कमजोर मानसून के कारण कम वर्षा की स्थिति उत्पन्न : मौसम वैज्ञानिक

उचाँस जमीन में अरहर की बुआई करें किसान।

बिहार के जिलों में हल्के से मध्यम बादल छाये रहने का अनुमान

सुभाषचंद्र कुमार

समस्तीपुर । डा राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविधालय स्थित जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से जारी 24-28 जुलाई, 2024 तक के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार पूर्वानुमानित अवधि में उत्तर बिहार के जिलों में हल्के से मध्यम बादल छाये रहने का अनुमान है।

कमजोर मानसून के कारण कम वर्षा की स्थिति बनी हुई है तथा पूर्वानुमानित अवधि में अच्छी वर्षा की सम्भावना नहीं है। कहीं-कहीं छिटपुट वर्षा हो सकती है।

इस अवधि में अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस एवं न्यूनतम तापमान 27-29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। मंगलवार के तापमान पर एक नजर डालें तो अधिकतम तापमानः 33.0 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 0.4 डिग्री सेल्सियस अधिक एवं
न्यूनतम तापमानः 26.6 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 0.1 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा है।

पूर्वानुमानित अवधि में पूरवा हवा चलने का अनुमान है। औसतन 10-20 कि०मी० प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है।

सापेक्ष आर्द्रता सुबह में 80 से 95 प्रतिशत तथा दोपहर में 40 से 50 प्रतिशत रहने की संभावना है।

समसमायिक सुझाव देते हुए मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए रोपाई के 2-3 दिन बाद तथा एक सप्ताह के अन्दर ब्यूटाक्लोर (3 लीटर दवा प्रति हेक्टेयर) या प्रीटलाक्लोर (1.5 लीटर दवा प्रति हेक्टर) या पेन्डीमिथेलीन (3 लीटर दवा प्रति हेक्टर) का 500-600 लीटर पानी मे घोल बनाकर एक हेक्टर क्षेत्र में छिड़काव करें। छिड़काव के वक्त खेत में एक से०मी० पानी की उपस्थति रहनी चाहिए।

मिर्च का बीज उथली क्यारियों में गिराये। इसके लिए उन्नत प्रभेद पंत मिर्च-3, कृष्णा, अर्का लोहित, पूसा ज्वाला, पूसा सदाबहार, पंजाब लाल, काशी अनमोल तथा संकर किस्में अग्नि रेखा, कल्याणपुर चमन, कल्याणपुर चमत्कार, बी०एस०एस०-267 अनुशंसित है। बीज को गिराने से पूर्व थीरम 75 प्रतिशत दवा से बीजोपचार करें।

उचाँस जमीन में अरहर की बुआई करें। बुआई के समय प्रति हेक्टेयर 20 किलो नेत्रजन, 45 किलो स्फुर एवं 20 किलो पोटाश तथा 20 किलो सल्फर का व्यवहार करें। बहार, पूसा 9, नरेद्र अरहर 1, मालवीय-13, राजेन्द्र अरहर 1 आदि किस्में बुआई के लिए अनुशसित है। बुआई के 24 घंटे पूर्व 2.5 ग्राम थीरम दवा से प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करे। बुआई के ठीक पहले उपचारित बीज को उचित राईजोबियम कल्चर से उपचारित कर बुआई करनी चाहिए। पक्ति से पक्ति की दूरी 60 से०मी० रखें। बीज दर 18 से 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें।

उचॉस जमीन में बरसाती सब्जियों जैसे-भिंडी, लौकी, नेनुआ, करैला, खीरा की बुआई अविलम्ब संपन्न करें। गरमा सब्जियों में नियमित रुप से कीट-व्याधि का निरीक्षण करते रहें।
खरीफ प्याज की रोपाई के लिए खेत की तैयारी करें। खेत की जुताई में 150-200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर सड़ी हुई गोबर की खाद का प्रयोग करें। प्याज के स्वस्थ पौध के लिए पौधशाला से नियमित रूप से खरपतवार को निकालते रहें।

केला की रोपाई करें। उत्तर बिहार में लम्बी किस्मों के लिए अलपान, चम्पा, कंथाली, मालभोग, चिनियाँ, शक्कर चिनियाँ, फिआ-23 तथा बौनी एवं खाने वाली किस्मों के लिए ग्रैडनेन, रोबस्टा, बसराई, फिआ-1 अनुशंसित है। सब्जी वाली किस्में बतीसा, सावा, बनकेल, कचकेल, फिआ-3 तथा सब्जी एवं फल दोनों में उपयोग आने वाली किस्में कोठियाँ, मुठियाँ, दुधसागर एवं चकिया अनुशंसित है। लम्बी जातियों में पौधा से पौधा की दूरी 2.0 मीटर है एवं बौनी जातियों में 1.5 मीटर रखें।

लीची के लिए, मई के अन्त में पकने वाली किस्में जैसे देशी, शाही, अर्ली वेदाना, देहरारोज, पूर्वी तथा रोज सेण्टेड, जून के आरंभ में पकने वाली किस्में जैसे-कसवा, सबौर वेदाना, चाईना तथा लेट बेदाना, जून के मध्य में पकने वाली किस्में जैसे-कसैलिया, लौंगिया, वणरुपा, सबौर मधु, सबौर प्रिया आदि हैं। उपजाऊ मिट्टी में 10×10 मीटर की दूरी पर पौधों की रोपाई करें।

आम की अलग-अलग समय में पकने वाली किस्मों की रोपाई करें। मई के अन्त से जून माह में पकने वाली किस्में मिठुआ, गुलाबखास, बम्बई, एलफॉन्जों, जड़दालू, जून माह में पकने वाली किस्में लंगड़ा (मालदह), हेमसागर, कृष्णभोग, अमन दशहरी, जुलाई माह में पकने वाली किस्में फजली, सुकुल, सिपिया, तैमूरिया, अगस्त में पकने वाली किस्में समरबहिष्त, चौसा, कतिकी है। आम के संकर किस्मों के लिए महमूद बहार, प्रभाशंकर, अम्रपाली, मल्लिका, मंजीरा, मेनिका, सुन्दर लंगडा राजेंद्र आम-1, रत्ना, सबरी, जवाहर, सिंधु, अर्का, अरुण, मेनका, अलफजली, पूसा अरुणिमा आदि अनुशंसित है। कलमी आम के लिए पौधा से पौधा की दूरी 10 मीटर, बीजु के लिए 12 मीटर रखें। आम्रपाली किस्म की सघन बागवानी हेतु पौधों को 2.5×2.5 मीटर की दूरी पर लगा सकतें हैं।

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