राघव चड्ढा ने छोड़ी आम आदमी पार्टी तो आया कुमार विश्वास का पहला रिएक्शन! 

नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद से सियासी बवाल मच गया है। इन सबके बीच आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और कवि कुमार विश्वास ने वीर रस की एक कविता शेयर कर विरोधियों पर निशाना साधा। कुमार विश्वास ने 4 अप्रैल को शेयर की गई अपनी एक कविता को री-पोस्ट करते हुए फिर से निशाना साधा है।

“विदुर का भीष्म का पद अश्रु-प्रक्षालन नहीं भूला, कठिन-व्रत द्रोण-इंगित तपस्पथ-चालन नहीं भूला, कुटिल लाक्षागृहों के फेर में तूणीर टाँगा हैं, मगर शर का प्रखर हत लक्ष्य संचालन नहीं भूला..!” ये लाइनें कुमार विश्वास द्वारा अक्सर सुनाई जाने वाली वीर रस की कविता का हिस्सा हैं, जो महाभारत के संदर्भ में भीष्म, द्रोण और विदुर के चरित्र व संघर्ष को दर्शाती हैं.

महाभारत का संदर्भ शेयर कर साधा निशाना

“विदुर का भीष्म का पद अश्रु-प्रक्षालन नहीं भूला”- इसका मतलब है जब दुर्योधन ने कृष्ण का अपमान किया, तब विदुर ने दुखी होकर कृष्ण के चरणों को अपने आंसुओं से धोया था। कुमार विश्वास के सोशल मीडिया हैंडल से गूंजती इन पंक्तियों ने दिल्ली से पंजाब तक की सियासत में आग लगा दी. कुमार विश्वास का इस पूरे घटनाक्रम से सीधे तौर पर कोई लेना-देना है या नहीं. अभी इस पर कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता।

 

 

राघव चड्ढा का AAP छोड़ना केजरीवाल के लिए बड़ा झटका

 

राघव चड्ढा का आप पार्टी छोड़ना एक राजनीतिक घटना है, लेकिन कुमार विश्वास का पोस्ट कथित तौर पर इसे एक नैतिक पतन की कहानी बना देता है। कुमार विश्वास अक्सर केजरीवाल पर तानाशाही और धोखे का आरोप लगाते रहे हैं, जिस समय आम आदमी पार्टी को सबसे ज्यादा एकजुटता की जरूरत थी, उसी समय राघव चड्ढा जैसे युवा नेता का साथ छोड़ देना काल चक्र के उस प्रहार जैसा है, जिसकी चेतावनी कुमार विश्वास कई सालों से देते आ रहे थे।

कुमार विश्वास का कथित तौर पर ये संकेत साफ है कि जिस पार्टी ने सिद्धांतों को ही तिलांजलि दे दी, अब उसका पतन तय है। उन्होंने इस काव्य के जरिए यह बताने की कोशिश की है कि जब नेतृत्व अहंकारी हो जाता है, तो उसके अपने ही उसे ठिकाने लगाने का काम करते हैं।

आम आदमी पार्टी के जिन राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ी है, उनमें राघव चड्ढा के साथ-साथ संदीप पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और स्वाति मालीवाल का नाम शामिल है. हालांकि इनमें से राघव-संदीप पाठक समेत चार सांसद ही बीजेपी में शामिल हुए हैं।

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