इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली मुस्लिम छात्रा की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें स्कूल ड्रेस के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगी गई थी. इस फैसले के बाद अब अलग-अलग दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं .मंगलवार को आरजेडी सांसद मनोज झा ने भी बड़ा बयान दिया है। मनोज कुमार झा ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा स्कूल में हिजाब पहनने की यूपी की छात्रा की याचिका खारिज किए जाने पर कहा, “मैं समझता हूं कि कुछ चीजें लोगों की इच्छा पर भी छोड़ दी जाए। मैं व्यक्तिगत तौर पर यह मानता हूं कि किसी को अगर दबाव में यह करना पड़े तो वो उचित नहीं है, लेकिन अगर कोई अपनी एजेंसी का इस्तेमाल करके इस तरह की चीज चाहे वस्त्र हो या कोई आभूषण हो, तो मैं समझता हूं कि एक डोमेन छोड़कर रखना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
मामला यूपी के प्रयागराज का है. एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा ने अपनी मां के माध्यम से यह याचिका दायर की थी। उसका तर्क था कि वह कक्षा 6 से 10 तक इसी स्कूल में हिजाब पहनकर पढ़ती आ रही है, इसलिए उसे आगे भी इसकी अनुमति मिलनी चाहिए। बताया गया कि कक्षा 6 से 10 तक के दौरान हिजाब पहनने पर स्कूल प्रबंधन की ओर से आपत्ति नहीं जताई गई थी। अब आगे ऐसा करने पर मना किया जा रहा है।
इस पर बीते सोमवार (24 अगस्त, 2026) को इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से ऐसा कोई पुख्ता तथ्यात्मक या कानूनी आधार पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि इस्लाम धर्म में महिला के लिए सिर पर स्कार्फ पहनना अनिवार्य है. कोर्टे के फैसले के बाद अब इस पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गई है. इसी क्रम में मनोज झा ने अपनी बात रखी है।
बता दें कि इस पूरे मामले में स्कूल का कहना है कि अन्य छात्राएं भी निर्धारित यूनिफॉर्म का पालन कर रही हैं, वहीं सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से स्कूल की यूनिफॉर्म नीति में बदलाव का आदेश देने से इनकार कर दिया गया। साथ ही याचिका भी खारिज कर दी गई।








