Mrs Chatterjee Vs Norway: असली कहानी पर आधारित, आपकी आंखें नम ज़रुर कर देगी ये movie

Mrs Chatterjee Vs Norway:  रानी मुखर्जी acting जगत में किसी पहचान की मौहताज नहीं है। कभी लव स्टोरीस में छा जाने वाली रानी, आज बेहद ही संजीदा, और दमदार रोल निभा रही हैं। रानी ने जैसे ही method acting की तरफ रुख मोड़ा है, उन्होंने audience का दिल और ज़्यादा जीत लिया। पहले मर्दानी, फिर हिच्की, उसके बाद मर्दानी 2, और अब Mrs Chatterjee Vs Norway. एक के बाद एक उमदा सबजेक्ट के साथ रानी की गज़ब एक्टिंग की लोग सरहाना करते नहीं थक रहे।

17 मार्च को रिलीज़ हुई रानी की फिल्म Mrs Chatterjee Vs Norway एक सत्य घटना पर अधारित है। अगर आपने मूवी अभी तक नहीं देखी है, लेकिन ट्रेलर देखा है, तो आप समझ ही गए होंगे, की मूवी दिल को छू जाने वाली है, और आंखों में आंसु आना भी स्वभाविक है। “मां की ममता एसी कि किसी 1,2,10 या 100 लोगों से नहीं, बल्कि पूरे देश से लड़ गई।” अगर आपको लग रहा है कि ये सिर्फ फिल्म की बात है तो, आपको बता दें कि एसा हकीकत में हुआ है। जी हां हकीकत में ।

तो ये दर्दनाक मामला 2011 का है, जब सागरिका भट्टाचार्य और अनुरूप भट्टाचार्य नाम के भारतीय कपल अपने दो बच्चों, एक साल की बेटी ऐश्वर्या और 3 साल के बेटा अभिज्ञान, के साथ नॉर्वे में शिफ्ट हुआ था। परिवार देश से दूर विदेश में अपने रीति रिवाज़ों के साथ खुशहाली से रह रहा था। लेकिन कुछ समय बाद नॉर्वे की चाइल्ड वेल्फेयर सर्विसेज ने (CWS) उनपर अपने बच्चों को फॉस्टर केयर में देने का दबाव बनाया, जिसका ज़ाहिर तौर पर कपल ने विरोध किया। बच्चों का फॉस्टर केयर में जाने का मतलब, कपल उन्हे तब तक नहीं देख सकता, जब तक वो 18 साल के नहीं हो जाते।

अब जानते हैं कि चाइल्ड वेल्फेयर सर्विसेज के अनुसार कपल से उनके बच्चों को फॉस्टर केयर में भेजने का कारण क्या था?

चौंकिएगा नहीं लेकिन भारतीय परिवारों की एक आम आदत जहां हम बच्चों को हाथ से खाना खिलाते हैं, Western culture के जैसे उन्हें एक अलग room में न रख कर, माता-पिता अपने साथ सुलाते हैं, बच्चों को नज़र ना लगे, इसलिए उन्हें काला टिका लगाते हैं, बस ये ही कुछ obvious सी बातें Norway जैसे देश के चाइल्ड वेल्फेयर सर्विसेज (CWS) के अनुसार गलत थीं। जिनके मुताबिक हाथों से खाना खिलाना, जबरदस्ती खिलाना होता है। बस फिर एक मां को अपने ही नन्हें-मुन्ने बच्चों कि custody लेने के लिए जद्दोजहत करनी पढ़ी । सोचिए क्या पीढ़ा रही होगी, ठीक वही पीढ़ा इस मूवी में रानी मुखर्जी ने भी बखूबी दर्शाई है।

बता दें कि इस लड़ाई में भारत की सरकार ने भी इसमें हिस्सा लिया। हालांकि कुछ बदलावों के बाद भारत सरकार ने इस मामले में दखल बंद कर दिया था। नवंबर 2012 में सागरिका भट्टाचार्य का साइकेट्रिक टेस्ट हुआ और उन्हें अपने बच्चों को पालने के लिए बिल्कुल सही पाया गया। तब उन्हें अपने बच्चों को वापस घर लाने की इजाज़त मिली थी।

Norway Embassy ने दिया मूवी पर reaction

अब इस movie के reviews के according, movie तो superhit जा ही रही है, और लगातार twitter पर trend भी कर रही है, जिसके बाद Norway के दूतावास का भी response आया है। Norway Embassy की ओर से Mrs Chatterjee Vs Norway फिल्म को लेकर बयान जारी किया गया है। Embassy ने इस फिल्म को एक काल्पनिक फिल्म बताया और कहा कि बच्चों और उनके निजता के अधिकार को देखते हुए कड़े गोपनीयता नियमों के कारण सरकार इस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं कर सकती।

अगर आपने इस मूवी को देख लिया है, तो comment box में हमें बताइए कि आपको ये मूवी कैसी लगी? बाकी देश और दुनिया की तमाम खबरों के लिए आप बने रहिए The News15 के साथ।

 

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