सूचना निदेशक ने जिले के सभी सूचना अधिकारियों और सहायक विभाग को लिखा है पत्र
मुख्यमंत्री की खबर पृष्ठ एक पर लगवाने के जारी किये गए हैं निर्देश
संपादक, समाचार संपादक, डेस्क प्रभारी, ब्यूरो चीफ, स्टार रिपोर्टर, क्राइम रिपोर्टर, रिपोर्टर सब कर दिए गए हैं ढक्कन

सूचना निदेशक द्वारा जारी पत्र के अनुसार सरकार की योजनाओं, नीतियों और कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया गया है। यह तालमेल कैसे बनाया जाएगा। हर कोई समझ सकता है। मीडिया समूह को निर्देश जारी कर दिए जाएंगे। इस पत्र में दिए गए निर्देश में किसी भी सरकारी कार्यक्रम से एक दिन पहले “प्री-इवेंट कंटेंट” तैयार कर प्रमुख सूचनाएं साझा करने की बात की गई है। साथ ही कार्यक्रम का आधिकारिक लाइव लिंक भी प्रसारित करने को कहा गया है। कार्यक्रम के बाद दो घंटे के भीतर पोस्ट-इवेंट प्रेस रिलीज जारी करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें कार्यक्रम के प्रभाव और लाभार्थियों की प्रतिक्रियाएं भी शामिल होंगी।
पत्र में निर्देश दिए गए हैं कि कार्यक्रमों के प्रमुख वीडियो अंश DIPR और सोशल मीडिया टीम द्वारा साझा किए जाएंगे, जिन्हें स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इन्फ्लुएंसर्स के जरिए व्यापक रूप से प्रसारित करेगा। मतलब यह सब निर्देश होंगे। इन निर्देशों को टालने का मतलब सरकार का दमन शुरू।
दिलचस्प है कि किसी अख़बार, चैनल या वेबसाइट पर कौन सी खबर कहां और किस रूप में जाएगी। यह सब संपादक तय करता है। इस पत्र में मीडिया कवरेज को लेकर जो दिशा-निर्देश दिए गए हैं। उन निर्दशों के अनुसार प्रिंट मीडिया में पहले पृष्ठ पर मुख्यमंत्री से संबंधित खबरों को प्राथमिकता देने और अन्य पृष्ठों पर भी मुख्यमंत्री से जुड़ी खबरों को स्थान देने की बात कही गई है। मतलब कौन सी खबर कहां जाएगी यह संपादक नहीं जिला सूचना निदेशक तय करेगा। जब सूचना निदेशक मीडिया की व्यवस्था को अपने हाथ में लेने के लिए जिला निदेशकों को पत्र लिख रहा है तो समझ सकते हैं कि मीडिया अधिकारियों और पत्रकारों की आज की तारीख में क्या औकात रह गई है। मीडिया मालिक संपादक और संपादक डीएम कर एसएसपी और जिला निदेशक की चाटुकारिता करते नज़र आएंगे।








