरे नेता ने कहा कि जीव कटी ना जाए बल्कि जला दी जाए यह सब बातें होती रही और सट्टा रोड दल के किसी नेता या मंत्री में अपने कार्यकर्ताओं के लिए कोई भी संदेश जारी नहीं किया कि वह इस तरह के अपशब्द ना बोले अब यह बात अलग है कि सत्ता पक्ष द्वारा विपक्ष को बोल गए अब शब्द सत्य वचन की श्रेणी में आते हों।

 

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