ईरानी ड्रोन अटैक से पस्त हुआ अमेरिका? सेना के अधिकारियों ने बंद कमरे में क्या बताया ?

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच फरवरी 2026 से जंग चल रही है (अमेरिका-इजराइल ने पहले हमला किया था), और ईरान जवाबी हमलों में सस्ते शाहेद ड्रोन इस्तेमाल कर रहा है। इनसे कुछ नुकसान हुआ है, लेकिन अमेरिका की सेना पूरी तरह हावी है।

बंद कमरे में क्या बताया?

4 मार्च 2026 को पेंटागन के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ चेयरमैन जनरल डैन केन ने कैपिटल हिल पर कांग्रेस सदस्यों को क्लोज्ड-डोर ब्रीफिंग दी। उन्होंने साफ कहा:
“ईरान हजारों हमलावर ड्रोन (खासकर शाहेद) तैनात कर रहा है। हम ज्यादातर को मार गिरा रहे हैं, लेकिन हर एक को रोक पाना संभव नहीं है।”
उन्होंने ये भी बताया कि अब प्राथमिकता ड्रोन लॉन्च साइट्स को जल्दी नष्ट करने की है ताकि हमले कम हों।
ये कोई “बड़ा राज़” या अमेरिका की हार नहीं है — ये एक रणनीतिक स्वीकारोक्ति है कि सस्ते ड्रोन की लहरें महंगे इंटरसेप्टर (जैसे पैट्रियट/थाड) को थोड़ा दबाव में डाल रही हैं। लेकिन अमेरिका ने पहले ही ईरान की एयर डिफेंस और मिसाइल लॉन्चरों को भारी नुकसान पहुँचा दिया है।

 

असली नुकसान कितना?

 

 

कुवैत में एक सिविलियन पोर्ट के ऑपरेशंस सेंटर पर ड्रोन हमले में 6 अमेरिकी सैनिक शहीद हुए (सबसे बड़ा नुकसान)।
सऊदी अरब और कुवैत में अमेरिकी दूतावासों पर ड्रोन हमले हुए — मामूली आग और नुकसान, कोई बड़ी तबाही नहीं।
कुल मिलाकर ईरानी हमलों में कुछ बेस प्रभावित हुए, लेकिन अमेरिका के मुख्य ठिकाने सुरक्षित हैं।

दूसरी तरफ, अमेरिका-इजराइल के हमलों से ईरान की सेना, मिसाइल स्टॉक और लीडरशिप बुरी तरह घायल हुई है। ईरानी मिसाइल हमले 90% और ड्रोन हमले 83% कम हो चुके हैं।

 

अमेरिका की स्थिति?

 

ट्रंप ने खुद कहा — “हमारे पास हथियारों का स्टॉक लगभग असीमित है।” युद्ध लंबा चल सकता है, लेकिन अमेरिका पीछे हटने वाला नहीं है। पेंटागन का कहना है कि ड्रोन समस्या “बड़ी है लेकिन अनियंत्रित नहीं”। ईरान की रणनीति “असिमेट्रिक” है — सस्ते ड्रोन से महंगा खर्च करवाना — लेकिन इससे अमेरिका “पस्त” नहीं हुआ।

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