मेरा मायका मेरी माँ का ससुराल है

क्या आप जानते हैं मेरा मायका मेरी माँ का ससुराल है । मेरा ही नहीं आपका मायका भी आपकी माँ का ससुराल है जब मेरी माँ ससुराल में काम कर सकती है तो मैं उसकी बेटी होकर ससुराल में काम क्यों नहीं कर सकती ।एक बहु या बेटी अपनी माँ को घर का काम करते हुए कैसे देख सकती है । एक बेटी अपने माता पिता के घर से जब ससुराल में आती है तो उसे सास ससुर माता पिता के रूप मिलते हैं, देंवर ननद भाई बहन के रूप में मिलते हैं पर आश्चर्य की बात यह है कि वह किसी पति को छोड़कर तो नहीं आयी होती है तो ससुराल में उसे सिर्फ़ पति के साथ ही क्यों रहना है , पूरे परिवार के साथ आख़िर क्यों नहीं रहना है । इसका कारण सिर्फ़ एक है की बेटियों को ऐसे संस्कार मिल रहे हैं कि ससुराल में जाकर अपने पति के अलावा किसी को भी रोटी बनाकर मत दे। और पति से भी रोटी बनवाओ और ख़ुद खाओ । आज की बेटियां ससुराल में आराम करने जाती है ।बेटी अपना आराम तो देख सकती है कि मैं कुछ काम नहीं करती , मेरी माँ करती है पर अपनी माँ से प्यार क्यों नहीं ।एक बेटी अपनी माँ को काम करते हुए कैसे देख सकती है ।अक्सर बहू – बेटियों को कहते सुना होगा मुझे खाना बनाना नहीं आता , मुझे घर का काम करना नहीं आता , मैं तो स्कूल जाती हूँ या मैं कॉलेज जाती हूँ या मैं नौकरी करती हूँ पर मुझे घर का कोई भी काम करना नहीं आता है। मैं पूछना चाहती हूँ कि एक औरत को या लड़की को घर का काम करना नहीं आता यह शर्म की बात है या गर्व की ।अगर माँ अपने ससुराल में काम कर सकती है तो आपको भी अपने ससुराल में काम करना पड़ेगा यह बात आप गाँठ बाँध लिजिए । सबसे मुश्किल काम है पढ़ाई है अगर एक लड़की शिक्षित हो सकती है , पढ सकती है तो घर का काम क्यों नहीं कर सकती ।अगर आपकी माँ अपने ससुराल में सारे काम कर सकती है तो आप अपने ससुराल में काम क्यों नहीं कर सकती । यह कैसा रिश्ता है एक माँ बेटी कहा की बेटी अपनी माँ को काम करते हुए देखती रहती है और बड़े शान से ससुराल में आकर कहती है कि मैंने तो अपने मायके में कभी काम नहीं किया । बड़े शर्म की बात है की एक बेटी अपने मायके में अपने माँ बाप भाई बहन की मदद नहीं करती और यही धारणा लेकर वह ससुराल में क़दम रखती है और ससुराल वालों का जीना हराम कर देती है । यह एक भावनात्मक और पारंपरिक वाक्यांश है जो बताता है कि माँ के ससुराल को बेटी के लिए एक मायका (जन्मस्थान) माना जाता है। यह दर्शाता है कि ससुराल को भी बेटी के घर जैसा ही सम्मान और प्रेम मिलना चाहिए। यह वाक्यांश “मांं का ससुराल मेरा मायका है” एक गहरी भावना को व्यक्त करता है। इसका मतलब है कि माँ का ससुराल, जिसे आमतौर पर बहू का ससुराल माना जाता है, बेटी के लिए भी एक विशेष स्थान है। यह दर्शाता है कि ससुराल में बेटी को भी उतना ही प्यार, सम्मान और देखभाल मिलनी चाहिए जितना कि उसे अपने मायके में मिलता है।यह वाक्यांश दो महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करता है। ससुराल में बेटी को भी परिवार का सदस्य माना जाना चाहिए और उसे अपनेपन का अहसास होना चाहिए। पारिवारिक रिश्तों की गहराई और ससुराल और मायके के बीच के अंतर को कम करने की आवश्यकता पर जोर देता है।संक्षेप में, यह वाक्यांश एक पारंपरिक और भावनात्मक विचार को दर्शाता है कि ससुराल को भी बेटी के लिए मायके के समान ही प्यार और सम्मान का स्थान होना चाहिए। एक बेटी तभी समझदार बेटी होती है जब अपने माता पिता का सर गर्व से ऊँचा कर देती है। अगर बेटी ससुराल में आकर अपने माता पिता को अपने झूठ मूठ के दुख और दर्द दिखाती है या सुनाती है तब वह अपने माता पिता की सबसे बड़ी दुश्मन है। हर लड़की को उसके माता पिता डांटते हैं खरी खोटी सुनाते हैं ताकि लड़की अच्छी पढ़ाई कर सके। या अच्छे संस्कार सीख सके। माता पिता अपनी बेटी के द्वारा किये हुए नुक़सान को भी नहीं सहन करते हैंबहुत उल्टा सीधा सुनाते हैं ,खरी खोटी भी सुनाते हैं और डांट भी लगाते हैं। और आश्चर्य की बात ये है की बेटी बड़े गर्व से कहती है कि मुझे मेरे माता पिता ने कभी नहीं डाँटा था। मैंने अपने मायके में कभी काम नहीं किया ऐसे वक़्त तो सिर्फ़ गाँव की गवांर औरतें ही करती है। कोई भी अच्छे घर की लड़की कोई भी शिक्षित लड़की इस तरह की बकवास अपने सास ससुर के साथ नहीं करती। अपने माता पिता पर तरस खाओ और उनकी मदद करो।माँ ने बेटी को सचेत करना इसलिए ज़रूरी समझा क्योंकि वह जानती थी कि विवाह के बाद उसका जीवन कैसा होगा। माँ ने अपनी बेटी को दुनिया की सच्चाई से अवगत कराना चाहा, ताकि वह ससुराल में होने वाले शोषण से खुद को बचा सके। माँ ने बेटी को मजबूत बनने और अपनी क्षमताओं पर विश्वास करने के लिए प्रेरित किया। इसलिए, माँ ने अपनी बेटी को सचेत करने का फैसला किया ताकि वह ससुराल में होने वाले शोषण से बच सके और एक खुशहाल जीवन जी सके।एक लड़की को प्रार्थना और भगवान को धन्यवाद देने के माध्यम से मजबूत बने रहना सिखाया जाना चाहिए! यह उसे हमेशा विनम्र और आभारी रहने में मदद करेगा। जिस बेटी को यह गुण सिखाया जाता है, वह हमेशा धन्य रहेगी। एक माँ को भी अपनी बेटी को हर धर्म को सहन करना और हर धर्म का सम्मान करना सिखाना चाहिए।
ऊषा शुक्ला

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