दिल्ली प्रोटेस्ट में विदेशी फंडिंग? याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने तुरंत सुनवाई के लिए भरी हामी

दिल्ली में सोमवार (20 जुलाई) को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर भारी संख्या में छात्र शांतिपूर्ण ‘चलो संसद’ मार्च में शामिल हुए थे। नीट पेपर लीक में जवाबदेही की मांग कर रहे स्टूडेंट्स पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था जिसमें कई बच्चे घायल हुए थे। झड़प में कई पुलिसवालों को भी चोट आई थी, जिसके बाद दावा किया गया कि इस प्रदर्शन में विदेशी फंडिंग की गई है और अराजक तत्वों ने छात्रों के प्रदर्शन पर कब्जा कर लिया है। ऐसी याचिका जब हाई कोर्ट के पास पहुंची, तो कोर्ट ने इस मामले में तुरंत सुनवाई के लिए हामी भर दी।

दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट में जो याचिका दायर की गई है, उसमें दावा किया गया है कि यह आंदोलन विदेशी फंडिंग पाने वाले संगठनों और कुछ राजनीतिक तत्वों की बड़ी साजिश का हिस्सा था। इसी के साथ मामले में NIA की जांच की मांग की गई है। अब हाईकोर्ट कल (शुक्रवार, 24 जुलाई) इस जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा।

 

सरकारी संपत्ति को नुकसान, पत्रकारों पर हमला, संसद की सुरक्षा पर सवाल

 

याचिका में ये भी आरोप हैं कि मार्च के दौरान हिंसा हुई, लोगों की आवाजाही रोकी गई, पत्रकारों पर हमला हुआ, सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। ये भी आरोप हैं कि संसद की सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की गई और कई पुलिसकर्मी घायल हुए। यह जनहित याचिका सतीश कुमार अग्रवाल ने दाखिल की है।

 

लाठीचार्ज की याचिका पर कहा था- ‘कोर्ट को इसमें मत घसीटें’

 

इससे पहले 21 जुलाई को जब छात्रों पर हुई पुलिस बर्बरता का दावा करते हुए याचिका दायर की गई थी और तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी तब हाई कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में कोर्ट को न घसीटें। कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से मना कर दिया था, लेकिन मामले को अगली तारीख यानी 22 जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया था।

फिर 22 जुलाई को लाठीचार्ज की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसी बेंच ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजकर जवाब मांगा। सरकार और पुलिस को अपना जवाब चार हफ्ते के अंदर दाखिल करना होगा. साथ ही, कोर्ट ने आंदोलन के सीसीटीवी और पुलिस बॉडी कैम के फुटेज सुरक्षित रखने के लिए भी कहा। अगली सुनवाई 11 सितंबर तय की गई है।

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