तबाही का दौर ( रहा )

आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास बहुत दिलचस्प वाक़यात दर्ज कर रहा है ।   अच्छा हुआ सारी दुनिया ने भारत को उस नज़र से भी देख लिया जब एक देश अपनी दक्षिण पंथी सनकी नीति के चलते तबाही के दौर से गुज़र गया / हर तरफ़ से । देश के आंतरिक हालात बिगड़े और वाह्य रिश्ते एक एक कर टूटते गये । “ ।
इतिहास अपने एथिक दृष्टिकोण से बँधा होने के नाते भविष्य की घोषणा तो नहीं करता , लेकिन यहाँ वह यह भी इशारा करता जा रहा है कि भारत इस दक्षिण पंथी नीति से युगों तक मुक्त हो गया और यह विचार शायद अब अपने ही खोदे कब्र में दफ़न हो जाय , बशर्ते इस दक्षिण पंथी विचार का “प्रतिरोधी विचार “ ( गांधी ) सशक्त रूप से संचालित होता रहे । भाषा और कर्म दोनों से । “ याद रखिए यह दौर ( या कोई भी दौर हो ) व्यक्तियों के आपसी द्वन्द की गाथा नहीं होती , दो या दो से अधिक विचारों की टकराहट होती है । भारत में यह दौर गांधी से गोडसे के उलझाव का दौर है ।
ऊपर जितना कुछ लिखा गया है इसका आम जन की भाषा में संक्षिप्त शब्दावली दी जाय तो –
“एक बार “ ये “ गए तो फिर सैकड़ो साल पलट कर आने की हिम्मत नहीं करेंगे । “
– क्यों ?
– जानता से पूछिए !
एक लालटेन कल से निकली है जानता से पूछने ।
– लेकिन यह लालटेन जलती कैसे है ?
( vp singh – वो सब तो ठीक है , पर ये बताइये कि लालटेन में मिट्टी का तेल कहाँ से मिला ?)
कल की पोस्ट “मुनादी “ में vp singh ने यह सवाल उठाया है , वही सवाल हम आपकी ओर उछाल रहा हूँ ।
इस सवाल की अंतरधारा में कई बुनियादी सवाल बिलबिला रहे हैं इसे जानना जरूरी है । मसलन –
१- लालटेन जलती कैसे थी , वह तेल ( किरासीन ) गया कहाँ ?
२- किरासिन तेल की वजह से कितने उपरण जो आम आदमी से जुड़े थे वे किस नीति के तहत ख़त्म किए गए ?
३– इन जीवन दायिनी उपकरणों के ख़त्म होने से कितने रोज़गार ख़त्म हुए ?
४- लघु उद्योगों द्वारा बनाए गए इन ज़रूरी उपकरणों का विकल्प क्या दिया गया ?
५- देश में सत्ता के बदलाव ( नई सत्ता के विचार – मध्यमार्ग की जगह दक्षिण पंथी सोच ) ने भारत जैसी बड़ी आबादी वाले देश में रोजगार की रीढ़ – लधु उद्योग , कुटीर उद्योग को खत्म करके किसको फ़ायदा दिया ?
किरसीन तेल का सवाल छोटा लग रहा होगा , लेकिन ऐसा है नहीं । यह तो हांडी में पक रहे चावल के दाने की तरह है , इसी तरह की नीतियों ने देश में बेरोजगारी को बढ़ावा दिया है , इसका विकल्प क्या है ?
यह विषय आपके के लिए है । आपके विचार हम संकलित करेंगे ।
लालटेन की बहस पर दिल्ली विश्वविद्यालय के चर्चित प्रोफेसर अग्रज राज कुमार जैन की टिप्पणी –

साथी चंचल ने ‌ व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के‌ इस दौर में जहां ‌ यूज एंड थ्रो,‌‌ धन और पद कैसे मिले का फार्मूला ‌ ही‌ जहां महामंत्र बन गया हो‌ वहां इस गहन गंभीर ‌ चर्चा को छेड़ कर ‌ बुनियादी सवालों, ‌ समस्या और समाधान‌ की नई बहस छेड़ दी।
पहला प्रतीकात्मक सवाल‌ यह लालटेन जलती कैसे हैं ‌ उठाया। यानी की हिंदुस्तान की बुनियादी आर्थिक संरचना, ‌‌ और उसके परिणाम, दुष्परिणाम। और यह इशारा गांधी की ‌ओर है। क्योंकि गांधी ‌ के अर्थशास्त्र में हाथ के श्रम‌‌ और मशीन ‌ की योजना में बाइसिकल, चरखा और सिलाई की मशीन जैसी सरल मशीनों के लिए जगह थी।

