उत्तर प्रदेश स्थित अयोध्या में राम मंदिर से चढ़ावा चोरी मामले में निर्माण समिति के अध्यक्ष और भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा ने कहा है कि लोगों के साथ विश्वासघात किया गया है। एक चैनल से बात करते हुए मिश्रा ने यह भी कहा कि बैंक के लोगों ने जिम्मेदारी नहीं निभाई गई। मिश्रा ने कहा कि चढ़ावे पर खुला डाका डाला गया। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि काउंटिंग प्रक्रिया से जुड़े जो साक्ष्य सामने आ रहे हैं, वे इस बात का संकेत देते हैं कि पूरी व्यवस्था में निगरानी लगभग शून्य थी और विजिलेंस का गंभीर अभाव था। उन्होंने बताया कि बैंक और ट्रस्ट के बीच हुए समझौते में स्पष्ट रूप से तय था कि दान की गिनती और उसका हिसाब-किताब रखने की जिम्मेदारी बैंक की होगी।
पूर्व IAS ने कहा कि शुरुआती तथ्यों से यह प्रतीत हो रहा है कि बैंक ने अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि काउंटिंग रूम में बैंक को अपने कर्मचारियों की तैनाती करनी थी, मगर ऐसा नहीं किया गया. आखिर ऐसा क्यों हुआ, यह अब जांच का विषय है और एसआईटी इसकी पड़ताल करेगी।
निर्देशों का पालन किया गया होता तो ऐसी स्थिति नहीं होती : मिश्रा
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि भले ही वह निर्माण समिति में हैं, लेकिन उनकी पहचान मंदिर से जुड़े व्यक्ति की भी है, इसलिए इस मामले पर स्पष्ट रूप से अपनी बात रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित निर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया होता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
मिश्रा ने कहा कि मुताबिक पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाना था, काउंटिंग प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों की स्पष्ट जवाबदेही तय होनी थी, अंदर आने और बाहर जाने वालों की जांच अनिवार्य थी तथा पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी निगरानी में होनी चाहिए थी।
उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज को जानबूझकर डिलीट नहीं किया गया, बल्कि वह ऑटो-डिलीट सिस्टम के तहत हट गया। हालांकि, जरूरत पड़ने पर फुटेज को सुरक्षित (प्रिजर्व) रखा जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
निर्माण समिति के अध्यक्ष ने कहा कि यह भी सही है कि दो स्थानों पर वॉच हो रहा था. ट्रस्ट में सीसीटीवी थे – पुलिस के कंट्रोल रूम में भी देखने की व्यवस्था थी. पुलिस के लिए मुश्किल था, लेकिन व्यवस्था अपने में थी. मैं इसको कहूंगा कि प्रशासनिक प्रबंधन के अनुभव की घोर कमी थी. इसलिए मैंने ये ओपन सुझाव दिया है कि तत्काल हमको एक अनुभवी अधिकारी ट्रस्ट में रखा जाए, लेकिन कार्य करने की स्वतंत्रता हो।








