चरण सिंह
नेपाल क्रांति के बाद मोदी सरकार के कान खड़े हो गए हैं। सरकार इस प्रयास में लग गई है कि क्रांति तो बहुत दूर की बात है देश में आंदोलन भी खड़ा न हो सके। नेपाल क्रांति से जुड़ी पोस्ट और आंदोलन को हवा देने वाले भाषण और पोस्ट पर सरकार का विशेष ध्यान है। वजह जो भी हो मोदी सरकार यह माहौल बना रही है कि आंदोलनकारी सोच रखने वाले और आंदोलन के लिए तैयार किये जा रहे युवाओं में डर पैदा कर आंदोलन होने ही न दिया जाए। ख़बरें ऐसी आ रही है कि यदि बिहार में एनडीए फिर से सरकार बनाने में सफल हो गया तो विपक्ष बीजेपी पर वोट चोरी करने का आरोप लगाकर देशभर में बड़ा बवाल करा सकता है।
दरअसल देश में जितने भी बदलाव हुए हैं सभी आंदोलन के बल पर हुए हैं। चाहे आजादी की लड़ाई हो, जेपी आंदोलन हो, बोफोर्स के खिलाफ हुआ आंदोलन हो या फिर अन्ना आंदोलन। सभी आंदोलन बदलाव लेकर आये हैं। नेपाल क्रांति के बड़ा विपक्ष के आक्रामक रुख अपनाने पर मोदी सरकार में बैठे मंत्रियों में दहशत देखी जा रही है। सरकार सोशल मीडिया का सहारा लेकर आंदोलनकारियों पर शिकंजा कस सकती है। जांच एजेंसियां सक्रिय हैं।
देखने में आता है कि भारतीय जनता पार्टी की आंदोलन को दबाने के लिए खास रणनीति का इस्तेमाल करती है। सड़क पर तो आंदोलन कुचला जाता ही है साथ ही आंदोलनकारी के घर परिवार, रिश्तेदारों में दहशत पैदा करने का काम बीजेपी के कार्यकर्ता और समर्थक करते हैं। परिवारवालों में एक संदेश दिया जाता है कि संबंधित व्यक्ति जेल चला जाएगा। परिवार का क्या होगा ? सत्ता के खिलाफ खड़ा होना खतरा मोल लेना है। ये सभी माहौल बनाया जाता है। इन सबका का भी उस पर कोई असर न पड़े तो खामियां ढूंढी जाती है। यदि सम्पत्ति है तो उसके बारे में जानकारी जुताई जाती है कि कमजोरी कहां है ? ईडी सीबीआई इनकम टैक्स विभाग का इस्तेमाल किया जाता है। डराया जाता है, धमकाया जाता है। लालच दिया जाता है। मतलब इन सबकी परवाह न करने वाला व्यक्ति ही सरकार के खिलाफ खड़ा हो सकता है। मतलब इस डरे हुए समाज से कोई क्रांति की उम्मीद नहीं की जा सकती है।
लोगों के आरामतलबी और स्वार्थी होने के चलते ही भी आंदोलन प्रभावित हुए हैं। जो व्यक्ति दो रोटी आराम से खा रहा है। वह की पचड़े में नहीं पड़ना चाहता है। वह बात दूसरी है कि वह खुद भी सुरक्षित नहीं है। मोदी सरकार इस बात का भी फायदा उठा रही है कि विपक्ष सत्ता के लिए सब कुछ करना चाहता है। बदलाव से उसे कोई लेना देना नहीं है। देश और समाज के लिए सच्चे मन से काम करने वाले नेताओं का बड़ा टोटा है। वैसे भी विपक्ष में बैठी सभी पार्टियां किसी न किसी रूप से सत्ता में रही हैं।
बीजेपी ने एक रणनीति के तहत लोगों को हिन्दू मुस्लिम में उलझाया हुआ है। ऐसा भी नहीं है कि विपक्ष कोई अच्छी राजनीति कर रहा है। जनहित से जुड़े मुद्दों विपक्ष को भी कोई मतलब नहीं। बस किसी तरह से सत्ता मिल जाए। देश और समाज के लिए निष्पक्ष रूप से काम करने वाले लोगों का घोर अभाव है। नई पीढ़ी की चिंता न उनके परिजनों को है और न ही उनको खुद को। देश में जो हालात हैं। ऐसे में आशंका है कि कहीं नई पीढ़ी मानसिक रोगी न बन कर रह जाए।








