भरत तिवारी एनकाउंटर (Bharat Tiwari Encounter) मामले में सोमवार को बड़ा एक्शन हुआ. आरा व्यवहार न्यायालय के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत ने शाहपुर थाना कांड संख्या 178/2026 में नामजद और जांच के दौरान सामने आए अप्राथमिकी आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। अदालत की ओर से 12 अगस्त तक इन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश करने को कहा गया है। इसी दिन पुलिस अधीक्षक (आरा) को भी अदालत में उपस्थित होकर अब तक की कार्रवाई और गिरफ्तारी की स्थिति से अवगत कराना होगा।
आरोपियों में कौन-कौन शामिल?
भरत तिवारी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट की ओर से प्राथमिकी और जांच के दौरान सामने आए नामों के आधार पर कुल 11 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है। इनमें तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार, तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, पुलिसकर्मी अंकित आर्यन, हरिश्चंद्र कुमार, एसटीएफ जवान अक्षय कुमार, विकास कुमार, एएसआई रमाशंकर यादव समेत अन्य आरोपी शामिल हैं. यहां बता दें कि एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है।
क्या-क्या जानकारी मांगी गई?
अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह के अनुसार, कोर्ट की ओर से पुलिस से यह भी जानकारी मांगी गई है कि मामले की जांच कब शुरू हुई, अब तक जांच में क्या-क्या कदम उठाए गए और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने क्या कार्रवाई की. इसके साथ ही आरोपियों को जारी किए गए नोटिस, गिरफ्तारी नहीं होने के कारण और जांच की मौजूदा स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है।
अदालत के निर्देश के मुताबिक 12 अगस्त को पुलिस अधीक्षक को न्यायालय में उपस्थित होकर यह बताना होगा कि अब तक कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए क्या कार्रवाई की गई है।
संजीव कुमार ने बताया कि अदालत के सामने इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस, मोबाइल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और जांच के दौरान दर्ज किए गए गवाहों के बयान से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। भरत तिवारी के मोबाइल फोन को जांच के लिए पुलिस द्वारा जब्त किए जाने का भी जिक्र किया गया. परिवार और अधिवक्ता की ओर से दावा किया गया है कि मोबाइल एवं अन्य डिजिटल माध्यमों में मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।







