अच्छे अंक से ज़्यादा संतान प्यारी होनी चाहिए

ऊषा शुक्ला

जैसा कि हम सभी जानते हैं बच्चों के फाइनल एग्जाम शुरू होने वाले हैं, ऐसे में बच्चों का पढ़ाई में मन लगाना बहुत जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले आपको पढ़ाई का माहौल सही बनाना होगा। लेकिन ये भी सच है कि हर बच्चे का नेचर अलग-अलग होता है, इसलिए ये भी जरूरी है कि पहले आप अपने बच्चे के नेचर को समझें और उसी के अनुसार उनकी स्थितियों को हैंडल करें। परीक्षा में अच्छे अंक लाना ज़रूरी है या अपनी संतान की सेहत। परीक्षा में अंक से अधिक जरूरी संतान है। पर माता पिता सिर्फ़ अपनी इज़्ज़त की ख़ातिर बच्चों का सुख पूरा ही ख़त्म ही कर देते हैं । माना कि बोर्ड एग्जाम बहुत आवश्यक हैं पर ज़रूरी तो नहीं कि हर बच्चा ही उत्तीर्ण हो या बहुत अच्छे नम्बरों से पाास हो। रिजल्ट के बाद नंबर कम आने पर मायूस होनाच जरूरी है। जिनको कम मार्क्स मिले हैं उनको यह बताना जरूरी है कि अब एजुकेशन सिस्टम की मार सहने को तैयार हो जाओ।अच्छे नंबर लाना ज़रूरी है, लेकिन बच्चे के विकास के लिए भी अच्छे गुणों का होना ज़रूरी है। संख्याएँ सीखना ज़रूरी है क्योंकि ये गणित की बुनियादी इकाई हैं. ।हर माता-पिता अपने बच्चों को समझदार और इंटेलिजेंट बनाना चाहते हैं. पेरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा पूरी क्लास में सबसे अच्छे नंबर लेकर आए और हर एग्जाम में टॉप करें. लेकिन ध्यान रहे बच्चों को एग्जाम में अच्छे नंबर लाने के लिए सिर्फ पढ़ाई ही काफी नहीं है ।हर माता-पिता अपने बच्चों को समझदार और इंटेलिजेंट बनाना चाहते हैं. पेरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा पूरी क्लास में सबसे अच्छे नंबर लेकर आए और हर एग्जाम में टॉप करें. लेकिन ध्यान रहे बच्चों को एग्जाम में अच्छे नंबर लाने के लिए सिर्फ पढ़ाई ही काफी नहीं है ।संख्याओं का इस्तेमाल गिनती, माप, और तुलना करने के लिए किया जाता है. वहीं, बच्चों को मोबाइल का ज़्यादा इस्तेमाल नहीं कराना चाहिए क्योंकि इससे उनके दिमाग और आंखों को नुकसान हो सकता है ।अगर वाकई में आप अपने बच्चों को समझदार और ज्ञानी बनाना चाहते हैं, तो कुछ काम जरूर करें. बच्चों को ज्ञानी बनने के लिए आपको बच्चों की इच्छा के हिसाब से छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए।अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा पूरी क्लास में टॉप करें, तो आपको अपनी और बच्चे की सोच को सकारात्मक रखना चाहिए। अगर वह एक पेपर अच्छा नहीं दे पता है, तो उसे दूसरे पेपर को अच्छी तरह करने के लिए प्रेशर ना दें, बल्कि उसे समझाएं और प्रोत्साहन दें. पेपर को देखते से ही बच्चा घबराए ना इसलिए आप उसे पहले से ही सकारात्मक भाव से समझा दें और उसे सारे प्रश्नों को हल करने के लिए कहें।रिजल्ट के बाद नंबर कम आने पर मायूस होना जरूरी है । जिनको कम मार्क्स मिले हैं उनको यह बताना जरूरी है कि अब एजुकेशन सिस्टम की मार सहने को तैयार हो जाओ। एग्‍जाम में नंबर अच्‍छे नहीं आए तो क्‍या हुआ, तुम्‍हारा टैलेंट तुमसे कोई नहीं छीन सकता.। नंबर, ये तो बस कागज के टुकड़ों पर छपते हैं.। दुनिया में हर महान शख्‍स ने एग्‍जाम में टॉप नहीं किया जो तुम्‍हारा टॉप न करना पाप हो गया.। यहां मैं इन तीनों बातों से सहमत हूं क्‍योंकि एग्‍जाम में नंबर अच्‍छे लाना ही जिंदगी का आखिरी मुकाम नहीं होता. लेकिन इन बातों के बीच एक सच भी है जिसे हम भूल नहीं सकते, वो है एग्‍जाम के बेहतर नंबर। अधिकांश छात्र अच्छे अंक प्राप्त करने में विफल होने का एक मुख्य कारण यह है कि उनकी अध्ययन आदतें और तकनीकें खराब हैं। उनके पास स्पष्ट अध्ययन योजना, सुसंगत अध्ययन कार्यक्रम या उपयुक्त अध्ययन वातावरण नहीं हो सकता है। वे अप्रभावी अध्ययन विधियों का भी उपयोग कर सकते हैं, जैसे कि रटना, रटना या निष्क्रिय पढ़ना।ऐसी मान्यता है कि जब मानव शरीर लम्बवत् रहता है, तो दिमाग ज्यादा एक्ट‍िव रहता है और बातें ज्यादा याद रहती हैं. गिरगिट की तरह लेटकर पढ़ना उचित नहीं बताया गया है. पढ़ाई-लिखाई करने के दौरान जूठे हाथों से किताब-कॉपी आदि न छुए । मेज पर कोई खाने-पीने की चीजें न रखें।मां बाप बच्चों की पढ़ाई को लेकर और सख्त हो गए हैं।उनके खान-पान से लेकर उठने बैठने की रूटीन तक पर कड़ी नजर रखते हैं. इस दौरान पेरेंट्स यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके लाडले और लाडली हर चैप्टर अच्छे से रिवाइज करें और एग्जाम में अच्छे नंबरों से पास हों। और साथ ही जरूरी है संतान की खुशियाँ और स्वास्थ्य। माता पिता को चाहिए कि अपनी संतान को मज़बूत बनाया और सहारा दें। नम्बर तो हर साल आएँगे । संतान का हौसला रोज़ रोज़ नहीं बढ़ता । माता पिता को अपनी संतान की परेशानियों को समझना चाहिए और उसी प्रकार विचार करना चाहिए

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