ईरान युद्ध में मध्यस्थता को भारत सरकार ने पाकिस्तान को ‘दलाल’ करार दिया। सरकार ने कहा कि हम पाकिस्तान की तरह ‘दलाल’ राष्ट्र नहीं हैं। इस पर शिवसेना यूबीटी की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भारत सरकार के इस बयान का समर्थन किया लेकिन साथ ही सवाल भी खड़ा किए।
पाकिस्तान वाकई में दलाल ही है- प्रियंका चतुर्वेदी
अपने एक्स पोस्ट में प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “मुझे इस बात पर जरा सी भी आपत्ति नहीं है कि आतंकिस्तान को दलाल कहा जाए। वह मुल्क वाकई में दलाल ही है, लेकिन मुझे इस बात से जरूर आपत्ति है कि भारत ने युद्ध में किस तरह पक्ष लिया, ईरान से देर से संपर्क साधा और अब इस क्षेत्र में शांति वार्ता में उसकी कोई भूमिका नहीं है।
सर्वदलीय बैठक में सरकार ने कहा- हम दलाल राष्ट्र नहीं हैं
बता दें कि पश्चिम एशिया के हालात पर बुधवार को सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ईरान युद्ध के मामले में पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों में कुछ भी नया नहीं है क्योंकि उस देश का 1981 से अमेरिका द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है. एस जयशंकर ने बैठक में उपस्थित नेताओं से कहा, ‘‘हम दलाल राष्ट्र नहीं हैं।
सरकार ने विपक्ष के आरोपों का किया खंडन
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने विपक्ष के इस आरोप का खंडन किया कि भारत सरकार इस मामले पर चुप है और कहा कि हम टिप्पणी कर रहे हैं और जवाब दे रहे हैं। सरकार का पक्ष था कि जब ईरान दूतावास खोला गया, तो विदेश सचिव ने तुरंत वहां दौरा किया और शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने पर जल्द शोक व्यक्त न करके नैतिक कमजोरी दिखाई है। बताया जाता है कि सरकार ने राजनीतिक दलों को यह भी सूचित किया है कि उसकी मुख्य चिंता खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है। उस संबंध में सरकार ने कहा कि वह अब तक सफल रही है।






