8 बच्चों की मां, पैरों में लोहे की जंजीरें और 7 साल का नरक! जैसलमेर में देवर के जुल्म से ऐसे छूटी सुगना भाभी

 जैसलमेर में महिला को बेड़ियों की कैद से करवाया आजाद

 

जैसलमेर: राजस्थान के मरु प्रदेश मखमली रेत के समंदर के बीच बसे सीमान्त जिले जैसलमेर से इंसानियत को झकझोर कर रखने वाली एक तस्वीर सामने आई है। जहां बड़ाबाग क्षेत्र की भाटो की ढाणी में एक महिला पिछले 7 साल से बेड़ियों में जकड़ी हुई जीवन जीने को मजबूर थी। पत्थरों से बने एक अस्थायी ठिकाने में कैद इस महिला के पैरों में लोहे की बेड़ियां थीं और उसकी जिंदगी मानो चार दीवारों के बजाय उन जंजीरों तक सीमित हो गई थी। लेकिन उसकी जिंदगी में उम्मीद की एक किरण तब जगी, जब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण यानी डीएलएसए की टीम वहां पहुंची और उसे इस नारकीय जीवन से आजादी दिलाई।

दरअसल, डीएलएसए के त्रैमासिक निरीक्षण के दौरान एक पैरा लीगल वॉलंटियर ने महिला के बेड़ियों में बंधे होने की सूचना दी। सूचना मिलते ही डीएलएसए सचिव एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ललित पुरोहित ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। जिस पर टीम मौके पर पहुंची और हालात देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया। इसके बाद स्वयं ललित पुरोहित भी घटनास्थल पहुंचे और महिला की स्थिति का जायजा लिया।

 

जंजीरों में जकड़ी सुगना के आंखों से छलका दर्द

 

जंजीरों में जकड़ी महिला ने अपना नाम सुगना बताया। उसकी आंखों में दर्द, बेबसी और वर्षों की उपेक्षा साफ दिखाई दे रही थी। उसने आरोप लगाया कि उसके देवर ने उसे बेड़ियों से बांध रखा था। मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण वह न तो अपनी पीड़ा किसी तक पहुंचा सकी और न ही अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा सकी। इस रेस्क्यू अभियान में समाज कल्याण विभाग और 108 एम्बुलेंस सेवा की टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए संयुक्त प्रयासों से सुगना के पैरों से बेड़ियां हटाई गईं। जैसे ही जंजीरें खुलीं, मानो उसके जीवन पर पड़ा एक भारी बोझ भी उतर गया। उसे तत्काल चिकित्सा सहायता के लिए सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और बाद में मुख्यमंत्री पुनर्वास गृह भेजा गया, जहां अब उसकी देखभाल की जा रही है।

 

 कहा- देवर ने उसे बंधी बनाकर रखा

 

दरअसल आज से करीब 35 साल पहले सुगना की शादी बुद्धाराम भट्ट से हुई थी। दोनों ने अपने दाम्पत्य जीवन की शुरुआत आंखों में सुनहरे सपने लेकर की थी। इस दौरान सुगना ने 5 लड़कियों व 3 लड़को को जन्म दिया। जिसमें से 5 बेटियों व 1 लड़के की शादी हो चुकी है वही दो लड़के कुंवारे हैं। विधि को कुछ और ही मंजूर था। करीब 8 साल पहले बुद्धाराम अपने हंसते खेलते परिवार को छोड़ इस संसार से विदा हो गए और इसके बाद सुगना की मानसिक स्थिति भी खराब हो गई। सुगना का आरोप है कि उसके देवर ने उसे बंधी बनाकर रखा है।
 

सुगना को ऐसे मिला जीवनदान

 

 

डीएलएसए सचिव ललित पुरोहित ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया कि महिला मानसिक रूप से कमजोर है और लंबे समय से उसे उचित इलाज, देखभाल और परामर्श नहीं मिला था। अब उसके उपचार और काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि वह सामान्य जीवन की ओर लौट सके और उसे वह सम्मान मिल सके जिसकी वह हकदार है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने के निर्देश दिए हैं।

यह घटना केवल एक महिला की पीड़ा की कहानी नहीं है, बल्कि समाज के सामने एक बड़ा सवाल भी है कि आखिर मानसिक रूप से कमजोर और असहाय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हम कितने संवेदनशील हैं। हालांकि, इस अंधेरे के बीच राहत की बात यह है कि समय पर हुए हस्तक्षेप ने सुगना को बेड़ियों से ही नहीं, बल्कि एक दर्दनाक और अमानवीय जिंदगी से भी आजादी दिला दी।

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