जनता के प्रति गंभीर नहीं सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही!

सदन के नेता पीएम मोदी और प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी क्यों नहीं गए सर्वदलीय बैठक में ?

चरण सिंह 
सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही जनता के प्रति कितने गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सर्वदलीय बैठक में न तो सदन के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद थे और न ही प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी। समाजवादी पार्टी की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी बैठक में जाना ग्वारा न समझा। टीएमसी ने तो बैठक का बायकॉट ही कर दिया। मतलब इन दलों को बस सत्ता से मतलब है सत्ता देने वाली जनता की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं। हां बात यदि सत्ता से संबंधित होगी तो पूरी जान लगा देंगे।
प्रधानमंत्री ने पश्चिमी एशिया में उभरे संकट से निपटने के लिए जनता से तो निपटने के लिए तैयार रहने को कहा पर यह नहीं बताया कि यह संकट आया कैसे ? या फिर इस संकट को टालने  के लिए उन्होंने क्या किया ? यह संकट आया किन लोगों की वजह से ? प्रधानमंत्री इस संकट के समय इजरायल क्या करने गए थे ?
ईरान पर हुए हमले में उनके सुप्रीम लीडर के मारे जाने पर पीएम मोदी ने संवेदना क्यों नहीं व्यक्त की ? ईरान में इजरायल ने हमला कर 180 बच्चियों को मार दिया। स्कूल पर हुए इस हमले की निंदा क्यों नहीं की  गई ? क्या अमेरिका के दबाव में रूस से तेल खरीदना बंद किया था ? क्यों तेल खरीदने के लिए अमेरिका से अनुमति लेनी पड़ी ? क्यों अमेरिका के दबाव में भारत का कृषि बाजार खोला जा रहा है ? राहुल गांधी और अखिलेश यादव वैसे तो विदेश नीति पर तमाम बातें बोल रहे हैं पर सर्वदलीय बैठक में जाकर उन्हें अपनी बात रखकर बड़ा संदेश नहीं देना चाहिए था ? नेता अपने ईगो के चलते जनता को संकट में डालते रहें और जनता इनके कुकर्मों को भुगतती रहे।
दरअसल पश्चिम एशिया संकट पर 1:45 घंटे चली सर्वदलीय बैठक में न तो पीएम मौजूद थे और न ही प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी। सरकार ने कहा तो कहा कि हालात नियंत्रण में हैं और देश में तेल की कोई कमी नहीं है। चार जहाज भारत आ रहे हैं और कुछ जल्द होर्मुज से निकलेंगे। पर यह नहीं बताया इस संकट को पैदा करने वाले लोगों के प्रति सरकार का क्या नजरिया है। विपक्ष के भी सरकार का साथ होने की बात सामने आ रही है फिर जनहित में सदन को चलने नहीं दिया जाता ?
बैठक में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से जुड़े मंत्री मौजूद रहने की बात सामने आ रही है। अमित शाह, एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण के शामिल होने की खबर है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने वैश्विक हालात और पश्चिम एशिया के संकट पर विस्तार से जानकारी देने की बात की जा रही है। कांग्रेस के तारिक अनवर और मुकुल वासनिक, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव और बीजद के सस्मित पात्रा के बैठक में मौजूद रहने की बात सामने आ रही यही। टीएमसी ने बायकॉट क्यों कर दिया ?
हालांकि सरकार की ओर से साफ कहने की बात सामने आ रही है। सरकार ने कहा है कि वैश्विक हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जाएंगे। साथ ही आम लोगों से अपील की गई कि वे किसी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और घबराएं नहीं। सरकार का कहना है कि देश पूरी तरह तैयार है और किसी भी स्थिति से निपटने की क्षमता रखता है।
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