माघ मेला से 2027 पंजाब चुनाव की बिछेगी बिसात!

पंजाब की सियासत में अब 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछनी शुरू हो गई है, और इसका एक बड़ा मंच बना है श्री मुक्तसर साहिब का माघी मेला (Maghi Mela)। यह मेला सिख इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है, जहां लाखों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं, और पिछले कई दशकों से यहां राजनीतिक सम्मेलन भी पारंपरिक रूप से होते रहे हैं।
जनवरी 2026 में हुए इस मेले में राजनीतिक पार्टियों ने इसे 2027 के चुनावों की शुरुआत के तौर पर इस्तेमाल किया। यहां बीजेपी ने पहली बार अकेले (अकाली दल से अलग होकर) बड़ा राजनीतिक सम्मेलन किया, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) ने करीब 10 साल बाद वापसी की और सबसे बड़ा पंडाल लगाकर ताकत दिखाई।

बीजेपी का प्लान क्या है?

बीजेपी 2020 में शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन तोड़ने के बाद पहली बार इस मेले में अकेले उतरी। सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को जोड़ना और ग्रामीण इलाकों में पैठ बढ़ाना। पारंपरिक रूप से अकाली दल का गढ़ माने जाने वाले मालवा क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना।
अकेले चुनाव लड़कर 2027 में सरकार बनाने का संकेत देना (कई नेता गठबंधन की बात करते हैं, लेकिन पार्टी सभी 117 सीटों पर अकेले लड़ने की तैयारी में है)।
मेले में केंद्रीय और राज्य स्तर के बड़े नेता शामिल हुए, जैसे हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी, अनुराग ठाकुर आदि।

यह कदम बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है, जहां वो खुद को सिर्फ शहरी या हिंदू-केंद्रित पार्टी से आगे बढ़ाकर पंजाब की मुख्यधारा की पार्टी के रूप में पेश करना चाहती है।

AAP का प्लान क्या है?

AAP के लिए यह मेला मिशन 2027 का आगाज था। पार्टी ने सबसे बड़ा टेंट लगाया (60-70 हजार लोगों की उम्मीद) और बड़ी संख्या में बसें मंगवाईं। AAP का फोकस:

दिल्ली में सत्ता गंवाने के बाद पंजाब की सरकार को हर हाल बचाना और दोबारा जीत दर्ज करना।
भगवंत मान सरकार की उपलब्धियों को हाईलाइट करना और ग्रामीण वोट बैंक को मजबूत रखना।
2016 के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर वापसी, जहां अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान जैसे नेता पहले भी ऐसे मंच का इस्तेमाल कर चुके हैं।

AAP पंजाब में अभी सत्तारूढ़ है, और मेले जैसे धार्मिक-जनसंपर्क वाले मंचों से वो अपनी ताकत दिखाकर विपक्ष को दबाव में रखना चाहती है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने अपना पारंपरिक सम्मेलन किया और 2027 के लिए टोन सेट करने की कोशिश की। कांग्रेस ने इस बार राजनीतिक रैली नहीं की (2017 के अकाल तख्त के एडिक्ट का हवाला देकर), लेकिन अन्य मुद्दों पर सक्रिय है। कुल मिलाकर, माघी मेला अब 2027 के चुनावों की शुरुआती जंग का प्रतीक बन गया है। 2027 के विधानसभा चुनाव फरवरी के आसपास होने की संभावना है (पिछले पैटर्न के मुताबिक), और अभी से सभी दल ग्रामीण-धार्मिक मुद्दों पर फोकस कर रहे हैं।

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