हरियाणा की ‘जलेबी’ और बिहार का ‘पटाखा’

 9 साल पहले भी ऐसा ही खेला हुआ था

दीपक कुमार तिवारी

पटना। हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में एक चीज की चर्चा बड़ी जोर से हुई। चर्चा थी जलेबी की। बीजेपी के अनुसार राहुल गांधी की जलेबी की फैक्ट्री वाला बयान काफी अजब था। खैर, सुबह जब वोटों की गिनती शुरू हुई तो कांग्रेस के खेमे में उत्साह पसर गया। इसे अतिउत्साह भी कह सकते हैं। बीजेपी ने जिस जलेबी पर तंज कसे थे, जीत की एडवांस खुशी में वही जलेबी कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता बांटने-खाने लगे।
हरियाणा में कांग्रेस दफ्तर के बाहर बकायदा जलेबी बंटनी शुरू हो गई। नेता और कार्यकर्ता जलेबी लेकर एक दूसरे को खिलाने भी लगे। वहीं दूसरी तरफ हरियाणा कांग्रेस के दो दिग्गज नेता दिल्ली भी निकल लिए, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नाम फाइनल कराने के लिए। मतलब सुबह में वोटों की गिनती औ रुझान को देख कर कांग्रेस को ये यकीन हो चला कि बीजेपी तो गई। लेकिन ये क्या, जैसे-जैसे दिन चढ़ा आंकड़े उलटते चले गए।
सिर्फ एक घंटे में बाजी ऐसी उलटी, जिसका कांग्रेस नेताओं को भी यकीन नहीं था। अचानक से न्यूज चैनलों की डिबेट में एक साथ दो चीजें हुईं। कांग्रेस नेताओं का चढ़ा हुआ मन बीच डिबेट शो में उतर गया। वहीं दूसरी तरफ शो में जो बीजेपी नेता मुंह लटकाए बैठे थे, उनकी अचानक से बांछें ही खिल गईं। सारी जलेबी का स्वाद एक घंटे के अंदर ही काफूर हो गया। ये खबर लिखे जाने तक बीजेपी 90 में से 44 सीटों पर आगे थी, इसके अलावा बीजेपी के 3 उम्मीदवार जीत दर्ज कर चुके थे। लेकिन ठहरिए, कुछ ऐसा ही आज से 9 साल पहले भी हुआ था।
साल 2015, उस वक्त सीएम नीतीश कुमार महागठबंधन के मुखिया थे। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की पार्टी और कांग्रेस के साथ उन्होंने विधानसभा का चुनाव लड़ा था। एग्जिट पोल में बीजेपी की सरकार की भविष्यवाणी तक हो गई थी। सुबह 8 बजे तक काउंटिग में एग्जिट पोल के अनुसार ही नतीजे दिखने लगे। बस क्या था, बीजेपी नेता संजय मयूख समर्थकों के साथ बाहर निकले और पटाखे फोड़ने लगे।
लेकिन फूटते पटाखों के बीच ही जनादेश का पिटारा पूरी तरह से खुल गया। पोस्टल बैलेट के बाद EVM खुल गए थे। उसके बाद बीजेपी के अरमानों को फोड़ने वाला बम ही फट गया। बाकी पटाखों को फोड़ने का मौका ही नहीं मिला। रुझान पूरी तरह से पलट गए थे और आखिर में महागठबंधन बीजेपी को पटक कर सत्ता के रथ पर सवार हो चुका था। कहते हैं न कि इतिहास खुद को दोहराता है, कुछ ऐसा ही 9 साल बाद हरियाणा में हुआ, लेकिन इस दफे मायूस बीजेपी नहीं बल्कि कांग्रेस को होना पड़ा।

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