नीतीश जिस क्राइम कंट्रोल के दम पर 20 साल से बिहार में कर रहे राज, अब डुबो रहा उनकी नैया

दीपक कुमार तिवारी

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिस जंगल राज के सहारे राजद सुप्रीमों के अभेद्य किला को भेद कर एनडीए की सरकार बनाई थी आज नीतीश कुमार के उसी ब्रह्मास्त्र से नीतीश कुमार की सत्ता को सवालों के घेरे में लाने का जिम्मा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उठा लिया है। आपने आभार यात्रा में तेजस्वी यादव ने अपराध के बढ़ते आंकड़ों को रख सुशासन की विकृत तस्वीर क्या दिखानी शुरू क्या की, एनडीए नेताओं में खलबली मच गई।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बिलकुल भाजपा के विरोध के अंदाज और तरीको को अच्छी तरह से अपना लिया है। जिस तरह से भाजपा प्रदेश से लेकर प्रखंड तक विरोधी की कड़ी को सिलसिलेवार अंजाम देती थी राजद का विरोध भी उसी तर्ज पर चल रहा है।
अपराध के आंकड़ों के साथ तेजस्वी यादव ने राजधानी से लेकर प्रखंड तक को जोड़ा। हल्ला बोल के तहत स्थानीय अपराध के मुद्दे सहित राज्य स्तर पर हुए क्राइम से जनता को रोजमर्रा कार्यक्रम की तरह अप डेट कराना प्राथमिकता में शामिल किया।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव राज्य में बढ़ते अपराध पर खोजी नजर जारी रखा। हर छोटे से बड़े क्राइम को नोटिस करने के लिए टीम भी गठित की गई। प्रचार के जितने संसाधन हो सकते हैं। फेसबुक, ट्विटर, प्रेस बयान और माध्यम के जरिए जनता तक हर दिन पहुंचने की कवायद करते रहे। इसके साथ ही आरोप का तेवर भी बरकरार रहा।
अपने इन क्राइम बुलेटिन के जरिए न केवल सुशासन की सरकार की बखिया उधेड़ी, बल्कि सरकार को कठघरे में खड़ा करने से भी नहीं चूकते। वर्तमान सरकार पर हमला करते नीतीश कुमार को असंवेदनशील बताते हुए यह भी कहा कि ये तो पीड़ित परिवारों से मिलने की जहमत भी नहीं उठाते हैं।
जंगल राज, जंगल राज की माला जपने वाले भाजपा पर भी राजद हमलावर रहा। साथ-साथ आरोप भी लगाया कि अब पीड़ित लोगों को भाजपा के कद्दावर नेता क्यों नहीं न्याय दिला पा रहे हैं? सच्चाई यह है कि भाजपा नेता बोलेंगे कैसे? कई भाजपा नेता और अपराधियों का संबंध बना हुआ है। राजद ने कई तस्वीर जारी भी की जिसमें अपराधी और भाजपा नेताव साथ बैठे हुए हैं। बालिका गृह कांड में शामिल लोग कौन थे ये बिहार की जनता जानती है।
अपराध पर अक्सर चुप्पी साधने में अव्वल रहा राजद का अब अपराध के मामले पर राज भवन मार्च नए राजद का बोध कराता है। लगातार क्राइम बुलेटिन जारी कर आधार बना चुका राजद अब कानून व्यवस्था के सवाल पर राजधानी की सड़कों पर उतरेगा। 15 सितंबर को राजद का राजभवन मार्च होगा। तय कार्यक्रम के मुताबिक पार्टी के नेता और कार्यकर्ता प्रदेश राजद कार्यालय से राजभवन तक जाएंगे और बिहार में लगातार हत्याएं, लूट, मॉब लिंचिंग, बलात्कार की घटनाओं से राज्यपाल को अवगत कराएंगे।
राजद का प्रतिनिधि मंडल राज्यपाल को इस बात की जानकारी देगा कि कैसे सरकार का इकबाल समाप्त हो गया है और लोग खौफ के साए में जी रहे हैं। शासन-प्रशासन पस्त है और सरकार में बैठे हुए नेता, अधिकारी मलाई काटने में व्यस्त हैं।
अपराध पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के मुखर होने के बाद एनडीए में बैचेनी बढ़ गई। वह भी इस कदर कि जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार को प्रेस कांफ्रेंस तक करना पड़ गया। प्रेस से बात करते जदयू एमएलसी नीरज कुमार ने कहा है कि तेजस्वी यादव अपने सोशल मीडिया के माध्यम से गलत आंकड़े पेश कर रहे हैं। नीरज कुमार ने तेजस्वी की ओर से जारी किए गए हर आंकड़े का काट किया। साथ ही घटनाओं की वस्तुस्थिति भी बताई है। तेजस्वी यादव का ट्विट का खेल चल रहा है। इसलिए उनको सच का आइना दिखाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार पहला राज्य है जो नए आपराधिक कानून के तहत किसी को सजा दी है। 50 दिनों के अंदर सारण के ट्रिपल मर्डर का ना सिर्फ खुलासा हुआ बल्कि आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई गई। दी। ये घटना कब हुई तेजस्वी जानकारी दें।
तेजस्वी अपराध के आंकड़े बढ़ाने के लिए एक ही घटना का जिक्र बार बार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि, समस्तीपुर में दिसंबर 2023 में घटना हुई तेजस्वी उसे सितंबर 2024 की घटना बता रहे हैं। वैशाली में रजिस्ट्री ऑफिस के पास पांच लाख लूट कांड किया, लेकिन वो मामला आपसी विवाद का था।
उन्होंने कहा कि, शराबबंदी लागू होने से मामले दर्ज होने का प्रतिशत बढ़ा। उन्होंने कहा कि, हम तेजस्वी यादव को सलाह दे रहे हैं कि वो आकंड़ों का सर्वेक्षण करा लें। उन्होंने कहा कि, बिहार मे संगेय अपराध का दर कम है। बिहार का स्थान देश में 19 वे नंबर पर है। नीरज कुमार ने कहा कि, तेजस्वी आंकड़े जारी करने से पहले तथ्यों का अध्ययन कर लें। उन्होंने कहा कि, जब तेजस्वी यादव हमारे साथ सत्ता में थे 17 महीने और 21 महीना तब 8573 हत्याएं हुई थी। हत्या विभिन्न कारणों से होता है। भाई-भाई का विवाद, जमीन को लेकर विवाद, संगठित विवाद कोई कर दें इतना तो औकात ही नहीं है। लेकिन उस वक़्त तेजस्वी ने ट्विटर पर क्यों नहीं लिखा। उस समय तो कह रहे थे कि कानून का राज।

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