1909 में लंदन से दक्षिण अफ्रीका वापस जाते हुए जहाज पर गांधी ‌ की बातचीत हिंदुस्तान के कुछ क्रांतिकारी से हुई थी ‌ उस समय गांधी के ‌ जो विचार‌ उभरे थे उसको उन्होंने दक्षिण अफ्रीका से छपने वाले इंडियन ओपिनियन नामक अपने पत्र में पहली बार प्रकाशित किया। जो की “हिंद स्वराज”‌ पुस्तिका के रूप में सामने आई। चंचल के लालटेन के सवाल ‌ का मुकम्मल जवाब ‌गांधी की इसी हिंद स्वराज ‌ पुस्तिका में‌ मिलता है। इस किताब में आधुनिक सभ्यता यानी पाश्चात्य सभ्यता ‌‌‌ की हकीकत ‌ की बखिया गांधी ने उघेढी है। इसी से मिलता जुलता एक और जवाब गांधी द्वारा 18 मार्च 1922 को उनके खिलाफ चल रहे हैं ‌ मुकदमे ‌ के दौरान‌ उन्होंने जो कहा था “शहरों में रहने वाले नहीं जानते की कि किस तरह अघभूखी भारतीय जनता‌ धीरे-धीरे निष्प्राण होती जा रही है। यह नहीं जानते कि उनका निरापद सुख उस दलाली की रकम का प्रतीक है जो उन्हें विदेशी शोषण के हक में किए जाने वाले उनके कार्यों की एवज में मिलता है, और दलाली की यह रकम और मुनाफे जनता से चूसे जाते हैं। वह यह नहीं समझते कि ब्रिटिश कालीन ब्रिटिश भारत में कानून द्वारा कायम सरकार ‌ इस ‌ शोषण के लिए ही चलाई जा रही है। अनेक गांवों के कंकाल इन नंगी आंखों के सामने जो साक्ष पेश करते हैं उसे कुतर्क के जरिए, आंकड़ों की बाजीगरी के जरिए झुठलाया नहीं जा सकता। मुझे इस बात में जरा भी संदेह नहीं है कि अगर ऊपर भगवान है तो उनके सामने इंग्लैंड को और भारत के शहरी लोगों को, दोनों को मानवता के विरुद्ध किए जा रहे जुर्म का जवाब देना पड़ेगा जो शायद इतिहास में बेनजीर है”।‌ ग्राम स्वराज, ‌ विकेंद्रित राजव्यवस्था, ‌ विकेंद्रित अर्थव्यवस्था, ‌ स्वदेशी शारीरिक श्रम।
लोहिया के शब्दों में सच्ची‌ अर्थव्यवस्था में पूंजीवादी उत्पादन संबंधों तथा पूंजीवादी उत्पादन शक्तियों दोनों को खत्म करने या कम से कम उन्हें व्यापक रूप में बदलने का प्रयास करना चाहिए उसे ऐसे संभव और ऐसी सभ्यता के बारे में सोचना चाहिए जिसमें श्रमिकों किसानों तथा दूसरे काम धंधे वालों के पास ऐसे नए ‌ औजार हो जिससे वह अधिक धन का उत्पादन कर सकें। संभवत छोटी इकाई के ‌ औजार के द्वारा भारत जैसे देश अपनी अर्थव्यवस्था को पुनः साधन संपन्न बना सकते हैं और अपने साधनों का विस्तार कर सकते हैं।
दूसरा सवाल ‌ दक्षिणपंथी विचारधारा यानी आज के दौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के शासन की दक्षिणपंथी घरेलू और विदेशी दोनों‌ कारगुजारियों में‌‌ जो पलीता लगाया जा रहा है, जिसका प्रतीकात्मक ‌रूप ‌ गोडसे बनाम गांधी के विचारों की टकराहट‌ आज के दौर में‌ सबसे आक्रामक‌ रूप में दिखाई दे रही है। परंतु इस विचारधारा ‌के फैलाव‌ की एक सीमा है। हिंदुस्तान की मुख्तलिफ जातियां, धर्म,,‌ क्षेत्रीयता,‌‌ विचार स्तोत्र में विविधता होने के बावजूद‌‌ सह अस्तित्व ‌ भ्रातत्व, ‌‌ ‌ समन्वय, ‌‌ की एक लंबी‌ शाश्वत परंपरा है। ग्रामीण अंचलों में अलग-अलग जाति, मजहब‌ मैं ‌ यकिदा रखने के बावजूद ‌ एक साझी सामाजिक विरासत ‌ अभी भी मौजूद है, ‌ उसके कारण सांप्रदायिकता‌ कि यह आग एक बिंदु के बाद‌ खुद ही बुझ जाएगी। गांधी पूरी दुनिया पर छाए हैं जहां भी नस्ल रेस,‌ की गैर बराबरी है वहां गांधी मौजूद है। जिस अंग्रेज सल्तनत ने सैकड़ो साल हिंदुस्तान को गुलाम बना कर रखा‌ आज उसी की पार्लियामेंट के सामने गांधी की प्रतिमा खड़ी है। हिंदुस्तान में फैली बेरोजगारी, बेकारी, महंगाई, ‌ गैर बराबरी, धर्म की अफीम के नशे में ज्यादा दिन नहीं रह पाएगी। आरएसएस की विचारधारा का प्रधानमंत्री राजघाट पर भले ही दिखावे के लिए सजदा करने को मजबूर है।

