Sahara protest India 2022 : 28 को बिहार विधानसभा पर हल्ला बोलेंगे सहारा निवेशक!

Sahara protest India 2022 : भुगतान और सुब्रत राय की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सहारा इंडिया के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है संयुक्त ऑल इंडिया जनांदोलन संघर्ष न्याय मोर्चा ने

नई दिल्ली/पटना। भले ही भुगतान के लिए सहारा इंडिया की ओर से भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा की अगुआई में राजस्थान जयपुर में सेबी के खिलाफ प्रदर्शन किया गया हो पर संयुक्त ऑल इंडिया जनांदोलन संघर्ष न्याय मोर्चा सहारा इंडिया के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है (Sahara protest India 2022)।

मोर्चा लखनऊ के बाद कोलकाता और अब 28 जून को पटना विधानसभा पर हल्ला बोलने जा रहा है। इस आंदोलन को बिहार माले यूनियन का भी समर्थन बताया जा रहा है। मतलब यह आंदोलन के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है। यह जानकारी संयुक्त ऑल इंडिया जनांदोलन संघर्ष न्याय मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभव देव शुक्ला ने दी है। उन्होंने कहा कि सहारा इंडिया जनप्रतिनिधियों का इस्तेमाल कर निवेशकों को भ्रमित कर रहा है। 28 जून को बिहार विधानसभा पर ऐतिहासिक प्रदर्शन होगा (Sahara protest India 2022)

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अभव देव शुक्ला का कहना है कि उन्हें सेबी से क्या मतलब। उन्हें तो सहारा इंडिया से भुगतान लेना है। उन्होंने सहारा के चेयरमैन सुब्रत राय को शातिर ठग बताते हुए कहा कि ये महाशय किसी भी सूरत में निवेशकों को पैसा नहीं देना चाहते हैं।

अपने राजनीतिक रसूख के चलते मामले को टाले रहना चाहते हैं (Latest sahara India News)। उन्होंने कहा कि सहारा इंडिया से भुगतान लेने का एकमात्र उपाय आंदोलन ही है। उन्होंने कहा कि लखनऊ में हुए सहारा इंडिया के खिलाफ हुए प्रदर्शन से सहारा प्रबंधन में हड़कंप है। उन्होंने देशभर के जमाकर्ताओं से अपील की है कि पटना विधानसभा के घेराव कार्यक्रम को सफल बनाएं।

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संयुक्त ऑल इंडिया जनांदोलन संघर्ष न्याय मोर्चा का तर्क है कि सहारा सेबी पर 15 हजार करोड़ का दावा कर रहा है। एक बार मान भी लिया जाए कि सेबी सहारा को 15000 करोड़ रुपये दे देगा (Latest sahara India News), तब भी तो निवेशकों का उनका पैसा नहीं मिल पाएगा। मोर्चे का तर्क है कि वैसे भी जमाकर्ताओं और एजेंटों को सहारा से अपना भुगतान लेना है न कि सेबी से। मोर्चा का कहना है कि बिहार सरकार ने बाकायदा विज्ञापन छपवाकर सहारा जमाकर्ताओं से आवेदन मांगे थे।

जमाकर्ताओं ने बड़े स्तर पर आवेदन भी दिये पर जमाकर्ताओं का भुगतान न हो सका । इसलिए 28 जून को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। विधानसभा में जाने वाले जदयू, भाजपा के अलावा विपक्ष के विधायकों से भी उनकी जनता के प्रति जवाबदेही के बारे में पूछा जाएगा।

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वैसे तो उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिमी बंगाल, उड़ीसा के साथ ही लगभग सभी प्रदेशों के लोगों ने सहारा में पैसा जमा कर रखा है पर बिहार में जमाकर्ताओं की संख्या सभी प्रदेशों से अधिक है। सहारा (Latest sahara India News) के चेयरमैन सुब्रत राय के जन्मस्थल (भागलपुर) होने की वजह से बिहार के लोगों ने दूसरे प्रदेशों से कहीं अधिक विश्वास कर बड़े स्तर पर सहारा में निवेश किया था।

बिहार से सिविल कोर्ट के अलावा पटना हाईकोर्ट में बड़े स्तर पर सहारा के खिलाफ भुगतान को लेकर याचिका डाली गई है। सुब्रत राय के कोर्ट में पेश न हेाने पर पटना हाईकोर्ट ने तो सख्ती बरतते हुए सुब्रत राय के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी कर दिया था । हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस वारंट पर स्टे दे दिया। सहारा से भुगतान न होने की वजह से निवेशक और एजेंट आत्महत्या कर रहे हैं। कुछ लोग आर्थिक तंगी के चलते दम तोड़ दे रहे हैं। मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले उमाशंकर चौबे ने गत 12 तारीख को आर्थिक तंगी के चलते दम तोड़ दिया। उमाशंकर ने जबलपुर हाई कोर्ट में याचिका भी दायर कर कर रखी थी। 

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दरअसल सहारा इंडिया(Sahara protest)की कहानी बड़ी दिलचस्प है। निवेशक सहारा पर दो लाख करोड़ की देनदारी बता रहे हैं। सहारा प्रबंधन है कि कभी तो वह सेबी के उसके पैसे न देने की वजह से भुगतान  करने में असमर्थता व्यक्त करता है तो कभी निवेशकों का पाई-पाई निपटाने की बात करने लगता है। कभी निवेशकों को उनके खाते सील होने के नाम पर भ्रमित करने लगता है। दरअसल सहारा प्रबंधन का ध्यान निवेशकों का भुगतान करने पर कम और पैसा लेने पर दिल्ली हाईकोर्ट के लगे प्रतिबंध को हटवाने पर ज्यादा है। गत दिनों सहारा इंडिया के अधिकारियों ने छोटे निवेशकों को 10 -10  हजार रुपये देकर उनसे भुगतान होने का हलफनामा लिखवाने का भी अभियान चलाया था।

सहारा इंडिया की योजना थी कि इन हलफनामों को सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दिल्ली हाईकोर्ट का लगा प्रतिबंध हटवा लिया जाए। सहारा के हमारा इंडिया और सहारा दुनिया कंपनी बनाने की बात भी मार्केट में आई थी। दरअसल सहारा के चेयरमैन सुब्रत राय के जबर्दस्त राजनीतिक रसूख होने की वजह से उनका कुछ बिगड़ नहीं पा रहा है। कानून के इतिहास में यह भी एक उदाहरण है कि सुब्रत राय छह साल से पैरोल पर जेल से बाहर हैं। 

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इन्हीं सब कारणों से सहारा के खिलाफ देशभर में आंदोलन चल रहा है। गत महीनों में जहां राष्ट्रीय उपकार संयुक्त मोर्चा ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किाय था। वहीं 5,6,7 अगस्त को संयुक्त ऑल इंडिया जनांदोलन संघर्ष न्याय मोर्चा जंतर-मंतर पर मोर्चा खोलने जा रहा है (Sahara protest India 2022)। 30 जुलाई से सोशल एक्टिविस्ट मदनलाल सहारा समेत दूसरी ठग कंपनियों द्वारा ठगे गये निवेशकों के पक्ष में सत्याग्रह करने जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों से पहले पटना विधानसभा चुनाव का घेराव होने जा रहा है।

-चरण सिंह राजपूत

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