साइबर सुरक्षा और अपराध रोकने के लिए जन जागरुकता अभियान जरुरी : भुवनेश

राजगीर। भगवान बुद्ध और तीर्थंकर महावीर की कर्मभूमि राजगीर में विश्वसनीय साइबरस्पेस के लिए सुरक्षा इंजीनियरिंग विषयक दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी” का आयोजन किया गया है। सी डैक, पटना द्वारा यहां के आरआईसीसी में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव भुवनेश कुमार द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उनके द्वारा क्रिप्टोग्राफी पर रोडमैप जारी किया। सी-डैक, पटना द्वारा विकसित दो साइबर सुरक्षा समाधान “गंगा” और “ग्लैम्स-सीआई” भी अतिरिक्त सचिव द्वारा लॉन्च किया गया। मौके पर साइबर अटैक को रोकने के लिए 1989 से 2023 तक अपनाये गये तकनीक पर आधारित एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। सेमिनार का उद्घाटन करते हुए अतिरिक्त सचिव भुवनेश कुमार ने कहा कि साइबर अटैक रोकने के लिए भारत सरकार राज्य सरकार पुलिस देसी विदेशी तकनीकी विशेषज्ञ आईआईटी के विशेषज्ञ द्वारा गहन चिंतन और मंथन दो दिनों तक राजगीर में की जाएगी उन्होंने कहा कि 1989 से 2023 तक देश में अनेक साइबर अपराध हुआ है साइबर अपराधी डाटा को बंधक बनाकर रुपए वसूल के रहे हैं पिछले 34 सालों में उनके द्वारा डाटा हैक करने में किस तकनीक का उपयोग किया गया है और सरकार और उनकी एजेंसियों के द्वारा उसे रोकने में में किस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है उन तकनीकों पर चर्चा की जा रही है उन्होंने कहा कि डाटा नेटवर्क सहित 18 प्रकार की समस्याएं हैं जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी करते हैं उनकी समस्याओं को ढूंढने के लिए देश और दुनिया के तकनीकी विशेषज्ञ राजगीर में जुटे हैं अपराधी जिस तकनीक का इस्तेमाल फिलहाल कर रहे हैं उसे तकनीक को जानना और उसे पर रोक लगाना इस संगोष्ठी का महत्वपूर्ण हिस्सा है उन्होंने स्वीकार किया कि स्मार्टफोन साइबर अपराध को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है इस पर रोक लगाने के लिए जन जागरूकता अभियान आवश्यक है

— साइबर सुरक्षा और अपराध रोकने हेतु बिहार में 44 साइबर थाना

इस अवसर पर अपर पुलिस महानिदेशक मुख्यालय जितेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि साइबर क्राइम को रोकने के लिए बिहार सरकार सरकार द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा और साइबर अपराध को रोकने के लिए बिहार में 44 साइबर थाने खोले गए हैं रेलवे में भी साइबर क्राइम को रोकने के लिए थाने खोले गए हैं बिहार पुलिस द्वारा साइबर क्राइम को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है

पटना और कोलकाता सी डैक के निदेशक आदित्य कुमार सिन्हा ने कहा कि सी-डैक पटना सबसे नया केंद्र है। इसका मुख्यालय पुणे में है। इसकी स्थापना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और फोरेंसिक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत और बिहार की सेवा के लिए वर्ष 2020 में की गई है । निदेशक सिन्हा ने कहा कि संगोष्ठी वास्तव में युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, छात्रों, केंद्र और राज्यों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ-साथ सशस्त्र बलों के लिए एक सुरक्षित और विश्वसनीय साइबर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए एक मील का पत्थर है।

साइबर सुरक्षा और यूआईडीएआई में अनुसंधान एवं विकास समूह समन्वयक सुश्री तूलिका पांडेय कहा कि सी-डैक पटना के साइबर सुरक्षा समूह में आर एंड डी द्वारा शुरू किए गए अनुसंधान का फल हैं कि साइबर सुरक्षा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। साइबर अपराधियों के हर तकनीक पर सी डैक की कड़ी नजर है।

इस कार्यक्रम में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के अनेकों प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और आईटीयनों द्वारा साइबर सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीकी को लेकर दो दिनों तक गहन मंथन करेंगे। इस अवसर पर भारत सरकार के पीएसए कार्यालय और पूर्व निदेशक, एसएजी, डीआरडीओ के पीएसए फेलो, डॉ. पी.के.सक्सेना , मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) रवि चौधरी वीएसएम, कमोडोर (सेवानिवृत्त) एस वोम्बटकेरे, एनएम, एवं अन्य के द्वारा साइबर सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा किया। इस अवसर पर बिहार पुलिस, सी-डैक केंद्रों, एमईआईटीवाई, विश्वविद्यालयों और आईआईटी पटना, इंजीनियरिंग कॉलेजों के अधिकारियों और कर्मचारियों सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। संगोष्ठी में सरकारी विभागों, उद्योगों, स्टार्ट-अप और शिक्षा जगत से संबंधित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय वक्ताओं के द्वारा दिए गए सत्र उपयोगी थे। यह संगोष्ठी भारत के डिजिटल स्थान को सुरक्षित करने हेतु युवा दिमागों के लिए एक ज्ञान मंच बन गई है। समारोह में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अभय कुमार सिंह कुलसचिव डॉ आरपी सिंह परिहार, इंजीनियर प्रणव प्रकाश कुणाल अभिषेक नीरज कुमार एवं अन्य प्रमुख लोग उपस्थित थे मनोज अग्रवाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।

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