विफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी है। नया सिखने की ललक, लालसा होनी चाहिए। अनुभव ही कामयाबी की दिशा तय करते हैं। तभी आप जीवन के युद्ध क्षेत्र में अपनी कामयाबी का डंका पीट सकते हैं। हौंसला रखें, डटे रहो, लड़ते रहो, विपतियाँ आपके पैरों में दम तोड़ देंगी। विजेता बनो, विजेताओं के चेहरे पर उनका काम झलकता है। अपने लक्ष्य पर डटे रहें। जीवन के उजाले पक्ष की ओर देखें। सफलता अपनी राह स्वयं चुन लेती है। सिकंदर महान ने कहा था, ‘‘मैं मौके का इंतजार नहीं करता, बल्कि मौके पैदा करता हू।’’ सफलता का सेहरा सभी अपने सिर पर बंधवाना चाहते हैं। विफलता का दूसरों के। कायर है। वे व्यक्ति जो अपनी गलतियों को स्वीकार करने में असहज महसूस करते हैं। और बलि का बकरा ढूंढते हैं। हमें अपनी गलतियाँ को सहज भाव से, सच्चे दिल से स्वीकार करके आगे बढ़ना चाहिए।
सफलता की राह आसान नहीं होती, उसके लिए हर युवा को अपना जोश, जनून, जिद के बूते ही शोहरत के झण्डे गाढ़ सकते हैं। दोष देने के खेल ‘खेलने’ में न उलझें, जिम्मेदारी लें और आगे बढ़ें, घुटने न टेकें, दबाव के सामने न झुकें, कर्तव्य पर डटे रहें, कर्तव्य कभी आग और पानी की परवाह नहीं करता। इसका बेमिसाल उदाहरण है। सात समुंद्रों की जलपरी, बुलाचौधरी बंगाल की जिसने विश्व रिकार्ड कायम किया है। चार महाद्वीपों के सात समुंद्रों को तैरकर मापा है। विश्व में अपनी शोहरत के झण्डे गाढ़ दिए हैं।
अन्त मैं युवाओं को संदेश देकर जगाना, चेताना चाहता हूँ। अब समय आ गया है कि आओ संकल्प लें, खुद को बदलें, दुनिया खुद बा खुद बदल जाएगी। आशा और आत्मविश्वास से भरपूर रहें, वे हमारी आन्तरिक शक्ति को जागृत करती है। और उत्पादन शक्ति का दुगना-तिगुना बढ़ा देती है। लक्ष्य पर फोकस रखें, आवश्यक काम करें, अनावश्यक काम से दूर रहें, चापलूसी, भाई-भतीजावाद, झूठ, फरेब, भौतिक जीवन शैली को तिलांजलि दें। नेक नीयती से काम करें, साफगोई का दामन चुने, पारदर्शी और स्पष्ट जीवन शैली कामयाबी की ओर ले जाती है।
अन्त में
खुल जाएंगे सभी रास्ते
रुकावटों से लड़ तो सही।
सब होगा हासिल
तू जिद्द पर अड़ तो सही।।
ज्योति स्वरूप गौड़








