शराबबंदी को सही ठहारने को फ‍िर समाज सुधार यात्रा पर न‍िकले नीतीश कुमार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समाज सुधार यात्रा के सिलसिले में 22 फरवरी को भागलपुर आए थे 

द न्यूज 15 
पटना । हालांकि यह वक्त बिहार में चुनाव का नहीं है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कुर्सी को भी कोई खतरा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब से नीतीश कुमार को सच्चा समाजवादी बताया है, तब से बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समेत पूरी भाजपा के सुर बदल गए हैं। मंगलवार को भागलपुर की सभा में तो राज्य के उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन ने अपने को नीतीश कुमार के नक्शे कदम पर चलने वाला छोटा भाई ही बता दिया। वहीं राजस्व व भूमि सुधार मंत्री रामसूरत राय ने नीतीश कुमार की बड़ाई में कसीदे गढ़े। बोले उनकी अगुवाई में बिहार तरक्की कर रहा है।
असल में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समाज सुधार यात्रा के सिलसिले में 22 फरवरी को भागलपुर आए थे। भागलपुर के हवाई अड्डे पर सभा हुई। जहां जीविका दीदियों से संवाद किया। दीदियों को कम समय देने के लिए भागलपुर के डीएम सुब्रत सेन से आगे से ज्यादा समय देने को बोले। इस यात्रा का शुभारंभ 22 दिसंबर को पूर्वी चंपारण से हुआ था, जो छह ज़िलों में चला। मगर कोरोना की तीसरी लहर की वजह से इसे रोक दिया गया। मंगलवार से दूसरे दौर की यह यात्रा भागलपुर से शुरू हुई है। 23 को जमुई में सीएम का कार्यक्रम है। इस यात्रा का ज्यादा जोर शराबबंदी कानून को सही ठहराना है। सभा में तमाम वक्ताओं के भाषण का लव्वोलुआव यही था। मंत्री जयंत राज, मद्य निषेध मंत्री सुनील कुमार, मुख्य सचिव आमिर सोहनी, अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रकाश, डीजीपी एसके सिंघल सभी ने शराबबंदी कानून को उचित बताया।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट में शराबबंदी कानून पर दायर याचिका की सुनवाई अप्रैल में होनी मुकर्रर की गई है। यह याचिका इंटरनेशनल स्प्रिट्स एंड वाइन एसोसिएशन आफ इंडिया ने दायर की है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ्ते का समय बिहार सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दिया है। इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने बिहार सरकार के जमानत न देने का विरोध संबंधी आवेदनों को खारिज कर झटका दिया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने विशाखापत्तनम के एक समारोह में बिहार के शराबबंदी कानून का जिक्र किया था। साथ ही बिहार में हाल के महीनों में जहरीली शराब कांड होने और दर्जनों मौतें होने की वजह से शराबबंदी कानून पर सवाल उठने लगे हैं। इन्हीं वजहों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजनीतिक दबाव में हैं।
अलबत्ता नीतीश कुमार की जब घबराहट बढ़ती है तो यात्रा का सहारा लेते हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार की यह 12वीं यात्रा है। 2005 से बिहार में सत्ता की बागडोर संभालने के बाद से ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यह स्पष्ट रूप से हर राजनीतिक यात्रा की परिभाषित विशेषता रही है। अक्टूबर 2005 के विधानसभा चुनावों के लिए उन्होंने न्याय के साथ विकास वाले वादे के साथ न्याय यात्रा शुरू की थी, जो बाद में उनकी सरकार की टैगलाइन बन गई। नीतीश कुमार की वर्तमान राज्यव्यापी यात्रा का उद्देश्य शराब, दहेज और बाल विवाह के खिलाफ लोगों में जागरूकता पैदा करना है। जिसका जिक्र मंगलवार को उन्होंने किया भी। वह बोले कि इन समाजिक कुरीतियों के खिलाफ निरंतर अभियान चलाना चाहिए। महात्मा गांधी की कही पंक्तियों को पढ़कर दोहराया। बोले शराब पैसे की बर्बादी के साथ बुद्धि भी छिन्न कर देती है। इंसान शराब पीकर हैवान हो जाता है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि शराब पीने से घातक बीमारियां होती है। 20 लाख लोग सालाना दुनिया में मर रहे हैं। इनमें 20 से 39 साल की उम्र वाले साढ़े तेरह फीसदी हैं। पिछली यात्राओं की तरह ही मुख्यमंत्री नीतीश ने पूर्वी चंपारण से इस यात्रा की शुरुआत की थी। लेकिन अहम सवाल यह है कि ऐसे समय में जब विधानसभा और लोकसभा चुनाव दूर हैं तो नीतीश कुमार को एक और राजनीतिक यात्रा शुरू करने का मकसद क्या है?  जबकि उनकी 11 में से 7 राजनीतिक यात्राएं लोकसभा या विधानसभा चुनाव के करीब शुरू की गई थी। यों राजनीतिक दवाब तो इस वजह से भी है कि जदयू 2020 के बिहार विधान सभा चुनाव में 45 सीटों पर सिमट कर तीसरे स्थान पर आ गई। इनके पाला बदल लेने वाले स्वभाव की वजह से ही भाजपा इनकी पीठ देख रही है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने तब से इनको पलटू राम कहते हैं।
यात्रा की मिसाल के तौर पर नीतीश कुमार ने 2009 के लोकसभा चुनाव से तीन महीने पहले फरवरी 2009 में “विकास” यात्रा शुरू की थी। इसी तरह उन्होंने 2010 के विधानसभा चुनाव से छह महीने पहले अप्रैल 2010 में “विश्वास” यात्रा आयोजित की थी। हालांकि सीएम नीतीश के वर्तमान राजनीतिक दौरे के पीछे कई कारण नजर आ रहे हैं। नीतीश कुमार अप्रैल 2016 से राज्य में लागू शराब निषेध कानून को सही ठहराने के राजनीतिक दबाव में हैं।
पिछले महीने गोपालगंज और पश्चिम चंपारण और दूसरे ज़िलों  में हुई जहरीली शराब की घटनाओं ने उनकी सरकार को झकझोर कर रख दिया है। हालांकि वे कहते हैं कि जो प‍िएगा वो मरेगा। उनके मंत्री सुनील कुमार दलील देते हैं कि जब शराबबंदी नहीं थी तब भी जहरीली शराब कांड हुए हैं। और मौतें हुई है। वर्तमान में जिन राज्यों में शराबबंदी नहीं है वहां भी जहरीली शराब कांड हुए हैं। पड़ोसी राज्य यूपी में ही जहरीली शराब पीने से मौतें हुई है। यह नकली दवा बनाने जैसा पैसा कमाने का खेल है। अब ड्रोन के जरिए अवैध शराब की भठ्ठियों को ध्वस्त किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बात को भागलपुर की सभा में दोहराया कि मैं किसी भी शादी समारोह में शामिल नहीं होऊंगा जिसमें मुझे लिखित रूप से यह नहीं दिया जाएगा कि इसमें कोई दहेज नहीं लिया गया या नहीं दिया गया। उन्होंने राज्य की महिलाओं से शराब पीने वालों, शराब बनाने वाले और उसको बेचने वाले के बारे में भी जानकारी देने का आह्वान किया। ऐसा करके वह 10 लाख महिला स्वयं सहायता समूहों तक पहुंचने की भी कोशिश कर रहे हैं।

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