  • राजकुमार जैन
  • Related Posts

    राम मंदिर चोरी मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिलने में कौन सा आश्चर्य ?
    • TN15TN15
    • August 18, 2026

    आरएसएस को कैसे नाराज कर सकते हैं योगी…

    Continue reading
    नक्सलियों के प्रकार का पाठ पढ़ें प्रधानमंत्री जी से ?
    • TN15TN15
    • August 17, 2026

    हर आंदोलन में नक्सली का एक नया शब्द…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    निशांत कुमार संभालेंगे नेतृत्व! नीतीश की विरासत पर दावा ठोकने वाले उपेंद्र कुशवाहा को JDU से मिला सियासी जवाब

    • By TN15
    • August 22, 2026
    निशांत कुमार संभालेंगे नेतृत्व! नीतीश की विरासत पर दावा ठोकने वाले उपेंद्र कुशवाहा को JDU से मिला सियासी जवाब

    जयपुर: NTA की एक और परीक्षा में गड़बड़ी! बिजली गुल होने से नहीं चले कंप्यूटर

    • By TN15
    • August 22, 2026
    जयपुर: NTA की एक और परीक्षा में गड़बड़ी! बिजली गुल होने से नहीं चले कंप्यूटर

    आरोप और इस्तीफे की मांग पर बोले मनन मिश्रा- ‘बेतुकी और बकवास बातें…’

    • By TN15
    • August 22, 2026
    आरोप और इस्तीफे की मांग पर बोले मनन मिश्रा- ‘बेतुकी और बकवास बातें…’

    श्रीकृष्ण की शरण में एक्ट्रेस स्नेहा वाघ, टूटी 2 शादियों के बाद चुना आध्यात्म, बोलीं- इंसानों की जरूरत नहीं

    • By TN15
    • August 22, 2026
    श्रीकृष्ण की शरण में एक्ट्रेस स्नेहा वाघ, टूटी 2 शादियों के बाद चुना आध्यात्म, बोलीं- इंसानों की जरूरत नहीं

    पाकिस्तान में बढ़ा मुनीर का दबदबा, नई मिलिट्री कमांड में मिली ‘सारी ताकत’, क्या भारत के लिए चिंता का सबब

    • By TN15
    • August 22, 2026
    पाकिस्तान में बढ़ा मुनीर का दबदबा, नई मिलिट्री कमांड में मिली ‘सारी ताकत’, क्या भारत के लिए चिंता का सबब

    कल से एक्शन में दिखेंगे वैभव सूर्यवंशी, चौकों-छ्क्कों की लगाएंगे झड़ी?

    • By TN15
    • August 22, 2026
    कल से एक्शन में दिखेंगे वैभव सूर्यवंशी, चौकों-छ्क्कों की लगाएंगे झड़ी?