आलोक राज, शोभा अहोतकर और विनय कुमार रेस में आगे
पटना। बिहार में जल्द ही नए डीजीपी की नियुक्ति होने वाली है। पलिस महानिदेशक रहे आरएस भट्टी को सीआईएसएफ का नया डीजी बनाया गया है। वैसे, पहले से अनुमान लगाया जा रहा था कि आरएस भट्टी 15 अगस्त के बाद कभी भी अपना पद छोड़ सकते हैं। इस खाली पद के लिए कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं, जिनमें आलोक राज, शोभा अहोतकर और विनय कुमार प्रमुख हैं।
आरएस भट्टी ने 20 दिसंबर 2022 को बिहार के डीजीपी का पदभार संभाला था। वो 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और सितंबर 2025 तक इस पद पर रह सकते थे। हालांकि, उन्होंने केंद्र सरकार में सेवा देने का फैसला किया और बिहार सरकार ने उन्हें इसके लिए अनुमति दे दी। आरएस भट्टी की जब नियुक्ति हुई थी तो बिहार में सीएम तो नीतीश कुमार ही थे, मगर महागठबंधन की सरकार थी। जब आरएस भट्टी की बिहार से विदाई हुई तो अब भी सीएम नीतीश कुमार ही हैं, मगर अब एनडीए की सरकार है।
इस खाली पद के लिए 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक राज का नाम सबसे पहले सामने आया था। पिछली बार भी जब डीजीपी पद के लिए नामों पर विचार चल रहा था, तब भी आलोक राज रेस में शामिल थे। हालांकि, उस समय बिहार के बाहर के किसी अधिकारी को नियुक्त करने का फैसला हुआ और आरएस भट्टी को बीएसएफ से लाकर डीजीपी बनाया गया था। इस बार भी आलोक राज के सामने कुछ चुनौतियां हैं, जिनके कारण उनके लिए ये पद हासिल करना आसान नहीं होगा।
शोभा अहोतकर 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में बिहार होमगार्ड और फायर ब्रिगेड की डीजी हैं। अपने कड़क मिजाज के लिए जानी जाने वाली शोभा अहोतकर को भी डीजीपी पद के लिए एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, उनका नाम आईपीएस अधिकारी विकास वैभव के साथ हुए एक विवाद के कारण भी चर्चा में रहा है, जिसके कारण उन्हें कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
इस दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी विनय कुमार। वर्तमान में बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के डीजी के पद पर तैनात विनय कुमार इससे पहले एडीजी लॉ एंड ऑर्डर और एडीजी सीआईडी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले विनय कुमार को एक कुशल और ईमानदार अधिकारी के रूप में जाना जाता है।
कुछ दिनों पहले विनय कुमार ने मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार से मुलाकात की थी। हालांकि, यह मुलाकात झंझारपुर में बन रहे एक थाने को लेकर हुए विवाद के संबंध में बताई गई। लेकिन इतनी छोटी सी बात पर डीजीपी को मुख्यमंत्री आवास बुलाए जाने पर कई तरह की अटकलें लगाई गई।
बिहार में कानून व्यवस्था हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी रहता है। वर्तमान में तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला विपक्ष राज्य में बढ़ते अपराध को लेकर लगातार नीतीश सरकार पर हमलावर है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा नए डीजीपी के रूप में कौन-सा अधिकारी इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को संभालता है और राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को कैसे नियंत्रित करता है?








